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Tahawwur Rana News: तहव्वुर राणा के खिलाफ नरेंद्र मान होंगे विशेष पब्लिक प्रॉसिक्यूटर, कोर्ट में रखेंगे जांच एजेंसी का पक्ष

Tahawwur Rana Extradition: भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई पर 2008 में हुए आतंकी हमलों की साजिश रचने वाला तहव्वुर राणा भारत पहुंचने वाला है। वहीं कोर्ट में सुनवाई के लिए केंद्र सरकार ने स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के रूप में एडवोकेट नरेंद्र मान को नियुक्त किया है। इस मामले में आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 10, 2025 पर 10:44 AM
Tahawwur Rana News: तहव्वुर राणा के खिलाफ नरेंद्र मान होंगे विशेष पब्लिक प्रॉसिक्यूटर, कोर्ट में रखेंगे जांच एजेंसी का पक्ष
Tahawwur Rana Extradition: भारत आते ही तहव्वुर राणा को कोर्ट में पेश किया जाएगा। इसके बाद NIA हिरासत मांगेंगी।

मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमलों के पीछे की साजिश से जुड़े एक अहम मामले में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने एडवोकेट नरेंद्र मान को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से केस की सुनवाई के लिए स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त किया है। इस बारे में आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। तहव्वुर राणा की याचिका अमेरिका के सप्रीम कोर्ट में खारिज होने के बाद भारत में प्रत्यर्पण कर दिया गया है। भारतीय जांच एजेंसियां राणा को अमेरिका से भारत ला रही हैं। भारत आते ही राणा को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया जाएगा।

बता दें कि मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर राणा के खिलाफ मुकदमा चलाने की आधिकारिक मंजूरी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को मिल गई है। यह मंजूरी कानून मंत्रालय से मिली है। एनआईए राणा से पूछताछ कर अपना चार्जशीट दाखिल करेगी। मुकदमे की कार्यवाही को आगे बढ़ाने और एनआईए को कानूनी सहायता देने के लिए दो पुलिस महानिरीक्षक, उप महानिरीक्षक और एक पुलिस अधीधक जांच एजेसी का सहयोग करेंगे।

नरेंद्र मान तीन साल तक होंगे विशेष पब्लिक प्रॉसिक्यूटर

सरकार की ओर से जारी किए नोटिफिकेशन के मुताबिक, 3 साल की अवधि तक होंगे या ट्रायल पूरा होने तक रहेंगे। इसमें जो पहले होगा, वहीं मान्य होगा। कुल मिलाकर कहने का मतलब ये हुआ कि अगर ट्रायल 3 साल से ज्यादा चला तो नरेंद्र मान ही विशेष पब्लिक प्रॉसिक्यूटर रहेंगे। वो एनआईए केस RC-04/2009/NIA/DLI की सुनवाई और इससे जुड़े मामलों को दिल्ली की एनआईए स्पेशल कोर्ट और अपीलीय अदालतों में देखेंगे। यह कदम मुंबई अटैक मामले में न्याय प्रक्रिया को और मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है। 26 नवंबर 2008 को मुंबई में आतंकी हमला हुआ था। उस आतंकी हमले में 166 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों घायल हुए थे।

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