मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने को लेकर टीएमसी ने बड़ा कदम उठाया है। टीएमसी ने शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश करने जा रही है और इसके लिए उसने इस प्रस्ताव का नोटिस दोनों सदनों में जमा करा दिए हैं। जानकारी के मुताबिक, नोटिस में 190 सांसदों के दस्तखत हैं। लोकसभा सचिवालय को टीएमसी का नोटिस मिला है।
दोनों सदनों में दिया नोटिस
जानकारी के मुताबिक, टीएमसी के इस प्रस्ताव को विपक्षी दलों का समर्थन मिला है। लोकसभा में 128 और राज्यसभा में 63 विपक्षी सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग वाले इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया वही होती है, जो सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश को हटाने के लिए अपनाई जाती है। यानी उन्हें केवल तय प्रक्रिया और तय आधारों पर ही पद से हटाया जा सकता है। नियमों के अनुसार, ऐसा प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर होना जरूरी होता है।
विपक्षी पार्टियों ने किया समर्थन
कल्याण बनर्जी ने बताया कि इस महाभियोग प्रस्ताव पर कई विपक्षी दलों के सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। इनमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, DMK और नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के सांसद शामिल हैं। उन्होंने कहा कि महाभियोग प्रस्ताव लाने का फैसला ममता बनर्जी ने लिया था। बनर्जी के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस के साथ-साथ समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, शरद पवार की पार्टी और DMK के सांसदों ने भी इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। वहीं, सौगत रॉय ने कल समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए कहा कि उनकी पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव को 100 से ज्यादा सांसदों का समर्थन मिल रहा है और इसे जल्द ही संसद में जमा किया जा सकता है। उनके अनुसार, इस मुद्दे पर विपक्ष एकजुट नजर आएगा।
नोटिस में टीएमसी ने लगाए ये आरोप
क्यों निशाने पर हैं मुख्य चुनाव आयुक्त?
सौगत रॉय ने हाल ही में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के खारिज होने पर भी अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह लोकसभा के कामकाज और अध्यक्ष के खिलाफ अपनी शिकायत रखने का एक अच्छा मौका था, जो अब खत्म हो गया। यह महाभियोग प्रस्ताव ऐसे समय में लाया जा रहा है जब टीएमसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया है कि वे पश्चिम बंगाल में “स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)” प्रक्रिया के दौरान सत्ताधारी भाजपा के इशारे पर काम कर रहे थे। टीएमसी पहले इस मुद्दे को राजनीतिक मंचों और अदालतों में उठा चुकी है और चुनाव आयोग तथा SIR प्रक्रिया का विरोध भी कर चुकी है। अब पार्टी इस मामले को संसद में उठाने की तैयारी कर रही है।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावों में टीएमसी अपनी सत्ता बचाने की कोशिश करेगी, जबकि भाजपा, सत्ता में वापसी की राह तलाश रही है। भाजपा ने 2021 के चुनाव में 77 सीटें जीती थीं।