मराठी एकता के नाम पर राज और उद्धव ठाकरे एक साथ, फडणवीस सरकार पर तीखा हमला, कहा-अब हमेशा साथ-साथ

Raj Thackeray: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकर ने महाराष्ट्र सरकार की भाषा नीति की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की भाषा नीति का मकसद महाराष्ट्र की पहचान को खत्म करना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अब तीन भाषा के फॉर्मूले को रद्द कर दिया है। यह मुंबई को मराराष्ट्र से अलग करने के प्लान की दिशा में पहला कदम था

अपडेटेड Jul 05, 2025 पर 2:41 PM
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5 जुलाई को मुंबई के वर्ली डोम में दोनों भाइयों ने बड़ी रैली को संबोधित किया।

महाराष्ट्र की राजनीति बदलने जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना (उद्धव) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे एक साथ आ गए हैं। 20 साल बाद दोनों भाइयों का एक साथ आना महाराष्ट्र की राजनीति में बदलाव का संकेत है। 5 जुलाई को मुंबई के वर्ली डोम में दोनों भाइयों ने बड़ी रैली को संबोधित किया। राज ठाकरे ने अपने पुराने अंदाज में रैली को संबोधित किया। मराठी एकता के नाम पर उन्होंने लोगों के मन को छूने की कोशिश की।

महाराष्ट्र सरकार पर तीखा हमला

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकर ने महाराष्ट्र सरकार की भाषा नीति की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की भाषा नीति का मकसद महाराष्ट्र की पहचान को खत्म करना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अब तीन भाषा के फॉर्मूले को रद्द कर दिया है। यह मुंबई को मराराष्ट्र से अलग करने के प्लान की दिशा में पहला कदम था। उन्होंने कहा, "अगर हम इसका विरोध नहीं करते तो सरकार का अगला कदम मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करना हो सकता था।"


तीन भाषा पॉलिसी का रद्द होना बड़ी जीत

इस रैली को विजय रैली नाम दिया गया था। ठाकरे भाइयों का मानना है कि राज्य सरकार ने अपनी तीन भाषा की पॉलिसी वापस ले ली है जो उनकी जीत है। उनके विरोध के बाद सरकार को अपनी पॉलिसी वापस लेने पर मजबूर होना पड़ा। राज ठाकरे ने कहा कि अगर मराठी लोगों ने सरकार की इस पॉलिसी का विरोध नहीं किया होता तो सरकार यह पॉलिसी वापस लेने को मजबूर नहीं होती। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह हिन्दी के विरोध में नहीं है।

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किसी भाषा के खिलाफ नहीं 

राज ठाकरे ने कहा, "कई भाषा खराब नहीं होती। लेकिन, कोई भाषा लोगों पर थोपी नहीं जानी चाहिए। मराठा साम्राज्य के दौरान मराठा शासन कई प्रांतों तक फैला था। लेकिन, कभी मराठी भाषा को थोपने को कोशिश नहीं की गई।" उन्होंने अग्रेजी भाषा का विरोध करने वाले लोगों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि देवेंद्र फडणवीस ने खुद अंग्रेजी स्कूल में पढ़ाई की। फिर राज्य के मुख्यमंत्री बन गए। उन्होंने कहा, "मेरे पिता श्रीकांत ठाकरे और चाचा बालासाहब ठाकरे ने भी अंग्रेजी स्कूल में पढ़ाई की थी।"

बालासाहब के समर्थन के बिना बीजेपी पहचान नहीं बना पाती

उद्धव ठाकरे ने भी रैली को संबोधित किया। लेकिन, उनका भाषण ठोस और संक्षिप्त था। उन्होंने कहा, "अब हम हमेशा साथ-साथ रहेंगे। हर कोई हमारे भाषण का इंतजार कर रहा था। लेकिन, इस वक्त मेरा और राज का साथ सबसे महत्वपूर्ण है। राज ने अपने भाषण में कई बातें बताई हैं, जिससे मेरे बोलने के लिए कुछ ज्यादा नहीं बचा है।" हालांकि, उन्होंने BJP पर अपनी पार्टी का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बीजेपी पहले ही हमारा काफी इस्तेमाल कर चुकी है। अगर बालासाहब ठाकरे का समर्थन नहीं मिला होता तो आज महाराष्ट्र में बीजेपी को कौन जानता।

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