ट्रेन लेट होने से छात्रा की छूटी परीक्षा, अब रेलवे देगा 9.10 लाख रुपये...8 साल बाद मिला इंसाफ

समृद्धि ने इस एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी में पूरा एक साल लगाया था। उसका परीक्षा केंद्र लखनऊ के जय नारायण पीजी कॉलेज में था। उसने बस्ती से ट्रेन का टिकट लिया था, जिसे सुबह 11 बजे लखनऊ पहुंचना था, लेकिन ट्रेन करीब ढाई घंटे देर से पहुंची। इसी वजह से वह परीक्षा देने से चूक गई

अपडेटेड Jan 27, 2026 पर 5:41 PM
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ट्रेन की लगातार देरी से जुड़ा एक अनोखा मामला सामने आया है।

ट्रेन की लगातार देरी से जुड़ा एक अनोखा मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले की एक छात्रा को रेलवे से 9.10 लाख रुपये का मुआवजा मिला है। वजह यह रही कि ट्रेन दो घंटे से ज्यादा लेट हो गई, जिससे वह एक जरूरी एंट्रेंस एग्जाम नहीं दे पाई। छात्रा समृद्धि ने इस मामले को जिला कंज्यूमर फोरम में उठाया था। साल 2018 में वह इंटरसिटी सुपरफास्ट ट्रेन से परीक्षा देने जा रही थी, लेकिन ट्रेन के देर से पहुंचने के कारण वह BSc बायोटेक्नोलॉजी की एंट्रेंस परीक्षा में शामिल नहीं हो सकी। करीब सात साल तक चले केस के बाद आयोग ने समृद्धि के पक्ष में फैसला दिया और रेलवे को लापरवाही का जिम्मेदार माना।

20 लाख मुआवजे की हुई थी मांग

समृद्धि ने इस एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी में पूरा एक साल लगाया था। उसका परीक्षा केंद्र लखनऊ के जय नारायण पीजी कॉलेज में था। उसने बस्ती से ट्रेन का टिकट लिया था, जिसे सुबह 11 बजे लखनऊ पहुंचना था, लेकिन ट्रेन करीब ढाई घंटे देर से पहुंची। इसी वजह से वह परीक्षा देने से चूक गई। इस नुकसान से परेशान होकर समृद्धि ने अपने वकील के ज़रिए 20 लाख रुपये के मुआवज़े की मांग की। इस मामले में रेल मंत्रालय, जनरल मैनेजर और स्टेशन सुपरिटेंडेंट को नोटिस भेजे गए, लेकिन उनकी तरफ़ से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद ज़िला उपभोक्ता आयोग ने माना कि रेलवे समय पर सही सेवा देने में असफल रहा।


रेलवे ने दिया 9 लाख का मुआवजा

रेलवे ने ट्रेन में हुई देरी को तो स्वीकार किया, लेकिन देरी की कोई ठोस वजह नहीं बता सका। आयोग ने रेलवे को आदेश दिया कि वह 45 दिनों के भीतर समृद्धि को 9.10 लाख रुपये का मुआवज़ा दे। अगर तय समय में यह रकम नहीं दी गई, तो इस पर 12 प्रतिशत की दर से अतिरिक्त ब्याज भी देना होगा। समृद्धि के वकील प्रभाकर मिश्रा ने बताया कि यह घटना 7 मई 2018 की है। उस दिन समृद्धि एक एंट्रेंस परीक्षा देने के लिए लखनऊ जा रही थी।

एग्जाम सेंटर पहुंचने में हुई थी देरी 

ट्रेन में काफी देरी हो गई, जिसकी वजह से वह समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच सकी। इसके कारण उसका पूरा शैक्षणिक साल खराब हो गया। वकील ने बताया कि यह मामला सात साल से भी ज़्यादा समय तक कोर्ट में चला। रेलवे ने ट्रेन के देर से चलने की बात तो मानी, लेकिन देरी की कोई सही वजह नहीं बता सका। इसी कारण कोर्ट ने रेलवे पर भारी जुर्माना लगाया। इस फैसले के बाद यात्रियों के अधिकारों और ट्रेन की देरी के लिए रेलवे की जिम्मेदारी को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। ट्रेन लेट होना देशभर के लाखों यात्रियों की आम समस्या है, और यह मामला उसी को उजागर करता है।

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