Bengal DA Case: सुप्रीम कोर्ट से ममता सरकार को बड़ा झटका, 31 मार्च तक बंगाल के कर्मचारियों को बकाया 25% DA देने का आदेश

West Bengal DA Case: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (5 फरवरी) को ममता बनर्जी सरकार को 31 मार्च तक पश्चिम बंगाल के कर्मचारियों को मिलने वाले महंगाई भत्ते (DA) का 25 प्रतिशत क्लियर करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से पश्चिम बंगाल के करीब 20 लाख सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है

अपडेटेड Feb 05, 2026 पर 2:30 PM
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West Bengal DA Case: सुप्रीम कोर्ट ने 2008-19 के लिए बंगाल के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) को फिर से तय करने का निर्देश दिया है

West Bengal DA Case: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (5 फरवरी) को ममता बनर्जी सरकार को झटका देते हुए 31 मार्च तक पश्चिम बंगाल सरकार के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते (DA) का 25 प्रतिशत भुगतान करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया है कि वह अपने कर्मचारियों को 2009 से 2019 तक का बकाया DA जारी करे। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से पश्चिम बंगाल के करीब 20 लाख लोगों को बड़ी राहत मिली है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, ममता सरकार को होली के आसपास तक बकाया DA का 25% भुगतान करना होगा। उसके बाद बाकी के 75% किस्तों में देना होगा। बेंच ने बंगाल सरकार को बाकी 75 प्रतिशत DA पर फैसला करने के लिए चार सदस्यों की एक कमेटी बनाने का भी आदेश दिया। इसी बेंच ने पिछले साल अगस्त में इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार के कर्मचारी 2008-2019 की अवधि के लिए पश्चिम बंगाल सर्विसेज़ (वेतन और भत्तों में संशोधन) नियम, 2009 के अनुसार महंगाई भत्ता (DA) पाने के हकदार हैं। इसकी गणना ऑल-इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स का उपयोग करके की जाएगी।


31 मार्च तक करने होंगे भुगतान

बेंच ने गुरुवार को ममता बनर्जी सरकार को 31 मार्च तक राज्य सरकार के कर्मचारियों को मिलने वाले महंगाई भत्ते (DA) का 25 प्रतिशत देने का आदेश दिया। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की डिवीजन बेंच का यह आदेश उसी दिन आया जब राज्य सरकार का वोट-ऑन-अकाउंट राज्य विधानसभा में पेश किया जाएगा। चूंकि राज्य विधानसभा चुनाव नज़दीक आ रहे हैं। इसलिए राज्य सरकार का बजट नतीजे घोषित होने के बाद पेश किया जाएगा।

पिछले साल 16 मई को दिए गए एक अंतरिम आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को अपने कर्मचारियों को तीन महीने के भीतर महंगाई भत्ते का 25 प्रतिशत भुगतान करने का निर्देश दिया था। बाद में ममता बनर्जी सरकार ने फंड की कमी का हवाला देते हुए शीर्ष अदालत से डेडलाइन छह महीने बढ़ाने की अपील की थी।

18 बार सुनवाई टली

2022 से अब तक इस मुद्दे पर 18 बार सुनवाई टल चुकी है। ममता बनर्जी सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा शुरू की गई अवमानना ​​कार्यवाही के खिलाफ अपील दायर की थी। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संदीप मेहता की पिछली बेंच ने अंतरिम आदेश पारित किया था। इससे उन कर्मचारियों का लंबा इंतजार खत्म हुआ, जिन्होंने ममता सरकार द्वारा 2022 में कलकत्ता में अपने खिलाफ शुरू की गई अवमानना ​​कार्यवाही को चुनौती देते हुए अपील दायर करने के बाद इस मुद्दे पर 18 बार सुनवाई टलने का सामना किया था।

राज्य सरकार कर्मचारी परिसंघ और अन्य ने बकाया भुगतान करने से राज्य के इनकार को चुनौती दी थी। 1 अप्रैल, 2025 से बंगाल सरकार के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता पिछले साल के राज्य बजट प्रस्तावों में मूल वेतन का 18 प्रतिशत तय किया गया था। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और राज्य सरकार के कर्मचारियों के बीच यह अंतर लगभग 40 प्रतिशत है।

बीजेपी ने बोला हमला

बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने राज्य सरकार के कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों को सुरक्षित किया है। सुवेंदु ने कहा, "आज ममता बनर्जी गलत साबित हुई हैं। सालों से वह दावा कर रही थीं कि DA कोई अधिकार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि DA कोई ग्रांट नहीं है। कई कानूनी लड़ाइयों के बावजूद, जिन्हें कर्मचारियों ने हर बार जीता, राज्य सरकार कर्मचारियों को उनके हक से वंचित करने के लिए कानूनी विशेषज्ञों को हायर करने पर करोड़ों खर्च करती रही।"

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