VB–G Ram G Bill: 'विकसित भारत-जी राम जी बिल 2025' में क्या है खास? जानें- क्यों MGNREGA से बेहतर है नया विधेयक
VB–G Ram G Bill 2025: सरकार 'महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम' (MGNREGA) को निरस्त करने और इस संबंध में एक नया कानून बनाने के लिए लोकसभा में विधेयक ला सकती है। नए कानून का नाम 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल, 2025' होगा
MGNREGA : केंद्र सरकार संसद में 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल, 2025' पेश करने जा रही है
VB–G Ram G Bill 2025: कई दशकों से मजदूरी-आधारित रोजगार कार्यक्रम भारत की ग्रामीण विकास रणनीति का एक अभिन्न घटक रहे हैं। ये अपर्याप्तरोजगारऔरआजीविकाअसुरक्षाकासामनाकररहेग्रामीणपरिवारोंकोआयसहायताप्रदानकरतेरहेहैं। समयकेसाथ, ग्रामीणअर्थव्यवस्थामेंविस्तारितसामाजिकसंरक्षण (expanded social protection), भौतिकएवंडिजिटलकनेक्टिविटी में सुधार, वित्तीय समावेशन में वृद्धि (enhancedfinancialinclusion) तथा आजीविकाओं के विविधीकरण (diversificationoflivelihoods) के कारण उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ है।
इन परिवर्तनों के परिणामस्वरूप, मौजूदा ग्रामीण रोजगार ढांचे का पुनर्संरेखण (recalibration) आवश्यक हो गया है, ताकि इसे समकालीन आवश्यकताओं एवं आकांक्षाओं तथा 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप बनाया जा सके। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु, वैधानिक रोजगार गारंटी को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन किए जाने का प्रस्ताव है, जिससे आजीविका गारंटी ढांचे को और सुदृढ़ किया जा सके।
यह बढ़ी हुई गारंटी ग्रामीण विकास की तीव्र गति को समर्थन देने, अधिक आय सुरक्षा प्रदान करने तथा विस्तारित रोजगार अवसरों के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को सशक्त बनाने के लिए अभिप्रेत (intended) है। 'Viksit Bharat- Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin): VB- G RAM G (विकसित भारत- जी राम जी) विधेयक, 2025' को पेश करने का प्रस्ताव है, ताकि विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप उत्पादकता, कंवर्जेंस, लचीलापन (resilience) तथा सतत परिसंपत्ति सृजन (sustainable asset creation) के साथ आजीविका सुरक्षा को एकीकृत करने वाला एक भविष्य-तैयार ग्रामीण विकास ढांचा स्थापित किया जा सके।
क्या है प्रस्ताव?
अधिनियम के अंतर्गत प्रत्येक ऐसे ग्रामीण परिवार को, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से तैयार हों। उन्हें प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी-आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी प्रदान की जाएगी। अधिनियम के अंतर्गत किए जाने वाले सभी कार्योंको विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचनास्टैक (Viksit Bharat National Rural Infrastructure Stack) में समेकित किया जाएगा। इसमें जल सुरक्षा, मुख्य ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका-संबंधित परिसंपत्तियां तथा अत्यधिक मौसम घटनाओं के शमन हेतु किए जाने वाले कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
कार्यों की योजना विकसित ग्राम पंचायत योजना के माध्यम से की जाएगी, जिन्हें ग्राम पंचायतों द्वारा तैयार किया जाएगा। पीएम गति-शक्ति सहित राष्ट्रीय स्थानिक योजना प्रणालियों (national spatialplanning systems) के साथ एकीकृत किया जाएगा। साथ ही वस्तुनिष्ठ मानकों के आधार पर पंचायतों की भिन्न-भिन्न विकासात्मक आवश्यकताओं को विधिवत ध्यान में रखा जाएगा।
बढ़ी हुई रोजगार गारंटी तथा कृषि के चरम मौसमों (peak agricultural seasons) के दौरान कृषि श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, अधिनियम राज्यों को यह अधिकार प्रदान करता है कि वे एक वित्तीय वर्ष में कुल मिलाकर 60 दिनों की अवधि अधिसूचित कर सकें। ये बुवाई एवं कटाई के मौसम को आच्छादित करेगी, जिसके दौरान इस अधिनियम के अंतर्गत कार्यों का निष्पादन नहीं किया जाएगा।
इस अधिनियम के अंतर्गत योजना को केंद्रीय प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) के रूप में कार्यान्वित किया जाएगा। केंद्र सरकार नियमों में निर्धारित वस्तुनिष्ठ एवं पारदर्शी मानकों के आधार पर राज्यों को मानक आवंटन (Normative Allocation) करेगी, और स्वीकृत Normative Allocation से अधिक होने वाला कोई भी व्यय संबंधित राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
प्राकृतिक आपदाओं या अन्य असाधारण परिस्थितियों के दौरान, केंद्र सरकार द्वारा निर्णयानुसार समय पर प्रतिक्रिया एवं राहत सुनिश्चित करने हेतु विशेष शिथिलताएं प्रदान की जा सकती हैं। अधिनियम पारदर्शिता एवं जवाबदेही पर विशेष बल देता है। इसके लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, स्थानिक तकनीक-आधारित योजना (spatial technology-enabled planning), मोबाइल एवं डैशबोर्ड-आधारित निगरानी, साप्ताहिक सार्वजनिक प्रकटीकरण (weekly public disclosures) तथा सुदृढ़ सोशलऑडिट तंत्र को अपनाया जाएगा।
संस्थागतपर्यवेक्षण सुनिश्चित करने हेतु केंद्र स्तर पर Central Rozgar Guarantee Council का गठन किया जाएगा। राज्य स्तर पर अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा, निगरानी एवं मूल्यांकन के लिए State Rozgar Guarantee Council का गठन कियाजाएगा। Normative Allocation, कंवर्जेंस एवं अन्य संबंधित विषयों पर अनुशंसा करने हेतु राष्ट्रीय स्तर पर स्टीयरिंग समिति (National-level Steering Committee) तथा उसके अनुरूप राज्य स्तर पर स्टीयरिंग समितियाँ (State-level Steering Committees) गठित की जाएंगी।
अकुशल शारीरिक श्रम के लिए मजदूरी दरें केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित की जाएंगी। जब तक पृथक दरें अधिसूचित नहीं की जातीं, तब तक महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत लागू मजदूरी दरें ही जारी रहेंगी। प्रत्येक राज्य सरकार, अधिनियम के प्रारंभ की तिथि से छह माह के भीतर अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी करने हेतु एक योजना तैयार कर अधिसूचित करेगी। जहां पात्र आवेदक को निर्धारित अवधि के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, वहां राज्य सरकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार बेरोजगारी भत्ता का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगी।
अन्य बड़ी बातें
विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप ग्रामीण विकास ढांचा भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में विस्तारित सामाजिक संरक्षण, बेहतर कनेक्टिविटी, अधिक वित्तीय समावेशन, गहरी डिजिटल पैठ (deeper digital penetration) तथा आजीविकाओं के विविधीकरण के कारण उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ है।
इन परिवर्तनों के कारण एक उन्नत ग्रामीण विकास ढांचे की आवश्यकता है, ताकि वह समकालीन आवश्यकताओं तथा विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप हो। Viksit Bharat - Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) : VB- G RAM G (विकसित भारत – जी राम जी) अधिनियम एक परिवर्तनकारी ग्रामीण विकास ढांचा स्थापित करता है, जो आजीविका सुरक्षा को सुदृढ़ करता है तथा ग्रामीण विकास की तीव्र गति को समर्थन देता है।
यह अधिनियम आजीविका गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करता है, जिससे प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ग्रामीण परिवारों को अधिक रोजगार अवसरों के माध्यम से सशक्त बनाया जाता है। यह सशक्तिकरण (empowerment), विकास (growth), कंवर्जेंस (convergence)तथासेचूरेशन (saturation) को बढ़ावा देता है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि ग्रामीण विकास के प्रयास व्यापक, समावेशी (inclusive) एवं परिणामोन्मुख (outcome-oriented) हों। पूर्व में, एकल एवं एकीकृत योजना प्रणाली के अभाव में मंत्रालय, विभाग एवं योजनाएं पृथक-पृथक रूप से कार्य करती थीं, जिसके परिणामस्वरूप खंडित (fragmented) एवं योजना-प्रेरित (scheme-driven) प्रावधान सामने आते थे।
नए ढांचे के अंतर्गत, पीएम गति-शक्ति से एकीकृत spatial technology का उपयोग कर तैयार की गई विकसित ग्राम पंचायत योजनाएं (VGPPs) योजना का आधार बनेंगी। इन VGPPs को समेकित कर विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचनास्टैक (VB-NRIS) का गठन किया जाएगा, जो सभी कार्यों के लिए एकीकृत मंच प्रदान करेगा। सभी कार्यों में जल-सुरक्षा एवं जलवायु-लचीली परिसंपत्तियों (climate-resilient assets), मुख्य ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका-संबंधित अवसंरचना तथा अत्यधिक मौसम घटनाओं के शमन हेतु किए गए कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
यह ढांचा अनेक पूरक सरकारी योजनाओं को एकीकृत समग्र-सरकार (whole-of-government) ग्रामीण विकास संरचना में समाहित करता है। शासन प्रणालियों का आधुनिकीकरणबायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, मोबाइल-आधारित निगरानी, वास्तविक-समय डैशबोर्ड, AI-सक्षम विश्लेषण, नागरिक सहभागिता मंच तथा सुदृढ़ सोशलऑडिट अंकेक्षण तंत्र के माध्यम से किया जाएगा। ये सभी उपाय मिलकर एक आधुनिक, एकीकृत एवं technologically enabled ग्रामीण विकास ढांचा निर्मित करते हैं, जो विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के पूर्णतः अनुरूप है तथा एक समृद्ध, लचीले (resilient) एवं भविष्य-तैयार (future-ready) ग्रामीण भारत के निर्माण हेतु अभिकल्पित (designed) है।
मिशन विकसित भारत
विकसित भारत @2047 के अनुरूप सुदृढ़ वैधानिक आजीविका गारंटी विकसित भारत @2047 की परिकल्पना एक ऐसे ग्रामीण विकास ढांचे की अपेक्षा करती है जो समग्र, एकीकृत तथा सेचूरेशनमोड में विकास प्रदान करने में सक्षम हो। इसके लिए पूरक सरकारी योजनाओं के मध्य सशक्त कंवर्जेंस तथा समग्र-सरकार दृष्टिकोण (whole-of-government framework) की आवश्यकता है, जिससे योजना एवं क्रियान्वयन सुसंगत, भविष्य-उन्मुख (future-oriented) तथा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप हो सकें। यह दृष्टिकोण ग्रामीण विकास की तीव्र गति को समर्थन देता है।
ग्रामीण परिवारों की बदलती आकांक्षाओं का उत्तर देता है तथा परिसंपत्तियों के शीघ्र सृजन के माध्यम से अधिक रोजगार अवसरों का निर्माण करता है। इस विस्तारित ढांचे के अंतर्गत आजीविका सुरक्षा (livelihood security) को सुदृढ़ करने हेतु, यह अधिनियम प्रत्येक वित्तीय वर्ष में वैधानिक मजदूरी-आधारित रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करता है। यह प्रावधान रोजगार के अवसरों में वृद्धि करता है, आय सुरक्षा को सुदृढ़ करता है तथा ग्रामीण परिवारों को तीव्र ग्रामीण विकास परिदृश्य (accelerated rural development scenario) में अधिक प्रभावी सहभागिता का अवसर प्रदान करता है।
बढ़ी हुई गारंटी का आधार उत्पादक एवं टिकाऊ ग्रामीण परिसंपत्तियों का सृजन है, जिसमें जल-सुरक्षा (water security), जलवायु-लचीली परिसंपत्तियां (climate-resilient assets), मुख्य ग्रामीण अवसंरचना (core rural infrastructure), आजीविका-संबंधित अवसंरचना (livelihood-related infrastructure) तथा अत्यधिक मौसम घटनाओं के शमन (mitigation of extreme weather events) हेतु कार्यों को प्राथमिकता दी जाती है। ये कार्य दीर्घकालिक लचीलापन (long-term resilience) सुनिश्चित करते हुए ग्रामीण विकास में प्रत्यक्ष योगदान करते हैं।
Saturation-based planning), कंवर्जेंस तथा समग्र-सरकार ग्रामीण विकास संरचना (whole-of-government rural development architecture) को 125-दिवसीय रोजगार गारंटी से जोड़कर, यह अधिनियम यह सुनिश्चित करता है कि ग्रामीण भारत सशक्त, लचीला (resilient) तथा विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के पूर्णतः अनुरूप हो, और ग्रामीण परिवार विकास
प्रक्रिया में अधिक सार्थक सहभागिता कर सकें।
कृषि के चरम मौसमों के दौरान कृषि श्रम की उपलब्धता सुनिश्चित करना Viksit Bharat - Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) : VB- G RAM G (विकसित भारत – जी राम जी) अधिनियम के अंतर्गत बढ़ी हुई आजीविका गारंटी को कृषि की आवश्यकताओं के साथ सामंजस्य में कार्य करना आवश्यक है। क्योंकि कृषि आज भी ग्रामीण आजीविका का एक प्रमुख स्रोत बनी हुई है।
ग्रामीण श्रमशक्ति के लिए बढ़ी हुई मजदूरी-आधारित रोजगार गारंटी के परिप्रेक्ष्य में, विशेषकर कृषि के चरम मौसमों (peak agricultural seasons) के दौरान कृषि श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। समय पर बुवाई एवं कटाई ग्रामीण उत्पादकता के केंद्र में हैं। इन अवधियों में पर्याप्त श्रम उपलब्धता किसानों के लिए अत्यावश्यक है।
अधिनियम राज्यों को यह अधिकार प्रदान करता है कि वे अग्रिम रूप से एक वित्तीय वर्ष में कुल मिलाकर 60 दिनों की अवधि अधिसूचित करें, जो बुवाई एवं कटाई के चरम मौसमों को आच्छादित करेगी। इसके दौरान इस अधिनियम के अंतर्गत कार्यों का निष्पादन नहीं किया जाएगा। इस प्रावधान से यह सुनिश्चित होता है कि कृषि कार्यों हेतु आवश्यक श्रम उस समय उपलब्ध रहे जब उसकी मांग सर्वाधिक होती है, जिससे ग्रामीण परिवार अपनी आजीविका आवश्यकताओं और कृषि दायित्वों दोनों को संतुलित रूप से पूरा कर सकें।
यह संतुलित दृष्टिकोण ग्रामीण समुदायों को 125-दिवसीय मजदूरी-आधारित रोजगार गारंटी का लाभ प्रदान करता है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करता है कि कृषि अपनी सर्वाधिक श्रम-गहन अवधियों (most labour-intensive periods) में श्रम की कमी से प्रभावित न हो। अधिनियम राज्यों को स्थानीय आवश्यकताओं एवं क्षेत्र-विशिष्ट कृषि गतिविधियों के अनुरूप ऐसी अवधि अधिसूचित करने का लचीलापन (flexibility) प्रदान करता है। यह तंत्र आजीविका सुरक्षा को सुदृढ़ करते हुए कृषि प्रणाली को व्यावहारिक एवं उत्तरदायी ढंग से Support करता है।
केंद्र सरकार द्वारा, राज्य सरकार से परामर्श के उपरांत, कंवर्जेंस एवं सेचूरेशन आधारित प्लानिंग के प्रयोजनार्थ अधिसूचित की जाने वाली सभी केंद्रीय, राज्य अथवा स्थानीय योजनाओं को VGPPs पर आधारित एकीकृत योजना प्रक्रिया के अंतर्गत लाया जाएगा। निर्धारित कार्यप्रणाली के अनुसार पंचायती राज प्रणाली के प्रत्येक स्तर पर एक संगठित एवं सहभागी योजना अभ्यास (systematic and participatory planning exercise) किया जाएगा। VGPPs को ग्राम पंचायतों द्वारा GIS-आधारित उपकरणों, पीएम गति-शक्ति लेयर्स तथा अन्य डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (digital public infrastructure) का उपयोग करते हुए तैयार किया जाएगा और अनुमोदन हेतु ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
मध्यवर्ती पंचायत (ब्लॉक), जिला पंचायत अथवा अन्य क्रियान्वयन एजेंसियों द्वारा प्रस्तावित कार्यों को भी अपेक्षित outputs एवं परिणामों (outcomes) सहित संबंधित पंचायतों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। VGPPs कोप्रखंड (Block), जिला (District) तथा राज्य (State) स्तर पर समेकित किया जाएगा, ताकि क्षेत्रीय प्राथमिकताओं, व्यापक ग्रामीण विकास रणनीतियों (broader rural
development strategies) तथा सेचूरेशन आधारित प्लानिंग के साथ सामंजस्य सुनिश्चित किया जा सके और सभी ग्राम पंचायतों में पात्र परिसंपत्तियों एवं परिणामों का समग्र आच्छादन (comprehensive coverage) होसके।
VGPPs के सभी कार्यों को विकसित भारत-राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचनास्टैक (VB-NRIS) में एकीकृत किया जाएगा, जिससे समग्र-सरकार (Whole on Government) ग्रामीण विकास ढांचे के अंतर्गत ग्रामीण सार्वजनिक कार्यों के लिए एक एकल एवं एकीकृत मंच निर्मित होगा। प्रत्येक ग्राम पंचायत, अपने वर्गीकरण (classification)-जैसे श्रेणी A, B, C आदि के आधार पर सेचूरेशन मोडप्लानिंग तैयार करेगी, जो शहरी क्षेत्रों की निकटता सहित विकास मानकों पर आधारित होंगी, ताकि पंचायतों की भिन्न आवश्यकताओं का समाधान किया जा सके। ऐसे सभी कार्य केवल पीएम गति-शक्ति, GIS-आधारित उपकरणों एवं अन्य डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का उपयोग कर तैयार की गई स्वीकृत VGPPs से ही लिए जाएंगे।
VGPPs में चिन्हित कार्यों को कंवर्जेंस के माध्यम से विभिन्न केंद्रीय, राज्य एवं स्थानीय योजनाओं के अंतर्गत निष्पादित किया जाएगा। और ऐसी कंवर्जेंस हेतु अपनाई जाने वाली योजनाओं को केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकार से परामर्श कर अधिसूचित किया जाएगा। इस एकीकृत योजना प्रक्रिया, सभी कार्यों के VB-NRIS में समावेशन तथा समग्र-सरकार (whole on governance) दृष्टिकोण के अंतर्गत योजनाओं के कंवर्जेंस के माध्यम से, यह अधिनियम विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप एक समग्र, संरेखित (aligned) एवं भविष्य-तैयार ग्रामीण विकास ढांचा स्थापित करता है।
कार्यों का विषयगत प्राथमिकता निर्धारण
भारत @2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप उत्पादक एवं टिकाऊ ग्रामीण परिसंपत्तियों के सृजन की ओर ले जाए। विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं (VGPPs) के माध्यम से चिन्हित सभी कार्यों को विकसित भारत– राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचनास्टैक (VB-NRIS) में एकीकृत किया जाता है, जिससे एक सुसंगत (coherent) एवं एकीकृत ग्रामीण अवसंरचना ढांचा निर्मित होता है। अधिनियम चार विषयगत क्षेत्रों (thematic areas) को प्राथमिकता देता है। जल-सुरक्षा हेतु जल संबंधी कार्य, जिनमें संरक्षण, सिंचाई, भू-जल पुनर्भरण, जल-स्रोतों का पुनर्जीवन, वाटरशेड विकास, वनीकरण आदि पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल-सुरक्षा सुदृढ़ हो सके।
मूलभूत ग्रामीण अवसंरचना में ग्रामीण सड़कों, सार्वजनिक भवनों, विद्यालय अवसंरचना, स्वच्छता प्रणालियों, नवीकरणीय ऊर्जा सुविधाओं, केंद्र सरकार की योजनाओं के अंतर्गत आवास निर्माण आदि आवश्यक नागरिक, सामाजिक और सेवा प्रदायपरिसंपत्तियां शामिल हैं। ये परिसम्पत्तियां बेहतर मूलभूत सुविधाओं और सेवाओं तक सुगम पहुंच सुनिश्चित करती हैं। आजीविका-संबंधित अवसंरचना में कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, भंडारण, बाज़ार, कौशल विकास, चक्रिय अर्थव्यवस्था (सर्कुलरइकॉनोमी) मॉडल आदि से जुड़ी उत्पादक परिसंपत्तियां शामिल हैं, जो सतत आजीविका (Sustainable Livelihoods), मूल्य संवर्धन और ग्रामीण आय के विविध अवसरों को समर्थन प्रदान करती हैं।
प्रतिकूल मौसमीय घटनाओं से संबंधित विशेष कार्यों जैसा आश्रय केंद्रों, तटबंधों, बाढ़ प्रबंधन संरचनाओं, पुनर्वास कार्यों, वनाग्नि प्रबंधन (Wildfire Management) आदि के माध्यम से द्वारा आपदा प्रबंधन की तैयारियों और जलवायु अनुकूलन को सुदृढ़ किया जाता है, जिससे जलवायु अनुकूल गाँवों के निर्माण में योगदान मिलता है। इस विषयगतफोकस के माध्यम से अधिनियम यह सुनिश्चित करता है कि सार्वजनिक कार्य जल-सुरक्षा को सुदृढ़ करें, मुख्य ग्रामीण प्रणालियों को मजबूत बनाएं, आजीविका के अवसरों का विस्तार करें तथा लचीलापन निर्मित करें, जिससे विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप सशक्तिकरण, विकास, अभिसरण एवं संतृप्ति को बल मिले।
अधिनियम के अंतर्गत, केंद्र सरकार वस्तुनिष्ठ मानकों (objective parameters) के आधार पर प्रत्येक राज्य को मानक आवंटन करेगी। और इस आवंटन के निर्धारण हेतु विस्तृत कार्यप्रणाली, संकेतक (indicators) तथा प्रक्रियात्मक आवश्यकताएं (procedural requirements) नियमोंमें निर्धारित की जाएंगी। केंद्र सरकार द्वारा Normative Alocationस्वीकृत किए जाने के पश्चात, राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि इस आवंटन का जिलों एवं ग्राम पंचायतों के मध्य समान, आवश्यकता-आधारित एवं पारदर्शी अंतः-राज्य वितरण किया जाए।
इस वितरण में ग्राम पंचायतों के वर्गीकरण- जैसे श्रेणी A, B, C आदि- को ध्यान में रखा जाएगा, जो शहरी क्षेत्रों की निकटता सहित विकास मानकों पर आधारित होगा, तथा स्थानीय आवश्यकताओं (local needs) के आकलन के आधार पर ग्राम पंचायत-वार एवं जिला-वार आवंटन निर्धारित किया जाएगा।
ऐसे अंतः-राज्य वितरण की विस्तृत कार्यप्रणाली एवं मानक अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियमों में निर्धारित किए जाएंगे। यह नियम-आधारित दृष्टिकोण निधि वितरण में समानता (equity), पारदर्शिता (transparency) एवं जवाबदेही (accountability) को सुदृढ़ करता है। यह सेचूरेशन मोड़ योजना को समर्थन देता है, कंवर्जेंस को बढ़ाता है तथा वित्तीय संसाधनों को आधुनिक, एकीकृत ग्रामीण विकास ढांचे की आवश्यकताओं के अनुरूप संरेखित करता है।
स्वीकृत मानक आवंटन (Normative Allocation) से अधिक किया गया व्यय संबंधित राज्य सरकार की जिम्मेदारी होगा, जिससे संसाधनों का कुशल उपयोग, बेहतर योजना तथा सुदृढ़ वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा मिलेगा। इससे यह सुनिश्चित होता है कि संसाधन जल-सुरक्षा, मुख्य ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका-संबंधित अवसंरचना तथा अत्यधिक मौसम घटनाओं के शमन हेतु टिकाऊ परिसंपत्तियों की ओर प्रभावी रूप से प्रवाहित हों।
अधिनियम के अंतर्गत शासन ढांचे में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, मोबाइल-आधारित निगरानी, spatial-technology-enabled planning, real-time dashboards, AI-enabled analytics तथा नागरिक सहभागिता मंच का प्रावधान किया गया है। ये प्रणालियां श्रमिकों, कार्मिकों एवं लेन-देन (transactions) का सटीक सत्यापन सुनिश्चित करती हैं। साथ ही निगरानी को सुदृढ़ करती हैं तथा समय पर रिपोर्टिंग एवं सुधारात्मक कार्रवाई को सक्षम बनाती हैं।
इसमें साप्ताहिक प्रकटीकरण प्रणाली (weekly disclosuresystem) स्थापित की जाएगी, जिसके अंतर्गत कार्य की प्रगति से संबंधित सभी पहलुओं जैसे श्रम, सामग्री, कार्य की अवस्था (stage of the work) आदि — को पंचायत के प्रमुख स्थलों (prominent locations) पर भौतिक एवं डिजिटल माध्यमों से जनता के समक्ष प्रदर्शित किया जाएगा। एक सुदृढ़ सोशलऑडिट इस संरचना का core part होगा, जो सामुदायिक सहभागिता (community participation) को बढ़ाता है।
साथ ही क्रियान्वयन के सभी चरणों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही को मजबूत करता है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय स्टीयरिंग समिति (National Level Steering Committee) तथा राज्य स्तर पर राज्य स्टीयरिंग समितियां (State Level Steering Committees) गठित की जाएंगी, जो अपने-अपने क्षेत्रों में अधिनियम के क्रियान्वयन की समीक्षा, निगरानी एवं मूल्यांकन करेंगी, जिससे समन्वित पर्यवेक्षण तथा समग्र-सरकार दृष्टिकोण सुनिश्चित हो सके।
इस आधुनिक, Technology-Enabled Governance Ecosystem को अंतर्निहित (embed) करके, अधिनियम पूर्वानुमेय सेवा प्रदाय (predictable service delivery) को सक्षम बनाता है। दोहराव (duplication) को कम करता है। परिसंपत्तियों की गुणवत्ता (quality of assets) में सुधार करता है। साथ ही सशक्तिकरण, विकास, कंवर्जेंस एवं सेचूरेशन को समर्थन देता है। यह संरचना सुनिश्चित करता है कि ग्रामीण भारत विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण की दिशा में अग्रसर होने हेतु आवश्यक प्रणालियों से सुसज्जित हो।