TMC में पड़ी फूट के बीच ममता बनर्जी का नया दांव, अचानक पहुंची हाईकोर्ट और दायर की ये याचिका

भवानीपुर सीट को लंबे समय से ममता बनर्जी का मजबूत राजनीतिक क्षेत्र माना जाता रहा है। यहां तृणमूल कांग्रेस का अच्छा जनाधार और मजबूत संगठन मौजूद है। हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर और नंदीग्राम, दोनों सीटों पर जीत हासिल की थी

अपडेटेड Jun 16, 2026 पर 3:45 PM
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हाईकोर्ट पहुंची है।

तृणमूल कांग्रेस में बगावत की खबरों के बीच पार्टी मुखिया और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हाईकोर्ट पहुंची हैं। बता दें कि, ममता बनर्जी ने भवानीपुर की हार को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है। ममता बनर्जी 16 जून को अचानक कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंची और भवानीपुर विधानसभा सीट के चुनाव परिणाम के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की। ममता बनर्जी ने उस चुनाव नतीजे को चुनौती दी है जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता सुवेंदु अधिकारी ने उन्हें 15,015 वोटों के अंतर से हराया था।

ममता बनर्जी का गढ़ रहा है भवानीपुर

भवानीपुर सीट को लंबे समय से ममता बनर्जी का मजबूत राजनीतिक क्षेत्र माना जाता रहा है। यहां तृणमूल कांग्रेस का अच्छा जनाधार और मजबूत संगठन मौजूद है। हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर और नंदीग्राम, दोनों सीटों पर जीत हासिल की थी।


नंदीग्राम चुनाव नतीजे को भी दी थी चुनौती

ममता बनर्जी इससे पहले भी वर्ष 2021 के नंदीग्राम विधानसभा चुनाव के नतीजे को अदालत में चुनौती दे चुकी हैं। दरअसल, कलकत्ता हाई कोर्ट में उनकी वह याचिका अभी भी लंबित है, जिसमें उन्होंने नंदीग्राम सीट के चुनाव परिणाम पर सवाल उठाए थे। उस चुनाव में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने जीत हासिल की थी। साल 2021 के विधानसभा चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को बेहद कम वोटों के अंतर से हराकर बड़ी राजनीतिक चर्चा बटोरी थी। इस जीत के बाद उन्हें एक बड़े नेता को हराने वाले नेता के रूप में देखा गया था। ममता बनर्जी ने उस समय हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि नंदीग्राम सीट के रिटर्निंग अधिकारी ने उन्हें बताया था कि वोटों की दोबारा गिनती (री-काउंटिंग) नहीं कराने के लिए उन पर दबाव बनाया गया था।

चुनावी झटके के बाद टीएमसी पर बढ़ा दबाव

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के सामने अब अपने संगठन और जनाधार को मजबूत बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। बताया जा रहा है कि टीएमसी के 20 सांसदों का एक समूह पार्टी छोड़कर राष्ट्रीय नागरिक पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हो गया है। इस समूह में ममता बनर्जी की करीबी सहयोगी सायनी घोष का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। एनसीपीआई, केंद्र की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सहयोगी पार्टी है।

यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब कुछ दिन पहले टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में एनडीए का समर्थन करने की इच्छा जताई थी। वहीं, इससे पहले टीएमसी के बागी विधायक रिताब्रत बनर्जी ने 58 विधायकों के समर्थन का दावा करते हुए राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने का दावा पेश किया था। इन घटनाओं ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है और टीएमसी के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

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