पुणे की एक स्पेशल MP/MLA कोर्ट में सत्याकी सावरकर ने अपने दादा के भाई विनायक दामोदर सावरकर से जुड़े कई अहम तथ्य रखे। यह सुनवाई कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर मानहानि केस के तहत चल रही है, जिसमें आरोप है कि उन्होंने 2023 में लंदन में दिए गए भाषण में सावरकर की छवि को गलत तरीके से पेश किया।
CNN-News18 के मुताबिक, सत्याकी सावरकर ने कोर्ट में माना कि सावरकर ने जेल में रहते हुए ब्रिटिश सरकार को पांच बार दया याचिकाएं (Mercy Petitions) दी थीं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उस समय कई राजनीतिक कैदी ऐसा करते थे, इसलिए इसे अलग तरीके से नहीं देखा जाना चाहिए।
ब्रिटिश सेना में भर्ती की अपील
सत्याकी ने यह भी स्वीकार किया कि सावरकर ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान भारतीयों को ब्रिटिश सेना में भर्ती होने की अपील की थी। उन्होंने इसका बचाव करते हुए कहा कि इसका मकसद ब्रिटिशों का साथ देना नहीं था, बल्कि भारतीय युवाओं को सैन्य और हथियारों की ट्रेनिंग दिलाना था, ताकि आजादी के बाद देश के काम आ सके।
गाय को लेकर सावरकर का नजरिया
कोर्ट में यह भी साफ किया गया कि सावरकर गाय को भगवान नहीं मानते थे। सत्याकी के मुताबिक, सावरकर का नजरिया तर्कवादी (रैशनल) था और वे गाय को एक “उपयोगी जानवर” के रूप में देखते थे, न कि देवी के रूप में।
मानहानि केस में क्या चल रहा है?
यह मामला राहुल गांधी के उस बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि सावरकर ने मुसलमानों के खिलाफ हिंसा की बात कही थी।
सत्याकी सावरकर ने इसे गलत बताते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनकी टीम ने यह भी आरोप लगाया है कि राहुल गांधी ने कुछ सबूतों को लेकर कोर्ट को गुमराह किया।
फिलहाल कोर्ट इस मामले में सावरकर की विचारधारा और ऐतिहासिक तथ्यों की जांच कर रही है। इस केस में आगे की सुनवाई 1 जून को होगी।