Waqf Amendment Bill 2025: क्या है वक्फ, क्यों इस कानून में हो रहा बदलाव और किसलिए मचा है इतना बवाल? जानें सबकुछ
Waqf Amendment Bill: वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष शुरुआत से ही आमने-सामने है, लेकिन इसे लेकर कई तरह के सवाल जहन में आते हैं कि आखिर ये वक्फ है क्या और इससे जुड़े कानूनों में क्या नया बदलाव होने जा रहा है और इस सब पर इतना बवाल क्यों मचा है? चलिए जानते हैं ऐसे ही सभी जरूरी सवाल के जवाब...
Waqf Amendment Bill 2025: क्या है वक्फ, क्यों इस कानून में हो रहा बदलाव और किसलिए मचा है इतना बवाल, जानें सबकुछ
राज्यसभा ने वक्फ बोर्ड में पारदर्शिता बढ़ाने सहित कई अहम प्रावधानों वाले वक्फ संशोधन विधेयक, 2025 को बृहस्पतिवार को लंबी चर्चा के बाद 95 के मुकाबले 128 वोटों से मंजूरी दे दी। इस विधेयक के बारे में सरकार ने दावा किया कि इसके कारण देश के गरीब और पसमांदा मुसलमानों और इस समुदाय की महिलाओं की स्थिति में सुधाार लाने में काफी मदद मिलेगी। इसी के साथ संसद ने वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 को मंजूरी दे दी। लोकसभा ने बुधवार देर रात करीब दो बजे इन्हें पारित किया था।
उच्च सदन ने विपक्ष की ओर से लाए गए कई संशोधनों को खारिज कर दिया। जबकि कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि वह संसद में पारित ‘वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025’ की संवैधानिकता को ‘‘बहुत जल्द’’ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी।
वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष शुरुआत से ही आमने-सामने है, लेकिन इसे लेकर कई तरह के सवाल जहन में आते हैं कि आखिर ये वक्फ है क्या और इससे जुड़े कानूनों में क्या नया बदलाव होने जा रहा है और इस सब पर इतना बवाल क्यों मचा है? चलिए जानते हैं ऐसे ही सभी जरूरी सवाल के जवाब...
वक्फ क्या है?
इस्लाम को मानने वाला कोई शख्स अल्लाह के नाम पर या धर्मिक कार्यों और परोपकार के लिए अपनी चल या अचल संपत्ति को दान कर देता है, तो ऐसी संपत्ति को वक्फ कहते हैं। इसके बाद ये संपत्ति सिर्फ अल्लाह की होगी और इसे सिर्फ परोपकार के काम में ही इस्तेमाल किया जा सकता है।
BBC के मुताबिक, वक्फ वेलफेयर फोरम के चेयरमैन जावेद अहमद कहते हैं, "वक्फ एक अरबी शब्द है, जिसके मायने होते हैं ठहरना। जब कोई संपत्ति अल्लाह के नाम से वक्फ कर दी जाती है, तो वो हमेशा-हमेशा के लिए अल्लाह के नाम पर हो जाती है। फिर उसमें कोई बदलाव नहीं हो सकता है।" ये संपत्ति भलाई के मकसद से समाज की हो जाती है।
दान किए जाने के बाद वक्फ संपत्ति न किसी को बेची जा सकती और न ही खरीदी जा सकती और तो और ऐसी संपत्ति को किसी दूसरे को ट्रांसफर भी नहीं किया जा सकता है।
खुद सुप्रीम कोर्ट ने भी जनवरी 1998 में अपने एक फैसले में कहा था, "एक बार जो संपत्ति वक्फ हो जाती है, वो हमेशा वक्फ ही रहती है।"
कैसे होता है वक्फ संपत्ति का मैनेजमेंट?
जाहिर अगर कोई अपनी संपत्ति दान या वक्फ करता है, तो उसका मैनेजमेंट भी किया जाएगा, तो इसके लिए सरकार ने वक्फ बोर्ड और सेंट्रल वक्फ काउंसिल बनाया था।
सेंट्रल वक्फ काउंसिल एक सेंट्रल लेवल की ऑटोनॉमस बॉडी है, जो वक्फ संपत्तियों के देखरेख, उनकी सुरक्षा और उनका मैनेजमेंट करता है। इसके अलावा राज्य स्तर पर वक्फ संपत्तियों का मैनेजमेंट करने के लिए वक्फ बोर्ड बना गए हैं। भारत में कुल 32 वक्फ बोर्ड हैं।
वक्फ बोर्ड के अंदर चुने हुए सदस्य होते हैं और ये सदस्य मिलकर अपना एक चेयरमैन चुनते हैं। जबकि सरकार की ओर से एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी नियुक्त किया जाता है।
यहां कुछ एक शब्दों का मतलब जानना और भी जरूरी है। जैसे वाकिफ- संपत्ति दान करने वाले को वाकिफ कहते हैं, मुतवल्ली: मुतवल्ली को वक्फ की संपत्ति का मैनेजमेंट करने के लिए नियुक्त किया जाता और इन संपत्तियों पर सीधा कंट्रोल रखता है। ये संपत्ति से होने वाली कुल कमाई का एक तय प्रतिशत वक्फ बोर्ड को देते हैं।
सेना और रेलवे के बाद वक्फ के पास सबसे ज्यादा संपत्ति
पूरी दुनिया में भारत के पास सबसे ज्यादा वक्फ संपत्तियां हैं। भारत में सेना और रेलवे के बाद सबसे ज्यादा जमीन वक्फ बोर्ड के पास ही है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि...
- देशभर में वक्फ बोर्ड के पास 8.7 लाख संपत्तियां
- 9.4 लाख एकड़ में फैली हुई संपत्तियां
- कुल कीमक करीब 1.2 लाख करोड़ रुपए
भारत में वक्फ बोर्ड को लेकर बड़े मुद्दे हैं, जैसे बोर्ड के संविधान में विविधता नहीं है, वक्फ संपत्तियों के स्टेटस को बदला नहीं जा सकता, कोई कानूनी निगरानी नहीं और प्रावधानों के दुरुपयोग का आरोप।
वक्फ संशोधन बिल 2025 को लेकर क्या है आपत्ति?
इस नए बिल में कहा गया है कि अब केवल वही शख्स संपत्ति को वक्फ के लिए दान दे पाएगा, जो लगातार पिछले 5 सालों से इस्लाम को मानता आया हो और मुस्लिम धर्म का पालन किया हो। साथ ही जमीन पर उसका मालिकाना हक हो।
वक्फ एक्ट में दो तरह की संपत्ति का जिक्र है- वक्फ अल्लाह और वक्फ अलल औलाद
वक्फ अल्लाह- ऐसी प्रॉपर्टी जिसे अल्लाह को समर्पित कर दिया गया है और जिसका कोई वारिसाना हक न बचा हो।
वक्फ अलल औलाद- ऐसी वक्फ संपत्ति जिसकी देख-रेख दान करने वाले के वारिस करते हो।
नए बिल में वक्फ अलल औलाद के तहत महिलाओं के विरासत का अधिकार बरकरार रखा गया है। साथ ऐसी संपत्ति एक बार सरकार के पास आ गई, तो जिला कलेक्टर उसे विधवा महिलाओं या बिना मां-बाप के बच्चों के कल्याण में इस्तेमाल कर सकेगा।
जिला अधिकारी को कंट्रोल दिए जाने पर आपत्ति
मान लीजिए कोई सरकारी जमीन है और उस पर वक्फ बोर्ड उसे वक्फ संपत्ति होने का दावा करता है, तो अब नए प्रावधानों के अनुसार, वक्फ का दावा माना जाएगा या नहीं ये सिर्फ जिले का DM अपने विवेक से तय करेगा।
DM ऐसी संपत्ति पर अपने पक्ष के साथ एक रिपोर्ट सरकार को भेज सकता है। सरकार ने अगर ये मान लिया कि ये सरकार संपत्ति है, तो फिर वो हमेशा के लिए सरकार की हो जाएगी। रिकॉर्ड में वो संपत्ति हमेशा के लिए सरकारी संपत्ति के रूप में दर्ज हो जाएगी।
वक्फ के सर्वे का अधिकार खत्म
अब तक होता ये था कि किसी भी संपत्ति पर वक्फ बोर्ड पहले सर्वे करता था और फिर ये बताता था कि संपत्ति वक्फ है या नहीं, लेकिन नए कानून के तहत अब ये अधिकार भी DM को दे दिया जाएगा।
मौजूदा एक्ट में वक्फ बोर्ड के सर्वे कमिश्नर के पास वक्फ के दावे वाली संपत्तियों के सर्वे का अधिकार है, लेकिन प्रस्तावित बिल में संशोधन के बाद सर्वे कमिश्नर से यह अधिकार लेकर उसे जिले के कलेक्टर को दे दिया जाएगा।
ये फैसला इसलिए भी लिया गया है कि कई मामलों में सालों से सर्वे रुके पड़े हैं और सर्वे कमिश्नर का खराब प्रदर्शन देखने को मिला है। गुजरात और उत्तराखंड में अभी तक सर्वे शुरू नहीं हुआ है, और उत्तर प्रदेश में 2014 का सर्वे अभी भी रुका पड़ा है। विशेषज्ञता की कमी और राजस्व विभाग के साथ समन्वय की कमी ने रजिस्ट्रेशन को और धीमा कर दिया है।
वक्फ को लेकर और भी कई विवाद
अब तक वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसलों के खिलाफ उच्च अदालतों में अपील नहीं की जा सकती, जिससे वक्फ प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही सीमित हो जाती है। हालांकि, नए प्रस्ताव में इसे भी बदला जाएगा।
कुछ राज्य वक्फ बोर्ड ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है, जिससे सामुदायिक तनाव पैदा हुआ है। वक्फ अधिनियम की धारा 40 का निजी संपत्तियों को वक्फ घोषित करने के लिए खूब दुरुपयोग किया गया है, जिससे कानूनी विवाद पैदा हुए हैं। 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में से केवल 8 ने रिपोर्ट की है, जिसमें धारा 40 के तहत 515 संपत्तियों को वक्फ घोषित किया गया है।
इस सब के चलते नए बिल में वक्फ काउंसिल में भी बदलाव करने का प्रस्ताव दिया गया है। मौजूदा नियम के मुताबिक, काउंसिल में सभी सदस्य मुस्लिम होना अनिवार्य है, लेकिन नए प्रस्ताव में दो गैर-मुस्लिमों को शामिल किए जाने की बात कही है।
इसे ऐसे समझिए कि सेंट्रल वक्फ काउंसिल में 22 सदस्यों में से 2 सदस्य (विशेष सदस्यों को छोड़कर) गैर-मुस्लिम हो सकते हैं। इसी तरह राज्य वक्फ बोर्डों में 11 सदस्यों में से 2 (विशेष सदस्यों को छोड़कर) गैर-मुस्लिम हो सकते हैं।
इस सब के अलावा एक सेंट्रलाइज पोर्टल के जरिए वक्फ संपत्ति का मैनेजमेंट किया जाएगा, जिससे दक्षता और पारदर्शिता में सुधार होगा। मुतवल्लियों को छह महीने के भीतर इस सेंट्रल पोर्टल पर संपत्ति की डिटेल दर्ज करनी होगी।
"एक बार वक्फ, हमेशा वक्फ" के सिद्धांत ने ऐसे कई विवादों को जन्म दिया। इसी कड़ी में पिछले करीब दो सालों में देश के अलग-अलग हाई कोर्ट में वक्फ से जुड़ी करीब 120 याचिकाएं दायर की गई थीं, जिसके चलते अब वक्फ एक्ट में बदलाव करना जरूरी समझा गया।