Shimla: हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल, आईजीएमसी (IGMC) शिमला में मरीज को मुक्का मारने वाले डॉक्टर पर बड़ी गाज गिरी है। सोमवार को पल्मोनरी वार्ड में हुए इस हाई-वोल्टेज ड्रामे और मारपीट के बाद, सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर राघव नरूला को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। जांच कमेटी की रिपोर्ट में सामने आया है कि अस्पताल में इस बेहद शर्मसार करने देने वाले वाकये के लिए न केवल डॉक्टर, बल्कि मरीज भी बराबर का जिम्मेदार था।
यह पूरी घटना किसी फिल्मी सीन से कम नहीं थी। अस्पताल के बिस्तर पर लेटे मरीज और सफेद कोट पहने डॉक्टर के बीच गाली-गलौज और लात-घूंसे चले। दरअसल शिमला की एक प्राइवेट एकेडमी में पढ़ाने वाले अर्जुन सिंह ब्रोंकोस्कोपी के लिए अस्पताल आए थे। उनका आरोप है कि डॉक्टर ने उन्हें सम्मान देने के बजाय 'तू' कहकर संबोधित किया। जब उन्होंने इस पर आपत्ति जताई, तो डॉक्टर भड़क गए।दूसरी ओर, डॉ. राघव नरूला का कहना है कि मरीज ने पहले उनके और उनके परिवार के लिए बेहद अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे बात हाथापाई तक पहुंच गई। उनके मुताबिक, वायरल वीडियो में पूरी सच्चाई नहीं दिखाई गई है।
जांच कमेटी ने दोनों की बताया दोषी
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार ने एक जांच पैनल बिठाया था। बुधवार शाम को आई रिपोर्ट के आधार पर निदेशक ने आदेश जारी किया। रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों पक्षों ने 'मिसकंडक्ट' और 'मिसबिहेवियर' किया है। यह एक लोक सेवक के आचरण के खिलाफ और 'रेजिडेंट डॉक्टर पॉलिसी-2025' का सीधा उल्लंघन है। चूंकि डॉक्टर एक पब्लिक सर्वेंट की भूमिका में थे, इसलिए उनकी सेवाएं क्लॉज-9 के तहत तुरंत खत्म कर दी गईं। इसके अलावा, मरीज के परिजनों की शिकायत पर डॉक्टर के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई है।
अस्पताल में तनाव, डॉक्टरों का विरोध जारी
सोमवार को इस घटना के बाद अस्पताल में भारी हंगामा हुआ था। मरीज के रिश्तेदारों ने डॉक्टर की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। वहीं, अब डॉक्टरों की एसोसिएशन (SAMDCOT) भी मैदान में उतर आई है। डॉक्टरों का कहना है कि वे असुरक्षित माहौल में काम कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर भीड़ को उकसाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे। उनका तर्क है कि अस्पतालों को डॉक्टरों और मरीजों, दोनों के लिए सुरक्षित स्थान होना चाहिए।