बिजली का बिल कम करने के लिए सोलर सिस्टम लगवाना नोएडा के कृष्ण यादव को काफी महंगा पड़ गया। करीब 12 लाख रुपये का सोलर सिस्टम लगवाने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि इससे बिजली की जरूरत काफी हद तक पूरी हो जाएगी, लेकिन सिस्टम शुरू से ही ठीक से काम नहीं कर पाया। शुरुआत में करीब दो घंटे का बैकअप मिला और बाद में यह समय घटकर करीब एक घंटे रह गया। बार-बार शिकायत करने और इंजीनियर से जांच कराने के बाद भी समस्या दूर नहीं हुई। आखिरकार कृष्ण यादव ने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया, जहां सुनवाई के बाद आयोग ने कंपनी को पूरी रकम ब्याज समेत वापस करने का आदेश दिया।
करीब 12 लाख रुपये में खरीदा था सोलर सिस्टम
नोएडा के सेक्टर-91 स्थित ग्राम होशियारपुर निवासी कृष्ण यादव ने एआरएस इंटरप्राइजेज से स्मार्टन सोलर सिस्टम 15 केवीए खरीदने और लगवाने का अनुबंध किया था। कंपनी की ओर से दिए गए कोटेशन के आधार पर उन्होंने चॉइस फिनसर्व प्राइवेट लिमिटेड से 7 लाख 80 हजार रुपये का लोन कराया। इसके अलावा उन्होंने 4 लाख 20 हजार 600 रुपये नकद कंपनी को दिए। इस तरह सोलर सिस्टम के लिए कुल 12 लाख 600 रुपये का भुगतान किया गया। सिस्टम लगवाने के बाद जब इसका इस्तेमाल शुरू हुआ तो यह उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर पाया।
कृष्ण यादव के मुताबिक, घर पर सिस्टम लगने के बाद से ही इसमें परेशानी आने लगी थी। सिस्टम करीब दो घंटे का बैकअप देने के बाद बंद हो जाता था। उन्होंने इस समस्या की जानकारी कंपनी को दी, जिसके बाद कंपनी ने सर्विस इंजीनियर मनीष कुमार को जांच के लिए भेजा। इंजीनियर ने सिस्टम की गुणवत्ता में कमी की बात कही और उसे ठीक करने की कोशिश की। मरम्मत के बाद भी समस्या खत्म नहीं हुई और सिस्टम करीब एक घंटे का ही बैकअप दे पाया। इसके बाद वह फिर बंद हो गया। इससे साफ था कि केवल मरम्मत करने से भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो रहा था।
बार-बार शिकायत के बाद भी नहीं मिली मदद
मरम्मत के बाद दोबारा समस्या आने पर कृष्ण यादव ने डीलर से संपर्क किया, लेकिन उन्हें संतोषजनक समाधान नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने स्मार्टन पावर सिस्टम्स की कस्टमर केयर सर्विस से भी शिकायत की। उनका कहना था कि कंपनी से संपर्क करने और समस्या बताने के बावजूद सोलर सिस्टम ठीक नहीं हुआ। जब लगातार शिकायतों के बाद भी कोई समाधान नहीं निकला तो उन्होंने 11 मई 2025 को जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप था कि उन्हें खराब या घटिया गुणवत्ता वाला पावर यूनिट दिया गया, जो खरीदने के बाद से ही सही तरीके से काम नहीं कर रहा था।
कंपनी ने नहीं रखा अपना पक्ष
मामले की सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से कोई जवाब या काउंटर-क्लेम पेश नहीं किया गया। इसके बाद आयोग ने 10 अप्रैल 2026 को मामले में एकतरफा यानी ex-parte कार्यवाही जारी रखने का फैसला किया। आयोग ने शिकायतकर्ता की ओर से पेश किए गए दस्तावेज और लिखित बयान देखे। दूसरी तरफ से आरोपों को गलत साबित करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं किया गया। आयोग ने माना कि शिकायत के बावजूद सोलर सिस्टम की समस्या का सही समाधान नहीं किया गया, जो सेवा में कमी के दायरे में आता है। इसके बाद 15 सितंबर को आयोग ने कंपनी को 30 दिनों के भीतर सिस्टम के लिए दी गई पूरी रकम 6 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया। इसके अलावा कानूनी खर्च के तौर पर 5 हजार रुपये देने को भी कहा गया। रकम वापस मिलने के बाद कंपनी अपना सोलर सिस्टम वापस ले सकती है।
इस मामले से पता चलता है कि कोई महंगा घरेलू उपकरण या सोलर सिस्टम खरीदने के बाद अगर वह उम्मीद के मुताबिक काम नहीं करता और कंपनी शिकायत के बाद भी समस्या दूर नहीं करती, तो उपभोक्ता कानूनी मदद ले सकता है। ऐसे मामलों में खरीद से जुड़े बिल, भुगतान के कागज, लोन की जानकारी, शिकायत और सर्विस से जुड़े दस्तावेज संभालकर रखना भी काफी जरूरी होता है।