Student Protest: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (1 सितंबर) को छात्र प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत देते हुए 20 से 25 जुलाई के बीच दर्ज सभी FIR को रद्द कर दिया। यह फैसला कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से 20 सितंबर को प्रस्तावित 'इंडिया गेट' मार्च वापस लिए जाने के बाद आया। केंद्र सरकार के अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिकल 142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए NEET परीक्षा को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ देश भर में दर्ज सभी FIR को खत्म कर दिया।
हालांकि, कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली पुलिस को NEET पेपर लीक के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों से जुड़े गंभीर आपराधिक बैकग्राउंड वाले 2,873 लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने की इजाजत दे दी है। सुनवाई के दौरान, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से आग्रह किया कि वह अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके देश भर में 20 जुलाई से 25 जुलाई के बीच नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR को खत्म करे।
छात्रों के परिवारों को मुआवजा देगी केंद्र
तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि केंद्र सरकार CJP नेताओं को दिए गए आश्वासन को पूरा करने और NEET परीक्षा रद्द होने के बाद अपनी जान देने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के लिए प्रतिबद्ध है। मेहता ने अदालत को बताया कि मारे गए छात्रों के परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा। इसके तौर-तरीके तय करने के लिए तीन महीने का समय मांगा। शीर्ष अदालत ने केंद्र को निर्देश दिया है कि वह आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को तीन महीने के भीतर मुआवजा दे।
CJP का प्रस्तावित मार्च रद्द
20 जुलाई से 25 जुलाई के बीच देश भर में छात्रों के खिलाफ कई FIR दर्ज की गई थीं। इस दौरान जंतर-मंतर पर हिंसक विरोध प्रदर्शन भी हुआ था। इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का 5 सितंबर का प्रस्तावित 'इंडिया गेट मार्च' अब नहीं होगा। CJP के प्रवक्ता एवं सह-संयोजक सौरव दास मंगलवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने पेश हुए।
इस दौरान अपने फैसले के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने FIR रद्द करने के लिए जो कदम उठाया है, उसे देखते हुए ये फैसला लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने CJP के इस कदम की प्रशंसा की।
CJP ने 5 सितंबर, यानी 'शिक्षक दिवस' पर दिल्ली में एक विरोध मार्च का ऐलान किया था। संगठन ने केंद्र पर आरोप लगाया कि वह 25 जुलाई को किए गए उन वादों को पूरा करने में नाकाम रहा है, जिनके तहत संगठन को परीक्षाओं में गड़बड़ी और नीट पेपर लीक के खिलाफ अपना 36 दिन का आंदोलन वापस लेने के लिए मनाया गया था।
2,873 लोगों पर होगी कार्रवाई
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह राहत सभी आरोपियों के लिए पूरी तरह लागू नहीं की है। शीर्ष अदालत ने कहा कि दिल्ली पुलिस 2,873 ऐसे लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करेगी, जिनका गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस कार्रवाई से मामले में शामिल अन्य पक्षों के अधिकार और हित प्रभावित नहीं होने चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "अगर किसी राज्य में 20-25 जुलाई की घटनाओं से संबंधित कोई अन्य FIR है, तो उसे बंद माना जाएगा।" हालांकि, शीर्ष अदालत ने कहा कि दिल्ली पुलिस गंभीर आपराधिक इतिहास वाले 2,873 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करेगी, जिससे अन्य पक्षों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
इस फैसले के साथ सुप्रीम कोर्ट ने एक तरफ छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जुलाई में दर्ज मामलों को बंद करने का रास्ता साफ कर दिया है। वहीं, गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने की बात कही है। अब ऐसे लोगों की मुश्किलें आने वाले दिनों में बढ़ सकती है।