West Bengal Assembly Elections: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, राज्य में सियासी सरगर्मी और 'फ्रीबीज पॉलिटिक्स' चरम पर पहुंच गई है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) की 'युबा साथी' योजना के जवाब में भारतीय जनता पार्टी एक ऐसा चुनावी कार्ड खेलने की तैयारी में है जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी अपने घोषणापत्र में बेरोजगार युवाओं के लिए भारी-भरकम राशि का वादा कर सकती है, जो ममता सरकार की तुलना में कई गुना अधिक है।
क्या है बीजेपी का मेगा प्लान?
बीजेपी की घोषणापत्र समिति में इस बात पर गंभीर चर्चा चल रही है कि क्या 18 से 35 वर्ष के बेरोजगार युवाओं को ₹25,000 प्रति माह देने का वादा किया जाए। बीजेपी इसे केवल 'बेरोजगारी भत्ता' नहीं कहना चाहती। पार्टी का प्लान है कि इस राशि को प्रोफेशनल ट्रेनिंग से जोड़ा जाए। यानी युवाओं को पहले मुफ्त कौशल प्रशिक्षण लेना होगा, ताकि वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें। इसके साथ ही बीजेपी हर साल 20 लाख नई नौकरियों और उत्तर बंगाल में एक नया IIT बनाने का वादा भी कर सकती है।
TMC की 'युबा साथी' योजना का असर
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में 'Banglar Yuba Sathi' योजना का ऐलान किया है, जिसने बीजेपी को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है। इस योजना के तहत बेरोजगार युवाओं को हर महीने ₹1,500 दिए जाएंगे। योजना के रजिस्ट्रेशन के पहले ही दिन पूरे बंगाल में 294 शिविरों में लगभग 2 लाख युवाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सरकार ने इसके लिए ₹5,000 करोड़ का बजट आवंटित किया है। इसी जनसैलाब को देखते हुए बीजेपी अब ममता सरकार से 16 गुना बड़ी राशि का दांव खेलने पर विचार कर रही है।
वित्तीय संकट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जारी की चेतावनी
एक तरफ जहां बंगाल में मुफ्त सुविधाओं की रेस लगी है, वहीं सुप्रीम कोर्ट ने इस कल्चर पर चिंता जताई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्यों को आगाह करते हुए कहा कि देश के अधिकांश राज्य पहले से ही 'राजस्व घाटे' में हैं, फिर भी ऐसी मुफ्त सुविधाएं दी जा रही हैं। कोर्ट ने सवाल उठाया कि 'अगर सब कुछ मुफ्त मिलेगा, तो लोग काम क्यों करेंगे?' और इन योजनाओं का बोझ अंततः करदाताओं पर ही पड़ता है।
जनता की राय से बनेगा 'संकल्प पत्र'
बीजेपी इस बार अपने घोषणापत्र को 'पीपल्स चार्टर' के रूप में पेश करना चाहती है। इसके लिए पार्टी ने जमीनी स्तर पर सुझाव अभियान चलाया है। पार्टी का मानना है कि केवल नकद देना काफी नहीं है, बल्कि युवाओं को ट्रेनिंग देकर उन्हें रोजगार के काबिल बनाना असली समाधान है। 2026 की यह चुनावी जंग अब केवल विचारधारा की नहीं, बल्कि 'किसकी योजना ज्यादा आकर्षक है' इसकी हो गई है।