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UGC Equity Rules: भेदभाव को लेकर UGC की नई गाइडलाइंस पर क्यों मचा है बवाल, क्या कहतें हैं नए नियम?

UGC New Rules: इन नए नियमों का उद्देश्य शिकायत से पहले ही भेदभाव को रोकना है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि इससे कैंपस में निगरानी और डर का माहौल भी बन सकता है। UGC का कहना है कि उच्च शिक्षा में किसी के साथ भी धर्म, जाति, लिंग, जन्म स्थान या दिव्यांगता के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए

Shubham Sharmaअपडेटेड Jan 27, 2026 पर 1:58 PM
UGC Equity Rules: भेदभाव को लेकर UGC की नई गाइडलाइंस पर क्यों मचा है बवाल, क्या कहतें हैं नए नियम?
UGC Equity Guidelines: इन नियमों का मकसद है कि किसी भी छात्र, शिक्षक या कर्मचारी के साथ उसकी पहचान के आधार पर भेदभाव न हो

यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन (UGC) ने साल 2026 के लिए “उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम” लागू किए हैं। ये नियम देश के सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों पर लागू होंगे। UGC, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के तहत काम करने वाली संस्था है, जो उच्च शिक्षा संस्थानों को नियंत्रित करती है।

इन नियमों का मकसद है कि किसी भी छात्र, शिक्षक या कर्मचारी के साथ उसकी पहचान के आधार पर भेदभाव न हो। लेकिन ये नियम सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कैंपस के रोजमर्रा के कामकाज तक गहराई से असर डालते हैं।

इन नियमों का उद्देश्य क्या है?

इन नए नियमों का उद्देश्य शिकायत से पहले ही भेदभाव को रोकना है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि इससे कैंपस में निगरानी और डर का माहौल भी बन सकता है।

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