Who is Champat Rai: प्रोफेसर से राम मंदिर ट्रस्ट के पावरफुल सेक्रेटरी बनने तक, जानें चंदा चोरी विवाद के बाद इस्तीफा देने वाले चंपत राय की पूरी कहानी

Champat Rai Resigns Ram Mandir Trust: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव होने के साथ-साथ चंपत राय विश्व हिंदू परिषद (VHP) के उपाध्यक्ष भी हैं। राम मंदिर आंदोलन के सबसे मुखर चेहरों में शामिल चंपत राय की पृष्ठभूमि काफी दिलचस्प रही है। जानिए एक केमिस्ट्री टीचर से राम मंदिर ट्रस्ट के सबसे ताकतवर पद तक पहुंचने तक की उनकी पूरी कहानी

अपडेटेड Jun 26, 2026 पर 1:51 PM
अयोध्या में दान विवाद को लेकर FIR दर्ज होने से ठीक पहले वीएचपी की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई थी

Ram Mandir Donation Theft Controversy: अयोध्या राम मंदिर से जुड़ी एक बड़ी खबर आई है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक, राम मंदिर दान चोरी विवाद के तूल पकड़ने के बाद उन्होंने यह बड़ा कदम उठाया है।

इस विवाद को लेकर अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद (VHP) की एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-लेवल बैठक हुई, जिसके ठीक बाद चंपत राय के इस्तीफे की खबर आई। जानकारी के  मुताबिक, वीएचपी इस पूरे विवाद से संगठन की छवि को हो रहे नुकसान को लेकर बेहद चिंतित थी जिसे लेकर अब ये बड़ा फैसला सामने आया है।

आइए जानते हैं चंपत राय के इस्तीफे के पीछे की पूरी कहानी और एक केमिस्ट्री टीचर से राम मंदिर ट्रस्ट के सबसे ताकतवर पद तक पहुंचने का उनका पूरा सफरनामा।


क्यों देना पड़ा चंपत राय को इस्तीफा?

सूत्रों के अनुसार, अयोध्या में दान विवाद को लेकर FIR दर्ज होने से ठीक पहले वीएचपी की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा, निर्माण प्रभारी गोपाल राव के साथ-साथ वीएचपी के महासचिव बजरंग लाल बागरा और केंद्रीय संगठनात्मक सचिव मिलिंद परांडे समेत कई बड़े पदाधिकारी शामिल हुए थे।

इस बैठक में एसआईटी जांच और दान विवाद से उपजे हालातों पर गंभीर चर्चा हुई। चूंकि चंपत राय वीएचपी और राम मंदिर आंदोलन का एक बेहद प्रभावशाली चेहरा रहे हैं, इसलिए उनके इर्द-गिर्द खड़े हुए इस विवाद से संगठन की साख पर आंच आ रही थी। मामले में आरोपी टीनू यादव को चंपत राय का करीबी बताया जा रहा है, जबकि अन्य आरोपी लवकुश और अनुकल्प, अनिल मिश्रा के करीबी माने जा रहे हैं। इसी दबाव के बीच चंपत राय ने पद छोड़ने का फैसला किया।

कौन हैं चंपत राय? केमिस्ट्री टीचर से ट्रस्ट के महासचिव बनने का सफर

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव होने के साथ-साथ चंपत राय विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष भी हैं। राम मंदिर आंदोलन के सबसे मुखर चेहरों में शामिल चंपत राय की पृष्ठभूमि काफी दिलचस्प रही है।

चंपत राय का जन्म वर्ष 1946 में उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में हुआ था। वह बचपन के दिनों से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा से प्रभावित थे और संघ से जुड़ गए थे। उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र को चुना और बिजनौर के धामपुर में स्थित आश्रम डिग्री कॉलेज में केमिस्ट्री के प्रोफेसर बन गए।

साल 1975 में जब देश में आपातकाल लागू हुआ, तब चंपत राय को 1977 में उनके कॉलेज से ही गिरफ्तार कर लिया गया था। राम जन्मभूमि आंदोलन और संघ की गतिविधियों से जुड़ाव के कारण उन्हें 18 महीने तक जेल की सलाखों के पीछे गुजारने पड़े थे। जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने वापस कॉलेज जाने के बजाय पूरी तरह समाज सेवा और संगठन को अपना जीवन समर्पित कर दिया और साल 1980 में आधिकारिक रूप से वीएचपी में शामिल हो गए।

शंकराचार्य ने भी की थी हटाने की मांग, खड़ा हुआ था विवाद

यह पहली बार नहीं है जब चंपत राय विवादों या चर्चाओं में रहे हैं। राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के समय भी वह तब विवादों में आए थे जब उत्तर पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उन्हें महासचिव पद से हटाने की मांग की थी।

शंकराचार्य का तर्क था कि चंपत राय 'रामानंदी' संप्रदाय से नहीं आते हैं, इसलिए वह इस धार्मिक ट्रस्ट के प्रमुख या महासचिव पद पर रहने के योग्य नहीं हैं। उन्होंने ट्रस्ट पर रामानंदी संप्रदाय की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया था।

चंपत राय के इस्तीफे के बाद अब राम मंदिर ट्रस्ट के नए महासचिव को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। एसआईटी (SIT) इस समय दान चोरी मामले की बारीकी से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल केस में कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।