उत्तराखंड में बड़ा हादसा! धौलीगंगा पावर हाउस में भूस्खलन, अंदर फंसे सभी 19 कर्मचारी निकाले गए

Landslides in Uttarakhand: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में धारचूला के पास ऐलागाड़ क्षेत्र में रविवार (31 अगस्त) को मूसलाधार बारिश के कारण 280 मेगावाट की धौलीगंगा पावर प्रोजेक्ट की सुरंगों के मुहाने पर हुए भारी भूस्खलन से बिजलीघर के अंदर फंसे नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कारपोरेशन (NHPC) के सभी 19 कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है

अपडेटेड Aug 31, 2025 पर 10:22 PM
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Landslides in Uttarakhand: अधिकारियों ने कहा कि जल्द ही रास्ता साफ कर लिया जाएगा, जिसके बाद सभी मजदूर बाहर आ सकेंगे

Landslides in Uttarakhand: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में धारचूला के पास ऐलागाड़ क्षेत्र में मूसलाधार बारिश के कारण हुए भूस्खलन से धौलीगंगा पावर प्रोजेक्ट की सामान्य और आपातकालीन दोनों सुरंगों को जाने वाला रास्ता बंद हो गया। इससे नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कारपोरेशन (NHPC) के 19 कर्मचारी बिजलीघर के अंदर फंस गए। हालांकि, अधिकारियों ने रविवार रात को बताया कि सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।

एक अधिकारी ने बताया कि उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में धारचूला के पास ऐलागाड़ क्षेत्र में रविवार को मूसलाधार बारिश के कारण 280 मेगावाट की धौलीगंगा पावर हाउस की सुरंगों के मुहाने पर हुए भारी भूस्खलन से बिजलीघर के अंदर फंसे सभी नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कारपोरेशन (NHPC) के 19 अधिकारियों और कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।


पीटीआई के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि भूस्खलन से प्रोजेक्ट की दोनों सुरंगों सामान्य और आपातकालीन को जाने वाला रास्ता बाधित हो गया था जिससे उसके अंदर काम कर रहे 19 अधिकारी और कर्मचारी फंस गए थे।

पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी विनोद गोस्वामी ने कहा कि घटना की जानकारी मिलते ही तत्काल जिला प्रशासन, राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) तथा सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की संयुक्त टीम ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। उन्होंने बताया कि अंदर फंसे सभी 19 अधिकारियों और कर्मचारियों को बाहर निकाल लिया गया है। गोस्वामी ने कहा कि सभी अधिकारी एवं कर्मचारी पूरी तरह से सुरक्षित हैं।

उन्होंने बताया कि फिलहाल स्थिति सामान्य है। इससे पहले धारचूला के उप जिलाधिकारी जितेंद्र वर्मा ने बताया कि ऊपर से लगातार मलबा गिरने के बावजूद सीमा सड़क संगठन और हालवेज कंपनी की जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पावर हाउस में बिजली उत्पादन सामान्य रूप से जारी है।

इस बीच, चमोली जिले में ज्योतिर्मठ-मलारी हाईवे पर शनिवार देर रात भारी बारिश के कारण तमक बरसाती नाले में आई बाढ़ से वहां बना एक पुल बह गया। इससे नीति घाटी के सीमांत क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों तथा सीमा पर तैनात सैनिक एवं अर्धसैनिक बलों का मोटर संपर्क टूट गया है। चमोली जिला प्रशासन ने बताया कि सुराहीथोटा और जुम्मा के बीच तमक नाले के ऊपरी क्षेत्र में भारी बारिश के कारण देर रात दो बजे बाढ़ आ गई। इससे वहां बना सीमेंट और कंक्रीट का पुल बह गया।

अलकनंदा नदी की सहायक जलधारा धौलीगंगा के किनारे स्थित इस क्षेत्र में हुई घटना में किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं है। पुल बहने से तमक से आगे नीति घाटी के सीमांत क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक जनजातीय गांवों और सीमा पर तैनात सैनिक एवं अर्धसैनिक बलों का मोटर संपर्क ठप हो गया है। करीब तीन साल पहले यहां से लगभग पांच किलोमीटर आगे जुम्मा मोटर पुल भी इसी तरह बह गया था।

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इस बीच, बदरीनाथ नेशनल हाईवे, चमोली और ज्योतिर्मठ के बीच दो स्थानों-भनीरपानी और पागलनाला पर मलबा आने से बंद है। जिला प्रशासन ने बताया कि मार्ग पर ट्रैफिक बहाल करने के लिए मशीनों से मलबा हटाया जा रहा है। केदारनाथ को चमोली से जोड़ने वाला कुंड-चमोली राष्ट्रीय हाईवे भी बैरागना के समीप भूस्खलन से अवरुद्ध है जिसे खोलने के प्रयास जारी हैं। बारिश के कारण ज्योतिर्मठ क्षेत्र में बिजली प्रभावित है।

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