पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों भूचाल आया हुआ है। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपने इतिहास के सबसे बड़े संकट से गुजर रही है। एक तरफ पार्टी के 19 लोकसभा सांसदों के बागी गुट में शामिल होने की खबरें आ रही हैं, तो दूसरी तरफ पार्टी के चर्चित चेहरे और आसनसोल से दो बार के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने एक भावुक बयान जारी कर खुद की स्थिति साफ की है। उन्होंने कहा है कि वो ममता बनर्जी के साथ हैं और उन्हें मुश्किल दौर में अकेला नहीं छोड़ेंगे।
यह विवाद समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना होगा।
2026 के विधानसभा चुनाव में TMC की करारी हार: मई 2026 में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 294 में से 207 सीटें जीतकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। ममता बनर्जी की TMC महज 80 सीटों पर सिमट गई। करीब 15 साल बाद बंगाल में TMC की सत्ता गई और सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी। यह TMC के लिए झटके की तरह था, क्योंकि इससे पहले 2021 में TMC ने 215 सीटें जीती थीं।
बागी सांसदों का विद्रोह: विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC के लोकसभा सांसदों में भी बेचैनी बढ़ने लगी। पार्टी के पूर्व चीफ व्हिप काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 19 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर NDA के साथ जुड़ने की इच्छा जताई। TMC के लोकसभा में कुल 28 सांसद हैं। इनमें से 19 का बागी होना दल-बदल कानून से बचने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत को पार करता है, यानी ये सांसद पार्टी छोड़कर भी अयोग्य नहीं ठहराए जा सकते।
शत्रुघ्न सिन्हा का नाम भी बागी सूची में: इसी बागी खेमे की लिस्ट में शत्रुघ्न सिन्हा (आसनसोल), यूसुफ पठान (बहरामपुर), सायोनी घोष (जादवपुर) और दीपक अधिकारी 'देव' (घाटल) जैसे जाने-माने नाम भी शामिल बताए जा रहे थे। इसी पर शत्रुघ्न सिन्हा ने अपना रुख साफ करने के लिए यह बयान दिया।
शत्रुघ्न सिन्हा ने क्या कहा?
शत्रुघ्न सिन्हा ने न्यूज एजेंसी PTI से बात करते हुए कहा कि आसनसोल और पश्चिम बंगाल की जनता का उन पर जो प्यार और विश्वास रहा है, उसके लिए वो हमेशा आभारी रहेंगे। उन्होंने याद दिलाया कि वो पहली बार ममता दीदी के बुलावे पर आसनसोल आए थे और अपने पहले ही उपचुनाव में उन्होंने रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल की थी। इसके बाद 2024 के आम चुनाव में भी उन्होंने बड़े अंतर से जीत दर्ज की।
सिन्हा ने अपने बुरे वक्त के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि 2019 में जब उन्होंने पटना साहिब सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और हार गए, तब बहुत कम लोग उनके साथ खड़े थे। उस मुश्किल वक्त में ममता बनर्जी उन गिने-चुने लोगों में से थीं जिन्होंने उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें संसदीय जीवन जारी रखने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा, "जब ममता जी ने मेरे बुरे वक्त में मेरा साथ दिया, तो आज उनके मुश्किल दौर में मैं उन्हें कैसे छोड़ सकता हूं? मैं दो बार 'जोड़ा फूल' के निशान पर चुना गया हूं। यह मेरी जिम्मेदारी है कि मैं ममता जी और तृणमूल कांग्रेस के साथ खड़ा रहूं।"
बागी खेमे में अपना नाम आने पर उन्होंने कहा, "हां, मैं स्वभाव से बेबाक हूं। अगर सच बोलना बगावत है, तो मैं भी बागी हूं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैंने तथाकथित बागी गुट को ज्वाइन किया है।"
इससे पहले ममता बनर्जी के खेमे ने बागी सांसदों की लिस्ट को ही चुनौती दी है। TMC नेताओं का कहना है कि शत्रुघ्न सिन्हा और दीपक अधिकारी 'देव' जैसे कई नेता अभी भी पार्टी के साथ हैं। ममता ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर कल्याण बंद्योपाध्याय को अधिकृत चीफ व्हिप बनाने को कहा है और बागी गुट के पत्र को ही नकली करार दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अगर 19 या उससे ज्यादा TMC सांसद औपचारिक रूप से NDA के साथ जाते हैं, तो यह ममता बनर्जी की राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा झटका होगा। 1998 में कांग्रेस से टूटकर बनी TMC जो 2011 से बंगाल की सत्ता पर काबिज थी, उसका 2026 में सत्ता गंवाना और अब संसद में भी टूट की कगार पर पहुंचना, उनकी 28 साल की राजनीतिक विरासत के लिए बड़ी परीक्षा है।
शत्रुघ्न सिन्हा का यह बयान इस उथल-पुथल के बीच ममता खेमे के लिए एक राहत की बात है। लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब संसद में मतदान का वक्त आएगा।