TamilNadu Mid-Day Meal: तमिलनाडु के सरकारी स्कूलों में अब चिकन बिरयानी खाएंगे छात्र, विजय सरकार कर रही विचार

TamilNadu Mid-Day Meal: टीचर एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने तमिलनाडु सरकार से मौजूदा मिड-डे मील स्कीम के तहत परोसे जाने वाले चावल की क्वालिटी बेहतर करने और छात्रों के लिए स्कूल के खाने को ज्यादा पौष्टिक और आकर्षक बनाने के लिए हफ्ते में एक बार चिकन बिरयानी देने की मांग की है

अपडेटेड Jul 29, 2026 पर 4:10 PM
TamilNadu Mid-Day Meal: तमिलनाडु के सरकारी स्कूलों में जल्द ही मिड-डे मील स्कीम के तहत चिकन बिरयानी परोसा जाएगा

TamilNadu Mid-Day Meal: तमिलनाडु के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को जल्द ही मिड-डे मील स्कीम के तहत सप्ताह में एक दिन चिकन बिरयानी परोसी जा सकती है। तमिलनाडु सरकार इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है। राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन ने बताया कि यह सुझाव तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के समक्ष रखा जा चुका है। फिलहाल विजय सरकार इसके विभिन्न पहलुओं पर चर्चा कर रही है। इसके अलावा टीचर एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने भी तमिलनाडु सरकार से मौजूदा मिड-डे मील स्कीम के तहत परोसे जाने वाले चावल की क्वालिटी बेहतर करने और छात्रों के लिए स्कूल के खाने को ज्यादा पौष्टिक बनाने के लिए हफ्ते में एक बार चिकन बिरयानी देने की मांग की है।

'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रस्ताव मंगलवार 28 जुलाई को आयोजित एक परामर्श बैठक के दौरान सामने आया। इसमें राज्यभर के 80 से अधिक टीचर एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। यह बैठक 5 अगस्त को पेश होने वाले तमिलनाडु बजट से पहले आयोजित की गई थी। ताकि शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सरकार को सुझाव दिए जा सकें।

लोग क्यों कर रहे हैं ये मांग?


बैठक में टीचर एसोसिएशन ने मांग की है कि वर्तमान मिड-डे मील योजना के तहत छात्रों को दिए जाने वाले चावल की गुणवत्ता में सुधार किया जाए। साथ ही, हफ्ते में एक दिन चिकन बिरयानी को खाने में शामिल किया जाए, ताकि बच्चों को अधिक पौष्टिक और आकर्षक भोजन मिल सके तथा स्कूलों में उनकी उपस्थिति भी बढ़े।

टीचर एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने यह भी सुझाव दिया कि मुख्यमंत्री नाश्ता योजना (Chief Minister’s Breakfast Scheme) के संचालन की जिम्मेदारी दोपहर भोजन (नून मील) कर्मचारियों को सौंपी जाए। साथ ही उनकी सेवाओं को नियमित किया जाए।

सरकार सुझाव पर कर रही विचार

इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन ने कहा कि सरकार पहले से ही इस सुझाव पर विचार कर रही है। हालांकि, अधिकारियों के अनुसार यदि मिड-डे मील में चिकन बिरयानी शामिल करने का फैसला लिया जाता है, तो इसके लिए सामाजिक कल्याण एवं महिला सशक्तिकरण विभाग से भी चर्चा करनी होगी। यही विभाग इस योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालता है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि सरकार इस प्रस्ताव को सकारात्मक नजरिए से देख रही है।

'मुख्यमंत्री नाश्ता योजना' में बदलाव की मांग

बैठक के दौरान टीचर एसोसिएशन ने 'मुख्यमंत्री नाश्ता योजना' और मिड-डे मील योजना का दायरा बढ़ाकर क्लास 12वीं तक के छात्रों को शामिल करने की भी मांग की। वर्तमान में मुख्यमंत्री नाश्ता योजना क्लास 1 से 8वीं तक के लगभग 32 लाख बच्चों को लाभ पहुंचा रही है। जबकि मिड-डे मील स्कीम क्लास 10 तक के करीब 40 लाख छात्रों के लिए लागू है। यदि इसे क्लास 11 और 12 तक बढ़ाया जाता है, तो लगभग 8 लाख एक्स्ट्रा स्टूडेंट को इसका लाभ मिल सकेगा।

TET का भी उठा मुद्दा

इसके अलावा बैठक में स्पेशल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। टीचर एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अनिवार्य हुई टीईटी एग्जाम में शामिल होने वाले टीचर्स को राहत देने की मांग की। उनका कहना है कि यह स्पेशल TET नई नियुक्तियों के लिए नहीं, बल्कि सेवा जारी रखने के उद्देश्य से है। इसलिए टीचर्स अनुभव के आधार पर अतिरिक्त अंक (वेटेज) दिए जाने, न्यूनतम पासिंग नंबर करने तथा सभी वर्गों के लिए समान पासिंग मार्क्स लागू करने जैसे कदम उठाए जाने चाहिए।

फिलहाल सरकार इन सभी सुझावों पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि आगामी बजट या उसके बाद इस संबंध में महत्वपूर्ण घोषणा की जा सकती है। एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, योग्य नियुक्तियों के लिए TET को अनिवार्य बनाने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद टीचर एसोसिएशन ने सरकार से परीक्षा में शामिल होने वाले शिक्षकों को राहत देने का आग्रह किया है।

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तमिलनाडु हाई एंड हायर सेकेंडरी स्कूल ग्रेजुएट टीचर्स एसोसिएशन के संस्थापक ए. मायावन ने कहा, "यह स्पेशल TET सर्विस जारी रखने के लिए है, न कि नए शिक्षकों की नियुक्ति के लिए। टीचिंग अनुभव के लिए वेटेज मार्क्स देने या क्वालिफाइंग मार्क्स कम करने पर कोई कानूनी रोक नहीं है। सभी समुदायों के लिए पासिंग मार्क्स एक समान होने चाहिए।"

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