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ट्विशा शर्मा की फंदे की बेल्ट पर मिले स्किन टिश्यू, AIIMS फोरेंसिक रिपोर्ट ने खोले नए राज

Twisha Sharma Case: सीबीआई ने आरोप लगाया है कि ट्विशा शर्मा को दहेज के लिए लगातार परेशान किया जाता था और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। जांच एजेंसी का यह भी दावा है कि उनकी मौत से करीब एक हफ्ते पहले उनका जबरन गर्भपात (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी) कराया गया था

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 12, 2026 पर 6:59 PM
ट्विशा शर्मा की फंदे की बेल्ट पर मिले स्किन टिश्यू, AIIMS फोरेंसिक रिपोर्ट ने खोले नए राज
AIIMS के मेडिकल बोर्ड ने अपनी अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट सीबीआई को सौंप दी है।

एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा की मौत मामले में दिल्ली AIIMS के मेडिकल बोर्ड ने अपनी अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट सीबीआई को सौंप दी है। रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि कथित तौर पर फंदे के लिए इस्तेमाल की गई जिम्नास्टिक्स बेल्ट पर मिले स्किन टिश्यू ट्विशा की गर्दन के चोट के निशानों से मेल खाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जिमनास्टिक बेल्ट पर मिले बेहद छोटे स्किन टिश्यू, ट्विशा शर्मा की गर्दन पर मिले चोट के निशानों और गला घोंटने के निशानों (लिगेचर मार्क) से मेल खाते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई ने पूर्व न्यायाधीश गिरीबाला सिंह और उनके वकील बेटे समर्थ सिंह से हिरासत में पूछताछ करने की मांग तेज कर दी है। जांच एजेंसी ने उनकी जमानत का भी कड़ा विरोध किया है और दोनों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

सीबीआई ने आरोप लगाया है कि ट्विशा शर्मा को दहेज के लिए लगातार परेशान किया जाता था और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। जांच एजेंसी का यह भी दावा है कि उनकी मौत से करीब एक हफ्ते पहले उनका जबरन गर्भपात (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी) कराया गया था। इसके अलावा मामले से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक और दूसरे अहम सबूतों को जानबूझकर नष्ट करने और उनसे छेड़छाड़ करने का भी आरोप लगाया गया है।

गला घोंटने में इस्तेमाल हुई चीज की पहचान कैसे होती है?

फांसी या गला घोंटकर हुई मौत के मामलों में फोरेंसिक विशेषज्ञ और मेडिकल बोर्ड कई वैज्ञानिक तरीकों से जांच करते हैं। सबसे पहले वे गर्दन पर बने निशानों की चौड़ाई, गहराई और आकार को ध्यान से मापते हैं। इसके बाद इन निशानों का मिलान उस संदिग्ध वस्तु से किया जाता है, जिससे गला घोंटने की आशंका होती है, जैसे बेल्ट, रस्सी या कोई दूसरी चीज। जांच के दौरान विशेषज्ञ यह भी देखते हैं कि गर्दन पर किसी धातु की रिंग, बकल या कपड़े और फाइबर की बनावट जैसे खास निशान मौजूद हैं या नहीं। इन सभी सबूतों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि गला घोंटने के लिए किस चीज का इस्तेमाल किया गया था।

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