सुप्रीम कोर्ट ने अटके हुए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को लेकर एक बड़ा और अहम कदम उठाया है। नोएडा स्थित सुपरटेक सुरनोवा प्रोजेक्ट को पूरा कराने के लिए अदालत ने एक तीन सदस्यीय कोर्ट-निगरानी समिति का गठन किया है। बता दें कि यह प्रोजेक्ट अभी दिवालियापन की प्रक्रिया में फंसा हुआ था। कोर्ट ने कंपनी के पुराने प्रमोटरों को भी हटा दिया है। इस फैसले से हजारों घर खरीदारों को राहत की उम्मीद जगी है, जो लंबे समय से अपने फ्लैट का इंतजार कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने बनाई कमेटी
सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक रियल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड के कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) की निगरानी के लिए तीन सदस्यों की एक कमेटी बनाई है। इसमें जस्टिस एमएम कुमार (पूर्व सीजेआई, जेएंडके हाइकोर्ट) अध्यक्ष, डॉक्टर अनूप कुमार मित्तल कंस्ट्रक्शन व प्रोजेक्ट मैनेजमेंट विशेषज्ञ और वित्तीय प्रबंधन विशेषज्ञ राजीव मेहरोत्रा को शामिल किया गया है। समिति ही अब बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की भूमिका निभाएगी।
खरीदारों के लिए है अच्छी खबर
कोर्ट के इस फैसले के बाद अब नोवा ईस्ट और नोवा वेस्ट टावरों के खरीदारों की रजिस्ट्री शुरू हो सकेगी। गौरतलब है कि इन टावरों में कुल 583 फ्लैट्स हैं, जिनमें से अब तक केवल 85 की ही रजिस्ट्री हो पाई थी। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने 16 दिसंबर के आदेश में कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए “पूरा न्याय” सुनिश्चित करने के लिए यह कमेटी बना रही है। कोर्ट ने साफ किया कि यह कमेटी सुपरटेक रियल्टर्स के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की तरह भी काम करेगी। कोर्ट के मुताबिक, यह कमेटी मंज़ूर की गई प्रोजेक्ट योजना को लागू कराने और उसकी निगरानी के लिए एक उपयुक्त व्यक्ति की नियुक्ति करेगी। प्रोजेक्ट से जुड़े सभी रोज़मर्रा के और अहम फैसले कमेटी खुद बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की भूमिका में लेते हुए करेगी। वहीं, अपीलकर्ता कंपनी या उसकी सहयोगी इकाइयों की भूमिका सिर्फ तकनीकी मदद देने तक सीमित रहेगी।
कोर्ट ने NOIDA अथॉरिटी को दिए ये निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NOIDA अथॉरिटी और फाइनेंशियल लेंडर्स को दिए जाने वाले बकाया भुगतान के लिए फिलहाल “ज़ीरो पीरियड” रहेगा। यानी जब तक प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो जाता और घर खरीदारों को उनके फ्लैट नहीं मिल जाते, तब तक इन संस्थाओं को कोई पैसा नहीं दिया जाएगा। इस दौरान NOIDA अथॉरिटी और कर्ज देने वाली संस्थाएं उन घर खरीदारों के खिलाफ कोई सख़्त कार्रवाई नहीं करेंगी, जिन्होंने अपनी यूनिट का पूरा भुगतान कर दिया है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद अगर कोई अतिरिक्त पैसा बचता है, तो उसी से NOIDA अथॉरिटी और फाइनेंशियल लेंडर्स का बकाया चुकाया जाएगा। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी को निर्देश दिया है कि कंपनी और उसकी पेरेंट कंपनी के खातों की फोरेंसिक जांच के लिए किसी भरोसेमंद और अनुभवी संस्था को नियुक्त किया जाए।
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