UCC Bill West Bengal: पश्चिम बंगाल में सोमवार को UCC बिल होगा पेश, जानें इसमें क्या है खास?

UCC Bill West Bengal: पश्चिम बंगाल अब समान नागरिक संहिता (UCC) की दिशा में कदम बढ़ाने वाला अगला भाजपा शासित राज्य बनने जा रहा है। इस सोमवार को राज्य विधानसभा में UCC बिल पेश किया जाएगा। गौरतलब है कि भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में UCC लागू करने का वादा किया था।

अपडेटेड Jun 27, 2026 पर 2:07 PM
पश्चिम बंगला में सोमवार को यूसीसी बिल होगा पेश

UCC Bill West Bengal: पश्चिम बंगाल अब समान नागरिक संहिता (UCC) की दिशा में कदम बढ़ाने वाला अगला भाजपा शासित राज्य बनने जा रहा है। इस सोमवार को राज्य विधानसभा में UCC बिल पेश किया जाएगा। गौरतलब है कि भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में UCC लागू करने का वादा किया था और इसे नई सरकार की प्राथमिक प्राथमिकताओं में शामिल किया था।

बता दें कि पश्चिम बंगाल उन BJP-शासित राज्यों की बढ़ती सूची में शामिल हो गया है जिन्होंने UCC की दिशा में कदम उठाए हैं। जबकि उत्तराखंड ने इसे सबसे पहले लागू किया था, जिसके बाद असम, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात ने भी ऐसा किया।

यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) क्या है?


UCC का मकसद धर्म-आधारित पर्सनल कानूनों की जगह एक ऐसा एकसमान कानूनी ढांचा लाना है जो सभी नागरिकों के लिए - चाहे उनका धर्म कोई भी हो - शादी, तलाक, विरासत, संपत्ति के बंटवारे और गोद लेने जैसे सिविल मामलों को नियंत्रित करे।

इसके समर्थकों का तर्क है कि यह कानून के सामने समानता सुनिश्चित करता है और धर्म-आधारित पर्सनल कानूनों से होने वाले भेदभाव को खत्म करता है।

पश्चिम बंगाल के UCC में क्या-क्या शामिल होगा?

भाजपा द्वारा प्रस्तावित ढांचे के आधार पर, इस विधेयक में निम्नलिखित मुद्दों को संबोधित किए जाने की उम्मीद है:

क्षेत्र क्या बदलाव होंगे
विवाह (Marriage) सभी समुदायों के लिए विवाह की समान न्यूनतम कानूनी उम्र; सभी शादियों का अनिवार्य पंजीकरण
लैंगिक समानता (Gender Equality) बहुविवाह पर प्रतिबंध; महिलाओं को संपत्ति और उत्तराधिकार में समान अधिकार; धर्म की परवाह किए बिना समान कानूनी सुरक्षा
लिव-इन संबंध (Live-in Relationships) लिव-इन संबंधों का शुरुआत और अंत दोनों समय अनिवार्य पंजीकरण, निर्धारित प्राधिकरण के पास
तलाक (Divorce) तलाक की प्रक्रिया के लिए एक समान कानूनी ढांचा, जो धर्म-आधारित या पारंपरिक तरीकों की जगह लेगा; दोनों पक्षों को समान कानूनी अधिकार और राहत

पश्चिम बंगाल में यह बात खास तौर पर क्यों अहम है?

राजनीतिक नेताओं ने बताया है कि अल्पसंख्यक बहुल जिलों - मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तरी दिनाजपुर के कुछ हिस्सों में इसका बड़ा राजनीतिक और सामाजिक असर हो सकता है। पार्टी सूत्रों का दावा है कि अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं का एक वर्ग UCC प्रस्ताव का स्वागत कर रहा है। उनका कहना है कि इससे शादी, तलाक और विरासत से जुड़े उनके कानूनी अधिकार मजबूत हो सकते हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

भाजपा के लिए UCC एक लंबे समय से चला आ रहा वैचारिक और नीतिगत संकल्प है। अगर यह विधेयक पारित हो जाता है, तो इसे पश्चिम बंगाल की पहली भाजपा सरकार के सबसे महत्वपूर्ण विधायी सुधारों में से एक माना जाएगा।

इस पर राजनीतिक बहस कैसी हो सकती है?

समर्थक UCC को कानूनी एकरूपता और लैंगिक समानता की दिशा में एक कदम के तौर पर देखते हैं। आलोचकों के धर्म-आधारित पर्सनल लॉ और सांस्कृतिक रीति-रिवाजों पर इसके संभावित असर को लेकर चिंता जताने की उम्मीद है। यह बहस पश्चिम बंगाल जैसे विविध जनसंख्या और राजनीतिक संरचना वाले राज्य में काफी तीखी हो सकती है।

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