Get App

तमिलनाडु में फंसा सत्ता का गणित, बहुमत से दूर विजय...अब राज्यपाल के फैसले पर टिकी सबकी नजरें

अगर तमिलनाडु में यह संवैधानिक गतिरोध लंबे समय तक बना रहता है और किसी भी पार्टी या गठबंधन के पास स्थिर सरकार बनाने के लिए जरूरी समर्थन नहीं होता, तो राज्यपाल एक अहम कदम उठा सकते हैं। ऐसी स्थिति में राज्यपाल संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेज सकते हैं। अगर राष्ट्रपति इस रिपोर्ट से सहमत होते हैं, तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है

MoneyControl Newsअपडेटेड May 06, 2026 पर 9:49 PM
तमिलनाडु में फंसा सत्ता का गणित, बहुमत से दूर विजय...अब राज्यपाल के फैसले पर टिकी सबकी नजरें
Tamil Nadu : तमिलनाडु की राजनीति इस समय संवैधानिक संकट जैसी स्थिति में पहुंच गई है

तमिलनाडु की राजनीति इस समय संवैधानिक संकट जैसी स्थिति में पहुंच गई है। जानकारी के मुताबिक, तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर, तमिलगा वेट्री कड़गम (टीवीके) के नेता विजय द्वारा पेश किए गए समर्थन के आंकड़ों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। टीवीके और कांग्रेस के गठबंधन ने सरकार बनाने का दावा किया है, लेकिन विधानसभा में बहुमत हासिल करने के लिए जरूरी आंकड़े से यह गठबंधन अभी पीछे है। तमिलनाडु विधानसभा में कुल 234 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन चाहिए। फिलहाल इस गठबंधन के पास कुल 112 सीटें हैं। इनमें 107 सीटें टीवीके की और 5 सीटें कांग्रेस की हैं। यानी बहुमत तक पहुंचने के लिए गठबंधन को अभी 6 और विधायकों के समर्थन की जरूरत है।

राजभवन की भूमिका अहम

सीटों की कमी के कारण अब पूरा ध्यान चुनावी नतीजों से हटकर राजभवन की भूमिका पर आ गया है। ऐसे हालात में राज्यपाल के पास यह जिम्मेदारी है कि वे तय करें कि कौन सरकार बनाने की स्थिति में है। खंडित जनादेश के बीच अब राज्यपाल संवैधानिक नियमों और अपने अधिकारों को ध्यान में रखते हुए अगला फैसला लेने की तैयारी कर रहे हैं। जब विधानसभा चुनाव में किसी एक पार्टी या पहले से बने गठबंधन को साफ बहुमत नहीं मिलता, तो उसे ‘त्रिशंकु विधानसभा’ कहा जाता है। ऐसी स्थिति में राज्यपाल की भूमिका काफी अहम हो जाती है।

क्या कहते हैं नियम

सब समाचार

+ और भी पढ़ें