Telangana Caste Survey: तेलंगाना सरकार ने अपने जाति सर्वेक्षण (SEEPC) के आंकड़ों को सार्वजनिक कर दिया है। इसे 'सामाजिक न्याय का मॉडल' बताते हुए सरकार ने राज्य की हर छोटी-बड़ी जाति का कच्चा चिट्ठा पेश किया है। राज्य के पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने केंद्र सरकार से भी इसी तर्ज पर राष्ट्रीय स्तर पर गणना कराने की मांग की है। वैसे आंकड़ों से साफ है कि चुनावी राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाने वाला 'यादव' समुदाय राज्य की एक बड़ी ताकत बनकर उभरा है।
सामाजिक श्रेणियों के आधार पर जनसंख्या
जाति सर्वेक्षण से आए आंकड़ों में तेलंगाना के सामाजिक ताने-बाने में अत्यधिक विविधता देखी गई है। सर्वे के अनुसार राज्य में किसी एक जाति का पूर्ण वर्चस्व नहीं है, लेकिन कुछ समूह संख्यात्मक रूप से काफी मजबूत हैं:
मादिगा: यह राज्य का सबसे बड़ा एकल समूह है, जिसकी जनसंख्या 36,57,551 (10.3%) है।
मुदिराज: 7.4% हिस्सेदारी के साथ दूसरा बड़ा समूह।
लम्बाडा/बंजारा: 6.8% आबादी।
रेड्डी: इस समुदाय की हिस्सेदारी 4.8% दर्ज की गई है।
अन्य समूह: गौड़, माला, मुन्नूरुकापू, पद्मशाली और रजक समुदायों की भी महत्वपूर्ण मौजूदगी है।
तेलंगाना में यादवों का दम
सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, तेलंगाना की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने में यादव (गोल्ला) समुदाय का कद काफी बड़ा है। राज्य में यादवों की कुल संख्या 20,18,725 दर्ज की गई है। तेलंगाना की कुल आबादी में यादव समुदाय 5.7% का हिस्सा रखता है। व्यक्तिगत जाति के लिहाज से यादव राज्य के टॉप-5 सबसे बड़े समुदायों में शामिल हैं।
मुस्लिम अल्पसंख्यकों का गणित
अल्पसंख्यक आबादी में मुस्लिम समुदाय सबसे प्रमुख है। कुल 12.56% मुस्लिम आबादी को दो उप-श्रेणियों में बांटा गया है:
BC मुस्लिम: इनकी संख्या 35,76,588 (10.08%) है।
OC मुस्लिम: इनकी संख्या 8,80,424 (2.48%) है।
ईसाई, जैन, सिख और बौद्ध जैसे अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों की व्यक्तिगत उपस्थिति 1% से भी कम है।
भविष्य की नीतियों का आधार बनेगा यह सर्वेक्षण
मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने कहा कि यह सर्वे केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि भविष्य की सरकारी योजनाओं और नीतियों का आधार बनेगा। सरकार का लक्ष्य प्रत्येक वर्ग को उसकी जनसंख्या के अनुपात में लाभ पहुंचाना है। इन आंकड़ों को आगामी विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा, जहां राजनीतिक दलों और विभिन्न जाति समूहों से सुझाव भी लिए जाएंगे।