देशभर में जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स और सवर्ण जाति के लोगों का यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर विरोध तेज हो गया है। UGC द्वारा उच्च शिक्षा में समानता को लेकर बनाए गए इस नए निमय को लेकर काफी विरोध हो रहा है। मंगलवार को दिल्ली में UGC के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन भी किए गए। मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया और इसे भेदभाव बढ़ाने वाला बताया गया। वहीं बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच शिक्षा मंत्रालय जल्द ही इन नियमों पर एक साफ और डिटेल स्पष्टीकरण जारी कर सकता है।
यूजीसी के इस नियम में क्या है?
यूजीसी ने 13 जनवरी को एक इक्विटी रूल लागू किया है। इस नियम के तहत शैक्षणिक संस्थानों में एससी, एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के साथ होने वाले जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए परिसर में 24×7 हेल्पलाइन, समान अवसर केंद्र, इक्विटी स्क्वाड और इक्विटी समिति का गठन होगा। इनका मकसद कॉलेज और विश्वविद्यालयों में जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकना है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, शिक्षा मंत्रालय जल्द ही इन नियमों पर एक साफ और विस्तृत स्पष्टीकरण जारी कर सकता है।
सरकार उठाने जा रही ये कदम
सरकार का कहना है कि नियमों को लेकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है, जिसे दूर करना जरूरी है। साथ ही यह भरोसा भी दिया जाएगा कि इन नियमों का गलत इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा और भ्रम फैलाने की कोशिशों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। बजट सत्र से पहले यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी गरम हो गया है। विपक्ष इसे संसद में जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच गया है, जहां इन नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर जल्द सुनवाई होने की संभावना है।
UGC के मुताबिक, पिछले पांच सालों में SC, ST और OBC छात्रों से जुड़ी भेदभाव की शिकायतों में तेज़ बढ़ोतरी हुई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साल 2019-20 में ऐसी 173 शिकायतें दर्ज हुई थीं, जो 2023-24 में बढ़कर 378 हो गईं। यानी शिकायतों में करीब 118 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। इससे साफ होता है कि शिकायतों को सही तरीके से सुनने और सुलझाने के लिए एक मजबूत सिस्टम की जरूरत है। इन नए नियमों के तहत, हर कॉलेज और विश्वविद्यालय को एक इक्विटी कमेटी बनानी होगी। इस कमेटी में SC, ST और OBC वर्ग के सदस्य, महिलाएं और दिव्यांग लोग शामिल होंगे। यह कमेटी तय समय के अंदर छात्रों की शिकायतों का समाधान करेगी और कैंपस में एक सुरक्षित और समान माहौल बनाने का काम करेगी।
सामान्य वर्ग के कुछ छात्रों ने UGC के इन नए नियमों का विरोध किया है। उनका कहना है कि ये नियम एकतरफा हैं और इनका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि नियम केवल आरक्षित वर्गों के खिलाफ होने वाले भेदभाव पर ध्यान देते हैं, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों की शिकायतों को सही तरीके से नहीं सुना जाता। इससे झूठे मामलों का डर भी पैदा होता है। इन नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई है।