संसद में अक्सर देखा जाता है कि सांसद अपनी सैलरी और भत्ते बढ़ाने के मामले में पार्टी की राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट हो जाते हैं। लेकिन कुछ सांसद ऐसे भी हैं जिन्हें अपनी सैलरी लेने में कोई दिलचस्पी नहीं है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी के अनुसार, मौजूदा लोकसभा में सिर्फ दो सांसद ऐसे हैं जिन्होंने अपनी सैलरी नहीं लेने का फैसला किया है—एक बीजेपी से और दूसरे कांग्रेस से हैं।
ये सांसद नहीं लेते हैं अपनी सैलरी
दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों सांसदों के चुनाव क्षेत्र एक-दूसरे से करीब 2,575 किलोमीटर दूर हैं, यानी लगभग उतनी दूरी जितनी कुरुक्षेत्र और इंफाल के बीच है। इनमें से एक सांसद तो और भी आगे बढ़ गए हैं और उन्होंने न सिर्फ सैलरी, बल्कि सांसद के तौर पर मिलने वाले दफ्तर से जुड़े सरकारी भत्ते और सुविधाएं भी लेने से मना कर दिया है। इंडिया टुडे के रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा सचिवालय से RTI के तहत मिली जानकारी के अनुसार, अपनी सैलरी नहीं लेने वाले दो सांसद कुरुक्षेत्र से नवीन जिंदल और इनर मणिपुर से डॉ. बिमोल अकोइजाम अंगोमचा हैं। इनमें से नवीन जिंदल ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए यह भी तय किया है कि वे सांसद के तौर पर मिलने वाले सरकारी भत्ते और सुविधाएं भी नहीं लेंगे।
जानें कितनी है इनकी संपत्ति
चुनावी हलफनामों के अनुसार, दोनों सांसदों की आर्थिक स्थिति काफी अलग है। कुरुक्षेत्र से सांसद नवीन जिंदल ने अपनी कुल संपत्ति लगभग 1,241 करोड़ रुपये बताई है, जबकि इनर मणिपुर के सांसद डॉ. बिमोल अकोइजाम अंगोमचा ने करीब 97 लाख रुपये की संपत्ति घोषित की है। नवीन जिंदल 18वीं लोकसभा के सबसे अमीर सांसदों में भी गिने जाते हैं, लेकिन वे सबसे अमीर नहीं हैं। यह रिकॉर्ड गुंटूर से तेलुगु देशम पार्टी के सांसद चंद्रशेखर पेम्मासानी के नाम है, जिन्होंने अपनी संपत्ति 5,705 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई है। उनके बाद बीजेपी सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी का नाम आता है, जिनकी घोषित संपत्ति 4,568 करोड़ रुपये से अधिक है।
बता दें कि , लोकसभा के कुल 543 सदस्यों में से 481 मौजूदा सांसद अपनी सैलरी ले रहे हैं। हालांकि RTI के जवाब में बाकी सांसदों की स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं, लेकिन फिलहाल इनमें से दो सीटें खाली हैं।