संसद में वक्फ संशोधन विधेयक पर आठ घंटे की लंबी बहस शुरू हो गई है। बुधवार सुबह अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में प्रस्तावित विधेयक पेश कर दिया। यह विधेयक मुस्लिमों की दान की हुई संपत्तियों के मैनेजमेंट को तय करने वाले कानूनों में बदलाव करने के लिए लाया गया है। बिल पेश करने के साथ ही केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा।
रिजिजू ने दावा किया कि विपक्षी पार्टी ने सत्ता में रहते हुए वक्फ कानूनों में "संदिग्ध" बदलाव किए थे, जिसमें "वक्फ को दी गई 123 प्रमुख इमारतों" को डिनोटिफिकेशन करना भी शामिल था।
उन्होंने तंज भरे लहजे में कहा कि अगर कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार को नहीं रोका जाता, तो वो (पुराने) संसद भवन को भी वक्फ को सौंप देती।
इसके बाद रिजिजू ने विपक्ष की आलोचना की कि वह इन बदलावों के खिलाफ खड़ा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मस्जिदों के मैनेजमेंट में कोई बदलाव नहीं होगा।
सूत्रों ने बताया कि इन बदलावों का मकसद मुस्लिम महिलाओं और बच्चों को सशक्त बनाना है, जो पुराने कानून के तहत "पीड़ित" थे। केंद्रीय मंत्री ने गुस्से में कहा, "यह प्रॉपर्टी मैनेजमेंट का मुद्दा है, सरकार का धार्मिक भावनाओं से कोई लेना-देना नहीं है।"
रिजिजू ने कहा, विपक्ष को इस कानून के बारे में गलत जानकारी नहीं फैलानी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस और बाकी दलों पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने चेतावनी दी, "तुष्टिकरण से वोट नहीं मिलते।"
वक्फ कानून में बदलाव को लेकर विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब बिहार में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं, जहां मुस्लिम आबादी लगभग 17 प्रतिशत है।
रिजिजू ने कहा, "हम बहुत साफ निर्देश के साथ आए हैं... हम चाहते हैं कि वक्फ धर्मनिरपेक्ष और समावेशी हो।" उन्होंने प्रस्ताव किए गए कई बदलावों का जिक्र किया, जिसमें हर एक राज्य वक्फ बोर्ड और सेंट्रल वक्फ काउंसिल में दो गैर-मुस्लिमों को शामिल करना भी जरूरी है। इस नियम पर काफी ज्यादा विवाद है।
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ने इन बोर्डों में महिला प्रतिनिधित्व की कमी पर भी सवाल उठाया और कहा कि सरकार ने कम से कम दो महिला सदस्यों की गारंटी देने का प्रावधान लिखा है।