LAC के पास चीन ने तैनात किए J-20 'माइटी ड्रैगन' फाइटर जेट्स! आखिर ये क्या है और भारत के लिए क्यों बढ़ी चुनौती? जानिए पूरी रिपोर्ट

India vs China in LAC: चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अपनी हवाई शक्ति को बढ़ाते हुए भारत के सामने स्थित एयरबेस पर अपने सबसे एडवांस J-20 'माइटी ड्रैगन' स्टील्थ फाइटर जेट्स की तैनाती बढ़ा दी है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLAAF) के ऑपरेशनल रुख में एक बड़ा बदलाव है

अपडेटेड Jul 28, 2026 पर 4:33 PM
India vs China in LAC: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने LAC के पास अपने 'माइटी ड्रैगन' तैनात किए हैं

India vs China in LAC: चीन ने भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास अपने सबसे आधुनिक J-20 'माइटी ड्रैगन' स्टील्थ फाइटर जेट्स की तैनाती बढ़ा दी है। डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कदम लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLAAF) की रणनीति में बड़ा बदलाव दर्शाता है। एक्सपर्ट का कहना है कि भारत के लिए उत्तरी मोर्चे पर नई सुरक्षा चुनौती पैदा कर सकता है।

NDTV की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Vantor से मिली कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि चीन ने जून के आखिर और जुलाई की शुरुआत में दो रणनीतिक रूप से अहम एयरबेस पर 11, J-20 फाइटर जेट तैनात किए।

दो एयरबेस पर दिखे 11 J-20 विमान


9 जुलाई को चीन के शिनजियांग उइगुर ऑटोनॉमस रीजन में होटन एयरबेस पर सात J-20 देखे गए। मिलिट्री और सिविलियन दोनों कामों में इस्तेमाल होने वाला यह बेस लेह से लगभग 389 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में और लद्दाख में इंडियन एयर फोर्स के दौलत बेग ओल्डी एयरफील्ड से सिर्फ 245 km दूर है।

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के सामने मौजूद किसी भी चीनी एयरबेस पर अब तक देखे गए J-20 स्टील्थ फाइटर्स की यह सबसे बड़ी संख्या है। इसके अलावा तिब्बत के डैमशुंग एयरबेस पर भी 4 J-20 विमान तैनात पाए गए। यह एयरबेस अरुणाचल प्रदेश के तवांग से लगभग 344 किलोमीटर दूर है।

रक्षा विशेषज्ञों ने क्या कहा?

पूर्व लड़ाकू पायलट और एयरोस्पेस फर्म NewSpace के को-फाउंडर समीर जोशी ने NDTV को बताया, "होटन में सात और डैम्सुंग में चार J-20 इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारत के सामने ऊंचे इलाकों वाले बेस से पांचवीं पीढ़ी के ऑपरेशन अब PLAAF के लिए रूटीन हैं, न कि कोई संकेत देने वाली बात है...।" उन्होंने कहा कि इससे हमारे काउंटर-स्टील्थ सेंसर, इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस और स्टैंडऑफ स्ट्राइक क्षमता को और बेहतर बनाने की जरूरत बढ़ जाती है।

इस तैनाती ने फिर से ध्यान खींचा है क्योंकि भारत के पास अभी कोई पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर नहीं है। हालांकि इंडियन एयर फोर्स के पास 36 राफेल फाइटर और 260 से ज़्यादा Su-30MKI एयरक्राफ्ट हैं। लेकिन उसका अपना एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) अभी सर्विस में आने में कई साल दूर है।

रिटायर्ड एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी ने NDTV को बताया कि चीन की सालाना लगभग 125 फाइटर एयरक्राफ्ट बनाने की क्षमता उसके एयरोस्पेस इकोसिस्टम की परिपक्वता को दिखाती है। उन्होंने कहा, "वे इसे लगभग कमर्शियल एयरक्राफ्ट की तरह बना रहे हैं। ऐसा तभी हो सकता है जब सप्लाई चेन पूरी तरह से जुड़ी हुई हो, सभी सप्लायर मैन्युफैक्चरिंग के बहुत कड़े स्टैंडर्ड्स को पूरा करते हों और इस काम को जारी रखने के लिए बेहतरीन क्वालिटी वाले लोग उपलब्ध हों।"

समीर जोशी ने NDTV से कहा कि अब भारत की सीमा के सामने ऊंचाई वाले एयरबेस से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों का संचालन चीन के लिए सामान्य बात बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना के लिए अब उत्तरी सीमा पर स्टेल्थ विमानों का खतरा स्थायी चुनौती है।

इसलिए काउंटर-स्टेल्थ सेंसर, एयर डिफेंस सिस्टम और लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता को तेजी से मजबूत करने की जरूरत होगी। वहीं, रिटायर्ड एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी ने कहा कि चीन हर साल लगभग 125 लड़ाकू विमान बनाने की क्षमता हासिल कर चुका है, जो उसके मजबूत एयरोस्पेस उद्योग और सप्लाई चेन को दर्शाता है।

क्या है J-20 'माइटी ड्रैगन'?

चेंगदू J-20 फाइटर जेट्स को 'माइटी ड्रैगन' के नाम से भी जाना जाता है। यह चीन का पहला ऑपरेशनल पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर एयरक्राफ्ट है। चेंगदू एयरक्राफ्ट इंडस्ट्री ग्रुप (Chengdu Aircraft Industry Group) द्वारा विकसित इस जेट्स को मुख्य रूप से हवाई वर्चस्व, लंबी दूरी के इंटरसेप्शन और डीप-स्ट्राइक मिशन के लिए डिजाइन किया गया है।

चीन ने पिछले कुछ वर्षों में अपने J-20 बेड़े का तेजी से विस्तार किया है। 'द वॉर जोन' और 'रॉयल ​​यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट' (RUSI) से NDTV द्वारा बताए गए आंकड़ों के अनुसार, J-20 की संख्या 2019 में लगभग 50 एयरक्राफ्ट से बढ़कर 2026 के मध्य तक 300 से 500 के बीच हो गई है। वहीं, RUSI (Royal United Services Institute) का अनुमान है कि चीन 2030 तक लगभग 1,000 J-20 फाइटर तैनात कर सकता है।

इस एयरक्राफ्ट ने 2011 में अपनी पहली उड़ान भरी और 2017 में PLAAF (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फ़ोर्स) के साथ ऑपरेशनल सर्विस में शामिल हुआ। इसे अमेरिकी F-22 रैप्टर और F-35 लाइटनिंग II जैसे एडवांस्ड पांचवीं पीढ़ी के फाइटर विमानों का मुकाबला करने और विवादित हवाई क्षेत्र में चीन की पहुंच बढ़ाने के लिए विकसित किया गया था।

करीबी लड़ाई (डॉगफाइट) के लिए डिजाइन किए गए पारंपरिक फाइटर विमानों के विपरीत J-20 स्टील्थ तकनीक, एडवांस्ड सेंसर और लंबी दूरी की हवा-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलों का उपयोग करके लंबी दूरी से दुश्मनों का मुकाबला करने पर ध्यान केंद्रित करता है।

J-20 की खासियत क्या है?

J-20 अपने रडार सिग्नेचर को कम करने के लिए स्टील्थ आकार, इंटरनल वेपन बे और रडार-एब्जॉर्बेंट मटीरियल का संयोजन करता है, जिससे पारंपरिक चौथी पीढ़ी के फाइटर विमानों की तुलना में इसका पता लगाना काफी मुश्किल हो जाता है। इसके ऑनबोर्ड सिस्टम सेंसर फ्यूजन के माध्यम से रडार, इन्फ्रारेड सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस को एक ही ऑपरेशनल तस्वीर में दिखते हैं, जिससे पायलट खतरों की पहचान करने और उनसे अधिक प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम होते हैं।

यह एयरक्राफ्ट "फर्स्ट-लुक, फर्स्ट-शॉट" सिद्धांत पर बनाया गया है। इसे दुश्मन के विमान के देखे जाने से पहले ही उसका पता लगाने और ट्रैक किए जाने में मुश्किल बने रहते हुए 'बियॉन्ड-विजुअल-रेंज' मिसाइलें दागने की अनुमति देता है। चीन ने एयरक्राफ्ट के प्रोपल्शन सिस्टम में भी धीरे-धीरे सुधार किया है।

शुरुआती वेरिएंट रूसी-निर्मित इंजनों पर निर्भर थे। जबकि नए संस्करणों में घरेलू स्तर पर निर्मित WS-10C इंजन का उपयोग किया जाता है। भविष्य के वेरिएंट में अधिक शक्तिशाली WS-15 इंजन होने की उम्मीद है, जिसे गति और सुपरक्रूज प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए डिजाइन किया गया है।

इसकी खूबियां क्या हैं?

J-20 का सबसे बड़ा फायदा इसकी 'स्टेल्थ' (छिपकर हमला करने की) क्षमता है। खासकर सामने से रडार की पकड़ में न आने की खूबी, जिससे यह भारी सुरक्षा वाले हवाई क्षेत्र में भी घुस सकता है। इसमें ईंधन रखने की बड़ी क्षमता है, जिससे इसकी ऑपरेशनल रेंज (काम करने की दूरी) कई मौजूदा फाइटर जेट्स से ज्यादा है।

यह बड़े इलाकों में लंबे समय तक गश्त कर सकता है। इस विमान को चीन के बड़े नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर सिस्टम के हिस्से के तौर पर काम करने के लिए भी डिजाइन किया गया है, ताकि यह हवा में जल्दी चेतावनी देने वाले विमानों, ड्रोन और ज़मीन पर मौजूद कमांड सिस्टम के साथ जानकारी शेयर कर सके।

इनमें ये कमियां भी हैं!

हालांकि, J-20 पूरी तरह अजेय नहीं माना जाता। डिफेंस एक्सपर्ट के मुताबिक, इसके इंजन अभी भी पश्चिमी देशों के सबसे आधुनिक इंजनों के मुकाबले कुछ मामलों में पीछे हैं। इसके अलावा यह लड़ाकू विमान नजदीकी डॉगफाइट की बजाय लंबी दूरी के युद्ध के लिए अधिक उपयुक्त है। इसकी एक बड़ी सीमा यह भी है कि इसे अब तक किसी वास्तविक युद्ध में परखा नहीं गया है।

जानकारों का कहना है कि इसके मौजूदा इंजन लगातार बेहतर परफॉर्मेंस के मामले में पश्चिमी देशों के सबसे आधुनिक इंजनों से अभी भी पीछे हैं। हालांकि चीन अपने देश में बने इंजन की तकनीक को लगातार बेहतर बना रहा है।

इस विमान के डिजाइन में बहुत ज्यादा तेजी से मुड़ने या पैंतरेबाजी करने (manoeuvrability) के बजाय स्टेल्थ और लंबी दूरी से हमले करने पर ज्यादा जोर दिया गया है। इससे यह पास से होने वाली हवाई लड़ाई (close-range aerial combat) के लिए उतना बेहतर नहीं है। एक और बड़ी कमी है इसे लड़ाई का अनुभव न होना। कई पश्चिमी फाइटर जेट्स के उलट, J-20 को असल युद्ध के हालात में परखा नहीं गया है।

भारत के लिए इसका क्या मतलब है?

LAC के पास J-20 फाइटर जेट्स की बढ़ती तैनाती PLAAF (चीनी वायु सेना) के तेजी से हो रहे आधुनिकीकरण को दिखाती है। यह भारत की वायु शक्ति के लिए एक बढ़ती हुई चुनौती पेश करती है।

भारतीय वायु सेना के लिए उत्तरी सीमा पर स्टेल्थ फाइटर जेट्स की बढ़ती मौजूदगी से उम्मीद है कि काउंटर-स्टेल्थ रडार सिस्टम, इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस नेटवर्क, लंबी दूरी की मिसाइलों और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमताओं में निवेश तेजी से बढ़ेगा।

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इससे भारत के अपने फाइटर जेट प्रोग्राम, खासकर एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) को भी तेजी मिलेगी। साथ ही राफेल बेड़े को बढ़ाने और Su-30MKI को अपग्रेड करने की जरूरत और मजबूत होगी। जैसे-जैसे चीन पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स का उत्पादन और फॉरवर्ड तैनाती (सीमा के पास तैनाती) बढ़ा रहा है, स्टेल्थ क्षमताओं में तकनीकी अंतर भारत की भविष्य की वायु शक्ति रणनीति को तय करने वाला एक मुख्य मुद्दा बना रहेगा।

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