सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार खींचतान के बाद आखिरकार बुधवार को वक्फ (संशोधन) विधेयक को लोकसभा में पेश कर दिया गया। इस बिल को विचार और पारित करने के लिए रखा गया है। लोकसभा में केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री किरेन रिजिजू ने इस विधेयक को पेश किया। अब इस बिल पर सदन में 8 घंटे तक बहस होगी, जिसमें सरकार और विपक्ष दोनों तरफ से अपने-अपने तर्क रखे जाएंगे और फिर बिल को पास कराने के लिए वोटिंग कराई जाएगी।
सदन में आज भारी हंगामे के आसार हैं, क्योंकि विपक्ष ने कहा कि सभी INDIA ब्लॉक पार्टियां इस “कानून को हराने” के लिए एकजुट हैं। उधर BJP को भी NDA के सभी सहयोगियों का इस पर साथ मिल रहा है। यह विधेयक पहली बार पिछले साल पेश किया गया था। तब हंगामे और विपक्ष की आपत्ति के चलते इसे संयुक्त संसदीय समिति को भेज दिया गया था।
वहीं लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश करने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, "मैं यह कहना चाहता हूं कि वक्फ संशोधन विधेयक पर दोनों सदनों की संयुक्त समिति में जो चर्चा हुई है, वह भारत के संसदीय इतिहास में आज तक कभी नहीं हुई। मैं संयुक्त समिति के सभी सदस्यों को धन्यवाद और बधाई देता हूं... अब तक अलग-अलग समुदायों के राज्य धारकों के कुल 284 प्रतिनिधिमंडलों ने समिति के सामने अपने विचार और सुझाव पेश किए हैं। 25 राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के वक्फ बोर्डों ने भी अपनी प्रजेंटेशन दी हैं।"
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने आगे कहा, "।किसी की बात कोई बदगुमा न समझेगा। ज़मीन का दर्द कभी आसमान न समझेगा...मुझे न केवल उम्मीद है, बल्कि मुझे पूरा यकीन है कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, उनका भी हृदय परिवर्तन होगा। हर कोई सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ इस बिल का समर्थन करेगा।"
वक्फ संशोधन विधेयक पर किसने क्या कहा?
लोकसभा में कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कहा, "इस तरह का बिल (वक्फ संशोधन विधेयक) जिसे आप सदन में ला रहे हैं, कम से कम सदस्यों को संशोधन करने का अधिकार तो होना चाहिए...आप कानून को जबरन थोप रहे हैं। आपको संशोधन के लिए समय देना चाहिए। संशोधन के लिए कई प्रावधान हैं।"
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "...यह आपका (विपक्ष का) आग्रह था कि एक संयुक्त संसदीय समिति बनाई जानी चाहिए। हमारे पास कांग्रेस जैसी समिति नहीं है। हमारे पास एक लोकतांत्रिक समिति है, जो मंथन करती है। 'कांग्रेस के ज़माने में समिति होती थी, जो ठप्पा लगाती थी'। हमारी समिति चर्चा करती है, चर्चा के आधार पर विचार-विमर्श करती है और बदलाव करती है। अगर बदलाव स्वीकार नहीं किए जाने हैं, तो समिति का क्या मतलब है?"