पश्चिम बंगाल में बीजेपी से चुनाव हारने के कुछ ही हफ्तों बाद, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर भारी कलह मची हुई है। पार्टी के लिए अपने नेताओं को संभालना मुश्किल हो रहा है। खबर ये भी आ रही है कि तृणमूल के कम से कम 50 विधायक (MLAs) उन दो नेताओं के संपर्क में हैं, जिन्हें पार्टी ने कल बाहर का रास्ता दिखाया है।
इन दोनों नेताओं के नाम ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा हैं। इन्हें पार्टी के खिलाफ काम करने के आरोप में निकाला गया है। दरअसल, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक बड़ा खुलासा किया था कि इन दोनों नेताओं ने शिकायत की थी कि पार्टी ने उनके नकली दस्तखत (forged signatures) किए हैं।
मामला एक चिट्ठी से जुड़ा है, जिसमें तृणमूल के सीनियर नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विधानसभा में विपक्ष का नेता (Leader of Opposition) बनाने का समर्थन किया गया था। दोनों नेताओं का कहना था कि इस चिट्ठी पर उनके नकली साइन किए गए। उनकी इसी शिकायत पर विधानसभा सचिवालय ने पुलिस केस दर्ज कराया, जिसकी जांच अब CID कर रही है।
शुभेंदु अधिकारी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद, तृणमूल ने बनर्जी और साहा को पार्टी से निकाल दिया। इसके बाद से ही राजनीति के गलियारों में चर्चा तेज है कि तृणमूल के अंदर ही एक नया गुट बन गया है, जिसमें ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी शामिल नहीं हैं। NDTV ने एक रिपोर्ट सूत्रों के हवाले से बताया, इसी सिलसिले में करीब 50 तृणमूल विधायक कोलकाता के ईएम बाईपास के पास एक होटल में ऋतब्रत बनर्जी से मिले भी हैं।
यह पहली बार नहीं है जब ऋतब्रत बनर्जी को किसी पार्टी से निकाला गया है। 46 साल के इस नेता को 9 साल पहले CPM से भी निकाला जा चुका है। उस समय वे पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के काफी करीबी माने जाते थे।
सीपीएम ने 2014 में बनर्जी को राज्यसभा भेजा था, और उनका कार्यकाल 2020 तक था। लेकिन 2017 में पार्टी के खिलाफ जाने के आरोप में उन्हें निकाल दिया गया। इसके बाद अगले तीन साल वे बिना किसी पार्टी के राज्यसभा सांसद रहे।
फिर आरजी कर अस्पताल विवाद के बाद, जब जवाहर सरकार ने राज्यसभा सांसद के पद से बीच में ही इस्तीफा दे दिया, तो बनर्जी तृणमूल के टिकट पर बाकी बचे समय के लिए राज्यसभा पहुंचे। साल 2026 में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी उन्हें चुनावी मैदान में लाए और राज्य के विधानसभा चुनाव में टिकट दिया। वे तृणमूल की मजदूर यूनियन (INTTUC) के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
इस पूरे विवाद पर सोमवार को ममता बनर्जी ने उनके सीपीएम वाले दिनों को याद करते हुए कहा, "एक बिना सिद्धांतों वाला आदमी पहले CPM में था। उसे टिकट देना हमारी बड़ी भूल थी। वह हमारे पास गिड़गिड़ाते हुए आया था। सीपीएम ने तब उसे निकालकर बिल्कुल सही किया था, हमसे गलती हुई जो हमने उसे बचा लिया। ये लोग रोज बीजेपी से मिल रहे हैं और उन्हीं के इशारों पर नाच रहे हैं।"
बिना किसी का नाम लिए तृणमूल प्रमुख ने यह भी कहा, "इनमें एक सांसद (MP) भी शामिल है, जिसने अपने बेटे के लिए टिकट मांगा था।"
संदीपन साहा तृणमूल के पूर्व विधायक स्वर्णकमल साहा के बेटे हैं। साहा इससे पहले कोलकाता नगर निगम में काउंसलर (पार्षद) रह चुके हैं। उन्होंने 2026 के विधानसभा चुनावों में कोलकाता की एंटाली सीट से तृणमूल के टिकट पर चुनाव लड़ा था।