दिल्ली में स्कूल टीचर करेंगे आवारा कुत्तों की गिनती! एक आदेश को लेकर क्यों मचा बवाल, सरकार ने क्या दी सफाई?

शिक्षा विभाग की कार्यवाहक शाखा की ओर से जारी सर्कुलर के अनुसार, शिक्षा अधिकारियों (DoE) को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले स्कूलों, स्टेडियमों और खेल परिसरों से मनोनीत नोडल अधिकारियों की जानकारी इकट्ठा करने के लिए कहा गया है। इस जानकारी में हर एक अधिकारी का नाम, पदनाम, मोबाइल फोन नंबर और ईमेल आईडी शामिल होनी चाहिए

अपडेटेड Dec 29, 2025 पर 7:49 PM
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दिल्ली में स्कूल टीचर करेंगे आवारा कुत्तों की गिनती? एक आदेश को लेकर क्यों मचा बवाल (PHOTO-AI)

आज दिनभर से एक खबर काफी चर्चाओं में है कि भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली सरकार राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों की गिनती कराएगी, जिसके लिए स्कूल शिक्षकों को तैनात किया गया है। हालांकि, सरकार ने ऐसी किसी भी खबर का खंडन कर दिया है। यह सफाई उन रिपोर्टों के बाद आई है, जिनमें दावा किया गया था कि शिक्षा निदेशालय (DoE) ने सभी जिला शिक्षण संस्थानों को इस अभियान में भाग लेने का निर्देश दिया था। इस कदम की शिक्षक संघों ने कड़ी आलोचना की थी।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षकों को आवारा कुत्तों की गिनती के लिए तैनात नहीं किया गया है। इसके बजाय, स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों को आवारा कुत्तों से जुड़े मुद्दों पर समन्वय करने के लिए नोडल अधिकारियों को नामित करने का निर्देश दिया गया है।

शिक्षा विभाग की कार्यवाहक शाखा की ओर से जारी सर्कुलर के अनुसार, शिक्षा अधिकारियों (DoE) को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले स्कूलों, स्टेडियमों और खेल परिसरों से मनोनीत नोडल अधिकारियों की जानकारी इकट्ठा करने के लिए कहा गया है। इस जानकारी में हर एक अधिकारी का नाम, पदनाम, मोबाइल फोन नंबर और ईमेल आईडी शामिल होनी चाहिए।


शिक्षा विभाग ने साफ किया कि स्कूलों को व्यक्तिगत रूप से रिपोर्ट पेश करने की जरूरत नहीं है, केवल जिला स्तरीय रिपोर्ट ही दिल्ली के मुख्य सचिव के कार्यालय को भेजी जानी चाहिए।

'जनता की सुरक्षा से जुड़ा है मामला'

निदेशालय ने कहा कि यह अभियान जन सुरक्षा और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से जुड़ा है। अपने आदेश में, शिक्षा विभाग ने कहा कि यह मामला "जनता की सुरक्षा" से जुड़े है और खासतौर से 7 नवंबर के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के निर्देशों के अनुपालन के साथ-साथ 20 नवंबर को हुई बैठक के दौरान दिए गए निर्देशों का पालन करने से जुड़ा है। निदेशालय ने आगे कहा कि इस काम को "सर्वोच्च प्राथमिकता" दी जानी चाहिए।

न्यूज एजेंसी PTI की एक रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षक संघों ने इस कदम का विरोध किया। उनका कहना है कि यह काम उन्हें पढ़ाने के कर्तव्यों से भटका देगा। खासकर तब जब प्री-बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं।

सरकारी शिक्षक संघ के अध्यक्ष संत राम ने कहा कि शिक्षकों ने हमेशा जरूरत पड़ने पर कदम बढ़ाया है, खासकर कोविड-19 महामारी के दौरान। लेकिन कामकाजी दिनों में पढ़ाई से अलग के काम देना छात्रों के साथ अन्याय है।

PTI ने संत राम के हवाले से कहा, "अगर स्कूल के दिनों में शिक्षक सिर्फ शिक्षा पर ध्यान दें, तो यह समाज और देश के हित में होगा। ऐसी ड्यूटी छुट्टियों में दी जा सकती है, लेकिन पढ़ाई के सत्र में उन्हें भटकाना बच्चों पर अन्याय है।"

पहले भी कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शिक्षकों को पशु-संबंधी ड्यूटी पर लगाने के ऐसे आदेश जारी हो चुके हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ शामिल हैं।

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