US-Iran War: ईरान के दूसरे युद्धपोत को बचाने के लिए आगे आया भारत, तकनीकी दिक्कत के बाद डॉकिंग की दी अनुमति

US-Iran War: सरकारी सूत्रों के अनुसार श्रीलंका के दक्षिण में हुई IRIS से जुड़ी घटना से कुछ दिन पहले ईरान ने भारत से संपर्क किया था। ईरान ने अपने जहाज IRIS लवन को लेने के लिए भारत से मदद मांगी थी। यह जहाज उस समय इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू के लिए भी उसी इलाके में मौजूद था। सूत्रों के मुताबिक, यह अनुरोध 28 फरवरी 2026 को भारत को मिला था। जानकारी के अनुसार जहाज में तकनीकी खराबी आ गई थी, इसलिए उसे कोच्चि में डॉक कराने की जरूरत थी

अपडेटेड Mar 06, 2026 पर 10:24 PM
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ईरान के साथ चल रहे युद्ध के बीच अमेरिका ने बुधवार को ईरान के एक युद्धपोत को श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास डुबो दिया। ( प्रतिकात्मक तस्वीर)

ईरान के साथ चल रहे युद्ध के बीच अमेरिका ने बुधवार को ईरान के एक युद्धपोत को श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास डुबो दिया। यह ईरानी युद्धपोत फ्रिगेट IRIS डेना भारतीय नौसेना की तरफ से आयोजित सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद विशाखापत्तनम से ईरान लौट रहा था।  दूसरे विश्वयुद्ध के बाद पहली बार था जब अमेरिकी पनडुब्बी ने किसी युद्धपोत को टॉरपीडो से डुबो दिया था। वहीं इस घटना के बाद अब भारत ईरान दूसरे युद्धपोत IRIS LAVAN को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। भारत ने लावन ( IRIS LAVAN) को अपने पोर्ट में ठहरने की अनुमति दी है।

सरकार ने दी ये बड़ी जानकारी 

सरकारी सूत्रों के अनुसार श्रीलंका के दक्षिण में हुई IRIS से जुड़ी घटना से कुछ दिन पहले ईरान ने भारत से संपर्क किया था। ईरान ने अपने जहाज IRIS लवन को लेने के लिए भारत से मदद मांगी थी। यह जहाज उस समय इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू के लिए भी उसी इलाके में मौजूद था। सूत्रों के मुताबिक, यह अनुरोध 28 फरवरी 2026 को भारत को मिला था। जानकारी के अनुसार जहाज में तकनीकी खराबी आ गई थी, इसलिए उसे कोच्चि में डॉक कराने की जरूरत थी। इसके बाद 1 मार्च को जहाज़ को डॉक करने की अनुमति दे दी गई। अनुमति मिलने के बाद IRIS लवन 4 मार्च को कोच्चि पहुंचकर डॉक हो गया। इस जहाज पर कुल 183 क्रू मेंबर हैं और फिलहाल सभी कोच्चि की नेवल फैसिलिटी में मौजूद हैं। सरकारी सोर्स का कहना है कि उस समय इलाके में दूसरे शिप भी थे।


IRIS Dena को अमेरिका ने किया तबाह

बता दें कि, बुधवार को श्रीलंकाई नौसेना ने ईरानी नौसेना के जहाज IRIS Dena से करीब 30 नाविकों को सुरक्षित बचा लिया। जानकारी के अनुसार, ईरानी वॉरशिप IRIS Dena श्रीलंका के पास समुद्र में डूब गया था। इसके बाद भारतीय नौसेना भी सर्च और रेस्क्यू अभियान में शामिल हो गई। भारतीय नौसेना ने बताया कि श्रीलंकाई नौसेना से मिली जानकारी के मुताबिक 4 मार्च की सुबह कोलंबो स्थित मैरीटाइम रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर (MRCC) को IRIS Dena से डिस्ट्रेस सिग्नल मिला था। उस समय यह जहाज़ श्रीलंका के सर्च एंड रेस्क्यू क्षेत्र में मौजूद था, जिसके बाद तुरंत बचाव अभियान शुरू किया गया।

अलर्ट मिलने के बाद भारतीय नौसेना ने तुरंत बचाव अभियान शुरू कर दिया। नौसेना ने एक बयान में बताया कि 4 मार्च 2026 की सुबह कोलंबो स्थित MRCC (मैरीटाइम रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर) को ईरानी जहाज IRIS Dena से एक इमरजेंसी मैसेज मिला था। उस समय यह जहाज श्रीलंका के सर्च एंड रेस्क्यू (SAR) क्षेत्र में गाले से लगभग 20 समुद्री मील पश्चिम में मौजूद था। जानकारी मिलते ही भारतीय नौसेना ने तुरंत अपनी सर्च और रेस्क्यू कार्रवाई शुरू कर दी।

नौसेना के अनुसार, 4 मार्च को सुबह करीब 10 बजे एक लंबी दूरी के समुद्री पेट्रोल विमान को इलाके में भेजा गया, ताकि श्रीलंका की अगुवाई में चल रहे सर्च अभियान में मदद मिल सके। इसके अलावा, हवा से गिराए जा सकने वाले लाइफ राफ्ट से लैस एक और विमान को भी तैयार रखा गया था, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत भेजा जा सके। साथ ही INS तरंगिनी, जो पहले से ही पास के इलाके में मौजूद थी, उसे भी तुरंत सर्च एरिया की ओर भेजा गया और वह 4 मार्च की शाम करीब 4 बजे तक उस क्षेत्र में पहुंच गई।

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