TMC Crisis Update: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका लगा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद प्रकाश चिक बराइक ने गुरुवार (11 जून) को राज्यसभा की सदस्यता और पार्टी से इस्तीफा दे दिया। सुखेंदु शेखर राय और सुष्मिता देव के बाद प्रकाश चिक बारिक इस सप्ताह टीएमसी का साथ छोड़ने वाले तीसरे राज्यसभा सांसद हैं। बराइक ने गुरवार सुबह 11 बजे उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को अपना इस्तीफा सौंपा। उनके इस्तीफे के बाद, उच्च सदन में TMC की संख्या घटकर 10 रह गई है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस बगावत का सामना कर रही है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कई सांसदों ने एक अलग समूह बनाने और आम आदमी पार्टी (AAP) के सात सांसदों की तरह सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ जाने का फैसला किया है। आम आदमी पार्टी के सांसदों ने पार्टी से इस्तीफा देकर BJP का दामन थाम लिया था। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायकों में से अधिकतर सदस्यों ने पहले ही रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में एक अलग समूह बना लिया जिन्हें राज्य विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना गया है।
बारिक ने क्यों दिया इस्तीफा?
अपने इस्तीफे में पश्चिम बंगाल से सांसद बराइक ने लिखा, "मैं राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देता हूं, जिसे कृपया तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया जाए।" उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान सहयोग के लिए सभापति, उपसभापति और राज्यसभा सचिवालय के अधिकारियों का भी आभार व्यक्त किया। पश्चिम बंगाल के एक आदिवासी नेता बराइक उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण पर संसद की स्थायी समिति तथा जनजातीय मामलों की परामर्शदात्री समिति के सदस्य थे।
उनका इस्तीफा ऐसे समय आया है जब तृणमूल कांग्रेस से लगातार इस्तीफे हो रहे हैं। इस्तीफे के बाद न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में TMC नेता प्रकाश चिक ने कहा, "पश्चिम बंगाल के लोगों की राय को मानते हुए मैंने भी आज अपना इस्तीफा दे दिया है।" जब उनसे पूछा गया कि क्या वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होंगे, तो उन्होंने कहा, "यह तो समय ही बताएगा।"
दो और सांसदों ने भी इस्तीफा
इससे पहले सोमवार को राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर राय ने उच्च सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने तृणमूल नेतृत्व से मतभेदों का हवाला देते हुए पार्टी छोड़ने की घोषणा की थी।इसके बाद बुधवार को राज्यसभा सदस्य सुष्मिता देव ने भी संसद और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया। बाद में देव ने नई दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंता विश्व शर्मा से मुलाकात की, जिससे उनके भविष्य की राजनीतिक योजनाओं को लेकर अटकलें तेज हो गईं।
एक सप्ताह में तीन सांसदों का इस्तीफा
बारिक के इस्तीफे के साथ ही तृणमूल कांग्रेस इस सप्ताह अपने तीन राज्यसभा सदस्यों को खो चुकी है, जिससे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार और पार्टी के भीतर बगावत के बाद तृणमूल गंभीर संकट का सामना कर रही है। इससे उसकी संगठनात्मक और विधायी ताकत काफी कमजोर हुई है।
पिछले सप्ताह पार्टी के दो-तिहाई से अधिक (80 में से 58) विधायक आधिकारिक तृणमूल कांग्रेस विधायक दल से अलग हो गए और निष्कासित विधायक रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल विधानसभा में मुख्य विपक्षी समूह के रूप में मान्यता प्राप्त कर ली। बागी गुट का दावा है कि तब से उसकी संख्या और बढ़ी है।
यह संकट बाद में संसद तक भी पहुंच गया। बागी सांसदों के समूह का नेतृत्व कर रहीं काकोली घोष दस्तीकार ने दावा किया कि उन्हें लोकसभा के 20 से अधिक सांसदों का समर्थन प्राप्त है। बुधवार को जादवपुर से सांसद सायोनी घोष और कोलकाता दक्षिण से सांसद माला रॉय भी असंतुष्ट सांसदों के खेमे में शामिल हो गईं।