स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। प्रयागराज के पॉक्सो कोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। पॉक्सो कोर्ट ने शनिवार को पुलिस को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों में FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। ADJ (POCSO एक्ट) विनोद कुमार चौरसिया ने निर्देश दिया कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की जाए और पूरे मामले की विस्तार से जांच की जाए। अदालत के आदेश के बाद झूंसी थाने में केस दर्ज किया जाएगा।
शाकुंभरी पीठाधीश्वर ने दी थी अर्जी
समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने BNS की धारा 173(4) के तहत सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए अदालत में अर्जी दी थी। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पहले से विवादों में रहे हैं। पिछले महीने उन्होंने दावा किया था कि प्रयागराज में माघ मेले के दौरान उन्हें संगम में डुबकी लगाने से रोका गया था। इस मुद्दे पर उन्होंने 11 दिनों तक धरना भी दिया था। अब अदालत के आदेश के बाद पुलिस मामले की जांच आगे बढ़ाएगी।
माघ मेले में भी बढ़ा था विवाद
वाराणसी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, “मैं 11 दिनों तक वहां बैठा रहा, लेकिन किसी अधिकारी ने मुझे संगम में डुबकी लगाने के लिए नहीं बुलाया। अब बहुत देर हो चुकी है। मैं अगले साल माघ मेले में जाऊंगा और सम्मान के साथ स्नान करूंगा।” उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ से राज्य में बीफ निर्यात बंद करने और गाय को ‘राज्य माता’ घोषित करने की मांग भी की। उनका कहना था कि यह कदम सरकार की हिंदू हितों के प्रति प्रतिबद्धता दिखाएगा। यह विवाद 18 जनवरी का है। मौनी अमावस्या के मौके पर स्वामी संगम की ओर पालकी में जा रहे थे। प्रशासन ने भारी भीड़ का हवाला देते हुए उन्हें पालकी से उतरकर पैदल जाने को कहा।
मेला प्रशासन का आरोप था कि उनके समर्थकों ने एक पंटून पुल पर बैरिकेड तोड़ दिया, जिससे भीड़ नियंत्रण में परेशानी हुई। इस घटना के बाद स्वामी ने शंकराचार्य कैंप के बाहर धरना दिया। उन्होंने प्रशासन से माफी और परंपरा के अनुसार सम्मानजनक एस्कॉर्ट के साथ स्नान की व्यवस्था की मांग की।