WhatsApp: प्राइवेसी और डेटा शेयरिंग को लेकर चल रहे विवाद में WhatsApp और इसकी पैरेंट कंपनी Meta ने सुप्रीम कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। दिग्गज टेक कंपनी ने अदालत को बताया कि वे विज्ञापन से संबंधित डेटा के लिए 'भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग' (CCI) के प्राइवेसी और सहमति संबंधी दिशा-निर्देशों को लागू करने के लिए तैयार है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए कंपनियों की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने इन नियमों पर रोक लगाने की मांग की थी।
यह मामला WhatsApp की प्राइवेसी पॉलिसी और डेटा शेयरिंग से जुड़ा है, जिस पर CCI ने कड़ी आपत्ति जताई थी। डेटा शेयरिंग के उल्लंघन को लेकर सीसीआई ने WhatsApp और मेटा पर ₹213.14 करोड़ का भारी जुर्माना लगाया था। आरोप था कि ये कंपनियां यूजर्स के डेटा का इस्तेमाल विज्ञापन और बाजार में एकाधिकार बनाने के लिए कर रही हैं। पिछले साल दिसंबर में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल(NCLAT) ने डेटा शेयरिंग पर पूरी तरह बैन तो हटा दिया था, लेकिन कड़े प्राइवेसी और यूजर की सहमति वाले नियमों को अनिवार्य कर दिया था। अब WhatsApp ने मान लिया है कि वह 16 मार्च तक इन दिशा-निर्देशों को पूरी तरह लागू कर देगा।
'डेटा शेयरिंग के नाम पर नागरिकों के हक से खिलवाड़ नहीं'
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टेक दिग्गजों को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने साफ कहा कि वह किसी भी कीमत पर देश के नागरिकों की निजता के साथ समझौता नहीं होने देगा। कोर्ट ने उन 'साइलेंट कस्टमर्स' का जिक्र किया जो तकनीक पर निर्भर तो हैं, लेकिन डेटा शेयरिंग की जटिलताओं से अनजान हैं। कोर्ट ने इसे 'निजी जानकारी की चोरी' तक कह डाला। सीजेआई ने कंपनियों से इन नियमों को लागू करने की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है और सीसीआई से कहा है कि वे कंपनियों के नए शपथ पत्र की जांच करें।
WhatsApp और मेटा अब विज्ञापन के लिए यूजर्स का डेटा साझा करने से पहले उनकी स्पष्ट सहमति लेंगे। कंपनियों को 16 मार्च तक यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी पॉलिसी भारतीय नियमों के अनुरूप है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही उन्होंने अभी स्टे देने से मना कर दिया है, लेकिन मुख्य अपील पर सुनवाई जारी रहेगी। यह फैसला उन करोड़ों भारतीयों के लिए राहत की खबर है जो अनजाने में अपना डेटा विज्ञापनों के लिए साझा कर देते थे।