अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे. पापारो और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोमवार को इंडियम आर्मी के कमांड ऑफिस का दौरा किया। लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने अमेरिकी अधिकारियों का स्वागत किया। इसे भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
बेहद अहम माना जा रहा ये दौरा
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर और यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड (INDOPACOM) के कमांडर सैमुअल जे. पापारो ने वेस्टर्न कमांड के जीओसी-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार के साथ विस्तार से बातचीत की। बैठक में भारत के पश्चिमी सीमा क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर चर्चा हुई। इसमें पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर से जुड़े रणनीतिक और सुरक्षा मुद्दों पर खास ध्यान दिया गया। बातचीत का मुख्य मकसद दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और बेहतर बनाना था।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ में निभाई थी खास भूमिका
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को वेस्टर्न कमांड की ऑपरेशनल तैयारी, उसके इतिहास और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संचालन के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्हें यह भी बताया गया कि देश की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में भारतीय सेना की क्या बड़ी भूमिका रही है। भारत में अमेरिका के राजदूत Sergio Gor ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि भारत और अमेरिका के साझा प्रयास इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए बेहद जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करने के लिए लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार का धन्यवाद भी किया।
बता दें कि, हरियाणा के पंचकूला ज़िले के चंडीमंदिर में स्थित भारतीय सेना की वेस्टर्न कमांड का मुख्यालय देश की पश्चिमी सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालता है। खासकर पाकिस्तान से लगी सीमा की निगरानी और सुरक्षा इसी कमांड के तहत आती है। किसी अमेरिकी राजदूत का ऐसे अहम सैन्य मुख्यालय का दौरा करना बहुत कम देखने को मिलता है, इसलिए इस यात्रा को खास माना जा रहा है। दौरे के दौरान अधिकारियों को पश्चिमी मोर्चे पर मौजूदा सुरक्षा हालात की जानकारी दी गई। इसमें सीमा पार से घुसपैठ, आतंकी गतिविधियों का खतरा और निगरानी व तस्करी के लिए ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल जैसे मुद्दे शामिल थे।
बैठक में इन नए और बदलते खतरों से निपटने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने (इंटेलिजेंस शेयरिंग) और आधुनिक युद्ध तकनीक के इस्तेमाल पर भी चर्चा की गई। दोनों देशों ने मिलकर सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब भारत और अमेरिका 10 साल के इंडिया-US डिफेंस फ्रेमवर्क समझौते के तहत मिलकर काम कर रहे हैं। यह समझौता सिर्फ हथियार खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संयुक्त तकनीक विकास, साथ मिलकर उत्पादन (को-प्रोडक्शन) और सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने जैसे पहलू भी शामिल हैं।