महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से बड़ी हलचल देखने को मिली है। सोमवार 22 जून को उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए हैं। एकनाथ शिंदे ने इन नेताओं के पार्टी में शामिल होने की पुष्टि करते हुए इसे वर्ष 2022 में हुए राजनीतिक बदलाव का दूसरा चरण बताया। शिंदे की शिवसेना में शामिल होने वाले सांसदों में संजय जाधव, संजय पाटिल, संजय देशमुख, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल अष्टिकर और ओमप्रकाश निंबालकर शामिल हैं। इन सांसदों के जाने से उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को बड़ा झटका माना जा रहा है। लोकसभा में पार्टी के कुल नौ सांसद थे, जिनमें से अब छह सांसद शिंदे गुट के साथ चले गए हैं।
अब 6 सांसदों ने छोड़ा साथ
शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने के लिए पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सांसदों का समर्थन जरूरी था। 17 जून को दिल्ली में उद्धव ठाकरे गुट की संसदीय दल की बैठक हुई थी, लेकिन इसमें ये छह सांसद शामिल नहीं हुए थे। तभी से उनके पार्टी छोड़ने की अटकलें लगाई जा रही थीं। उस बैठक में लोकसभा सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे के साथ राज्यसभा सांसद संजय राउत मौजूद थे। रविवार को नागेश पाटिल अष्टिकर और ओमप्रकाश निंबालकर ने भी सार्वजनिक रूप से यह साफ कर दिया था कि वे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट में शामिल होने जा रहे हैं। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) ने इन छह सांसदों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की बात कही थी और उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल बताया था।
अपने साथ आए छह सांसदों के साथ एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि आज उनके साथ छह मजबूत नेता खड़े हैं। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि इन छह सांसदों में से तीन का नाम संजय है, इसलिए इसे "तीन संजय की ताकत" कहा जा सकता है। उन्होंने बिना नाम लिए शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत पर भी निशाना साधा और कहा कि जब उनके साथ इतने संजय मौजूद हैं, तो किसी दूसरे संजय की चर्चा करने की जरूरत नहीं है। शिंदे ने इस राजनीतिक घटनाक्रम की तुलना क्रिकेट से करते हुए कहा कि उनकी टीम ने अब "छक्का" लगा दिया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में उद्धव ठाकरे गुट से अलग होने का फैसला बालासाहेब ठाकरे की हिंदुत्व विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए लिया गया था। उन्होंने कहा, "जहां शिवसेना की मूल विचारधारा है, वहीं असली शिवसेना है।"
शिंदे गुट ने छह सांसदों को अपने साथ जोड़ने के अभियान को "ऑपरेशन टाइगर" नाम दिया था। यह नाम शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की पार्टी के पुराने चुनाव चिह्न 'बाघ' से प्रेरित था। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस अभियान की सफलता पर कहा कि इससे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना पर नेताओं का बढ़ता विश्वास दिखाई देता है। उन्होंने इस राजनीतिक स्थिति के लिए उद्धव ठाकरे को जिम्मेदार ठहराया। वहीं, रविवार को भांडुप में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनका हौसला बिल्कुल नहीं टूटा है। उन्होंने भरोसा जताया कि वह आगे भी अपनी पार्टी का नेतृत्व करते रहेंगे। ठाकरे ने कहा कि उनकी पार्टी ही असली शिवसेना है और वह उसे मजबूत बनाने के लिए लगातार काम करते रहेंगे।
साल 2022 में हुई शिवसेना की टूट का बचाव करते हुए शिंदे ने कहा कि उस समय कई लोगों ने दावा किया था कि उनके साथ आने वाले 40 विधायक दोबारा चुनाव नहीं जीत पाएंगे। उन्होंने बताया कि तब उन्होंने कहा था कि अगर ये विधायक चुनाव नहीं जीतते हैं, तो वह मुख्यमंत्री पद छोड़कर अपने गांव लौट जाएंगे और खेती करेंगे। शिंदे ने कहा कि बाद में हुए चुनाव में उनके साथ जुड़े 60 नेता दोबारा जीतकर आए, जिससे यह साबित हुआ कि जनता ने उनके फैसले और नेतृत्व पर भरोसा जताया।