TMC leader Humayun Kabir: पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल मची हुई है। TMC के पूर्व नेता हुमायूं कबीर को पार्टी ने गुरुवार (4 दिसंबर) को निलंबित कर दिया, लेकिन इसके बावजूद वह अपने बयान और कार्यक्रम पर अड़े हुए हैं। उन्होंने घोषणा की है कि 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर एक मस्जिद का प्रतीकात्मक शिलान्यास किया जाएगा।
निलंबन के बाद हुमायूं कबीर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह किसी भी तरह के दबाव में नहीं हैं। उन्होंने साफ कहा, 'कार्यक्रम जैसे तय हुआ है वैसे ही होगा। मैं खुद 2,000 स्वयंसेवकों के साथ मौजूद रहूंगा। अगर प्रशासन ने रोका तो मैं गिरफ्तार हो जाऊंगा, लेकिन रुकूंगा नहीं।'
उन्होंने आगे यह भी दावा किया कि उन्हें अपनी जान का खतरा है। कबीर ने कहा, "कोई मुझे मरवा सकता है, लेकिन मैं डरने वाला नहीं हूं। अगर मुझे मार भी दिया जाए, मैं तैयार हूं।"
इसके साथ ही, हुमायूं ने राज्य सरकार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने सवाल किया कि सरकारी पैसों से मंदिरों का निर्माण क्यों किया जा रहा है? दुर्गा पूजा के दौरान दान क्यों दिए जा रहे है? उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, "यह कैसा हिन्दुस्तान है? मैं आने वाले कुछ दिनों में ममता बनर्जी को बताऊंगा कि मुसलमानों को यहां कुछ भी करने का अधिकार है या नहीं। वे मुझे सिर्फ गिरफ्तार करने के अलावा कुछ नहीं कर सकती।"
वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बिना नाम लिए हुमायूं कबीर पर हमला बोला। बहरामपुर की जनसभा में उन्होंने कहा कि कुछ लोग राजनीतिक फायदे के लिए जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "कुछ लोग चुनाव से पहले भाजपा से पैसे लेकर मुर्शिदाबाद में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे लोगों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह देश के दुश्मन हैं।" इस बात पर हुमायूं कबीर ने भी पलटवार किया और कहा, 'अब मुझे इस RSS प्रभावित मुख्यमंत्री की बजाय भाजपा का सीधा मुख्यमंत्री चाहिए।"
बता दे कि हुमायूं कबीर ने यह दावा किया है कि 6 दिसंबर को NH-34 पूरी तरह मुस्लिम नियंत्रण में होगा और उसी दिन वह बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की आधारशिला रखेंगे। इसी विवादित बयान के बाद उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया। हालांकि, निलंबन के बाद कबीर ने यह घोषणा की कि वह 22 दिसंबर को अपनी पार्टी लॉन्च करेंगे।
यह मामला अब राजनीतिक से ज्यादा धार्मिक और संवेदनशील मुद्दा बनता दिख रहा है। प्रशासन भी हालात पर कड़ी नजर बनाए हुए है, क्योंकि 6 दिसंबर की तारीख बाबरी मस्जिद विवाद से जुड़ी होने के कारण पहले से ही प्रतीकात्मक रूप से संवेदनशील मानी जाती है।