Unnao Rape Case: भारतीय जनता पार्टी (BJP) से निष्कासित नेता कुलदीप सिंह सेंगर को उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कुलदीप सेंगर की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (9 फरवरी) को सुनवाई से इनकार कर दिया। उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की मौत के मामले में सेंगर ने जमानत की मांग की थी। इस मामले में सेंगर को निचली अदालत से 10 साल की सजा मिली हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत से मिली सजा के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में पेंडिंग अपील पर तीन महीने में सुनवाई पूरी करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट से अनुरोध किया कि वह उत्तर प्रदेश के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की अपील पर जल्द सुनवाई करे। इसमें उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत से जुड़े मामले में उनकी सजा और 10 साल की कैद को चुनौती दी गई है।
कोर्ट ने कहा कि अपील पर तीन महीने के अंदर फैसला किया जाए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि पीड़िता द्वारा सज़ा बढ़ाने की मांग वाली अपील पर भी सेंगर की अपील के साथ ही सुनवाई की जाए। सह-आरोपियों की अपील पर भी इन मामलों के साथ ही सुनवाई होनी है।
हाईकोर्ट में एक याचिका पीड़िता की ओर से भी दायर है। इसमें सजा बढाने की मांग की गई है। कुलदीप सिंह सेंगर ने उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने 19 जनवरी को मुकदमे में देरी के आधार पर सेंगर की 10 साल की जेल की सजा को निलंबित करने से इनकार करते हुए कहा था कि यह आंशिक रूप से इस मामले में उसके द्वारा दायर किए गए कई आवेदनों के कारण हुई थी।
इस मामले में सुनवाई अदालत ने 13 मार्च 2020 को सेंगर को 10 साल के कठोर कारावास और 10 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। निचली अदालत ने कहा था कि परिवार के इकलौते कमाने वाले की हत्या के लिए किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जा सकती।
पिता के मामले में आरोपी को हत्या का दोषी नहीं ठहराते हुए निचली अदालत ने उसे गैर इरादतन हत्या के अपराध के लिए अधिकतम सजा सुनाई। दुष्कर्म के मुख्य मामले में दिसंबर 2019 के फैसले के खिलाफ सेंगर की अपील तथा पिता का मामला भी हाई कोर्ट में लंबित है। दुष्कर्म के मामले में उसे दोषी ठहराया गया था।
सेंगर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। बलात्कार मामले में उसकी दोषसिद्धि और सजा को चुनौती देने वाली अपील के लंबित रहने तक दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 दिसंबर, 2025 को सजा निलंबित कर दी थी। इस पर विवाद के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने 29 दिसंबर, 2025 को निलंबन पर रोक लगा दी।