Shiv Sena UBT Crisis: शिवसेना (UBT) के भीतर जारी सियासी खींचतान के बीच गुरुवार (18 जून) को नई दिल्ली में पार्टी के संसदीय दल की अहम बैठक हुई। खास बात यह है कि खबर लिखे जाने तक 'व्हिप' जारी होने के बावजूद शिवसेना के बागी 6 सांसद मीटिंग में नहीं पहुंचे है। सभी लोकसक्षा सदस्यों को इस बैठक में मौजूद रहने के निर्देश दिए थे। शिवसेना संसदीय दल के कार्यालय में हो रही इस बैठक में संजय राउत समेत तमाम बड़े नेता मौजूद हैं। फिलहाल, मीटिंग में सिर्फ तीन सांसद मौजूद हैं। जबकि बागी छह सांसदों का अभी भी इंतजार हो रहा है।
शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत, अरविंद सावंत और राजाभाऊ पराग प्रकाश वाजे संसदीय दल की बैठक की मौजूद हैं। जो 6 सांसद गायब हैं उनमें संजय देशमुख, संजय जाधव, नागेश पाटिल आष्टीकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, ओमराजे निंबालकर और संजय दीना पाटिल के नाम शामिल हैं।
एक दिन पहले ही सांसदों को बैठक में अनिवार्य रूप से शामिल होने का व्हिप जारी किए जाने के बाद यह बैठक बागी सांसदों द्वारा अलग गुट बनाने की कोशिशों की दिशा तय कर सकती है। पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन का महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है।
यह कदम तब उठाया गया जब इसको लेकर अटकलें तेज हो गईं कि शिवसेना (UBT) के कुछ बागी सांसद लोकसभा में अलग गुट बनाने और बाद में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की अगुआई वाली शिवसेना में विलय करने की योजना बना रहे हैं।
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अगुआई वाली शिवसेना (UBT) ने बुधवार को व्हिप जारी करके अपने सांसदों को राष्ट्रीय राजधानी में अहम मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाया। माना जा रहा है कि यह कदम महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के साथ-साथ बागी नेताओं के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही का रास्ता तैयार करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
बागी सांसद बना सकते हैं अलग गुट
लोकसभा में शिवसेना (UBT) के नौ सदस्य हैं। अलग गुट बनाने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों की जरूरत होगी। अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और अरविंद सावंत, उद्धव खेमे के साथ हैं। जबकि बाकी छह सांसद संजय पाटिल, संजय देशमुख, ओमप्रकाश राजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल आष्टीकर और संजय जाधव अलग खेमे में हैं। अगर बागी गुट का एक भी सांसद इस बैठक में शामिल हो गया तो उस गुट को अलग दल की मान्यता नहीं मिल सकती।
सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से अपील की है कि पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले किसी भी बागी गुट को मान्यता न दी जाए। सूत्रों के मुताबिक ऐसी जानकारी मिली है कि इस बढ़ते संकट के बीच शिवसेना (UBT) के बागी नेताओं के एक गुट ने बुधवार को अनौपचारिक रूप से लोकसभा स्पीकर बिरला से मुलाकात करके लोकसभा में पार्टी के नौ में से छह सांसदों का समर्थन होने का दावा किया।
दिल्ली में आज हो रही यह अहम बैठक कानूनी और राजनीतिक दोनों दृष्टियों से तय करेगी कि उद्धव ठाकरे अपनी संसदीय ताकत बरकरार रख पाते हैं या उन्हें पार्टी में एक और बड़े विभाजन का सामना करना पड़ता है। यदि ऐसा होता है तो 2006 में राज ठाकरे के शिवसेना से अलग होने के बाद यह पार्टी में तीसरा बड़ा विभाजन होगा।
सांसद अरविंद सावंत के साथ एक जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने कहा, "एकनाथ शिंदे की शिवसेना कब से असली शिवसेना बन गई? असली शिवसेना तो यहां है। जहां ठाकरे, वहां शिवसेना...।" संजय राउत ने यह भी कहा, "जो आएंगे वे हमारे हैं, जो नहीं आएंगे वे बेईमान और गद्दार हैं।" जब अरविंद सावंत से पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि सभी सांसद बैठक में आएंगे, तो उन्होंने 'थंब्स अप' का इशारा किया। अनिल देसाई से पूछा गया कि क्या गैरहाजिर सांसदो को नोटिस जारी किया जाएगा, तो उन्होंने कहा, "हम नोटिस जारी करेंगे..."