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कैंसर की महंगी दवाओं पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बोले- यह मरीजों के साथ सरासर लूट है!

कैंसर की जरूरी दवाओं की MRP और रिटेलर कीमत के बीच भारी अंतर पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने ज्यादा MRP वाली दवा की कम PTR होने पर इसे मरीजों के प्रति “दिनदहाड़े लूट” जैसी स्थिति बताया। साथ ही जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने वाली व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।

shankar anandअपडेटेड Sep 23, 2026 पर 12:09 PM
कैंसर की महंगी दवाओं पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बोले- यह मरीजों के साथ सरासर लूट है!
कैंसर की दवाओं की कीमतों में बड़े अंतर पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है।

सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर की जरूरी दवाओं की MRP और रिटेलर कीमत में बड़े अंतर पर चिंता जताई है। कैंसर का इलाज वैसे ही मरीज और परिवार के लिए आसान नहीं होता। ऊपर से अगर जरूरी दवाओं की कीमत में इतना फर्क हो, तो इलाज का खर्च और बढ़ जाता है। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान दवाओं की कीमत तय करने की व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल उठे।

Kishan Chand Jain v. Union of India से जुड़े इस मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ कर रही थी। मामले में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों का मुद्दा सामने आया।

27 हजार की दवा मिल रही 2700 रुपये में

सुनवाई के दौरान दवाओं के PTR (Price to Retailer) और MRP (Maximum Retail Price) के बीच बड़े अंतर की बात सामने आई। कोर्ट ने बताया कि कुछ जरूरी कैंसर दवाओं की MRP करीब 27,000 रुपये है, जबकि वही दवा रिटेलर तक करीब 2,700 रुपये में पहुंचती है।

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