'नेटफ्लिक्स से लेकर RCB के मैच तक...', बेंगलुरु सेंट्रल जेल में मोबाइल इस्तेमाल करते पाए गए कैदी, 3 वार्डन सस्पेंड

वायरल वीडियो में कैदी नेटफ्लिक्स जैसे पेड एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते और मोबाइल फोन चलाते नजर आ रहे हैं। वीडियो के एक हिस्से में कैदियों का एक समूह इंडियन प्रीमियर लीग मैच को लेकर बातचीत करता सुनाई देता है। इसमें एक व्यक्ति कहते हुए सुनाई देता है, “इस बार बेंगलुरु जीतेगा, इस बार कप हमारा है

अपडेटेड Mar 29, 2026 पर 6:41 PM
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बेंगलुरु सेंट्रल जेल एक बार फिर सुर्खियों में है।

बेंगलुरु सेंट्रल जेल एक बार फिर सुर्खियों में है। जेल का एक नया वीडियो सामने आया है, जिसमें जेल के कैदी मोबाइल फोन इस्तेमाल करते और टीवी देखते नजर आए। परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल, बेंगलुरु में तीन वार्डन को सस्पेंड कर दिया गया है। यह कार्रवाई उस वीडियो के सामने आने के बाद की गई, जो सोशल मीडिया पर बार-बार शेयर हो रहा था। पुलिस के अनुसार, जिन अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है, उनके नाम शिवानंद करालबत्ती, निरंजन ए. कामत और हनुमंतप्पा हडपद हैं। वायरल वीडियो में देखा गया कि कैदी जेल के अंदर VVIP ट्रीटमेंट का मजा उठा रहे हैं। इससे जेल प्रशासन पर सवाल खड़े हो गए हैं।

जेल में नेटफ्लिक्स से लेकर IPL तक...देख रहे कैदी 

वायरल वीडियो में कैदी नेटफ्लिक्स जैसे पेड एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते और मोबाइल फोन चलाते नजर आ रहे हैं। वीडियो के एक हिस्से में कैदियों का एक समूह इंडियन प्रीमियर लीग मैच को लेकर बातचीत करता सुनाई देता है। इसमें एक व्यक्ति कहते हुए सुनाई देता है, “इस बार बेंगलुरु जीतेगा, इस बार कप हमारा है।” सूत्रों के मुताबिक, यह वीडियो हाल ही में बनाया गया है और तीन दिन से ज्यादा पुराना नहीं है। बताया जा रहा है कि इसे उन कैदियों ने रिकॉर्ड किया, जो एक हत्या के मामले में ढाई साल से ज्यादा समय से जेल में बंद हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह वीडियो चोरी-छिपे जेल के बाहर उनके जानने वालों तक पहुंचाया गया, जिसके बाद यह बहुत तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।


जेल में यहां फोन छिपाते थे कैदी

पुलिस के अनुसार, कैदी अपने मोबाइल फोन टॉयलेट ब्लॉक के पास जमीन के नीचे बनी पाइपलाइन में छिपाकर रखते थे। इससे वे रोज होने वाली तलाशी से बच जाते थे। अधिकारियों का कहना है कि यह कोई एक-दो बार की गलती नहीं, बल्कि चीजों को छिपाने का एक संगठित तरीका हो सकता है। इस मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। इसमें निचले स्तर के कर्मचारियों की संभावित मिलीभगत को भी शामिल किया गया है। शक जताया जा रहा है कि जेल के अंदर किसी व्यक्ति की मदद के बिना इतनी बड़ी चूक संभव नहीं थी। साथ ही यह भी जांच हो रही है कि कहीं यह वीडियो जानबूझकर तो नहीं बनाया गया, ताकि आलोक कुमार की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।

मोबाइल फोन जब्त किए जाने के बाद इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। अब यह पता लगाने के लिए विस्तार से जांच चल रही है कि यह लापरवाही कितनी बड़ी थी, इसके लिए कौन जिम्मेदार है और क्या इसमें अंदर के लोगों की कोई भूमिका थी।

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