कौन है खुद को 'Ex मुस्लिम' कहने वाला सलीम वास्तिक? मार्शल आर्ट्स टीचर, 13 साल के बच्चे का कातिल, 26 साल से था फरार

Who is Salim Wastik: क्राइम ब्रांच की टीम पुराने भगोड़ों (PO) की तलाश कर रही थी। पुख्ता जानकारी और टेक्निकल सर्विलांस की मदद से पुलिस आखिरकार उस तक पहुंच गई। 1995 के रिकॉर्ड से मैच हुए। सलीम की कद-काठी और निशान उसी दोषी से मेल खा गए, जो अब तक फरार था

अपडेटेड Apr 25, 2026 पर 8:26 PM
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Salim Wastik: कौन है खुद को 'Ex मुस्लिम' कहने वाला सलीम वास्तिक? मार्शल आर्ट्स टीचर, 13 साल के बच्चे का कातिल, 26 साल से था फरार

यह किसी नेटफ्लिक्स सीरीज की स्क्रिप्ट जैसी लगती है, लेकिन हकीकत उससे भी कहीं ज्यादा डरावनी है। एक ऐसा कातिल जिसने खुद को 'कागजों पर मार डाला', पहचान बदली और 26 साल तक कानून की नाक के नीचे एक यूट्यूब सेलिब्रिटी बनकर घूमता रहा। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जब सलीम वास्तिक के चेहरे से नकाब हटाया, तो पीछे से 1995 का वो बेरहम हत्यारा निकला, जिसने एक मासूम के खून से अपने हाथ रंगे थे।

मार्शल आर्ट्स टीचर का काला सच

20 जनवरी 1995 की वो सुबह दिल्ली के एक कारोबारी परिवार के लिए कयामत बनकर आई। 13 साल का संदीप बंसल स्कूल के लिए निकला, पर घर नहीं लौटा। कुछ घंटों बाद एक भारी आवाज ने फोन पर दस्तक दी- "30 हजार का इंतजाम कर लो, वरना बेटा नहीं मिलेगा।"


पुलिस ने जब तफ्तीश शुरू की, तो शक की सुई संदीप के ही स्कूल के मार्शल आर्ट्स टीचर सलीम खान पर रुकी। सलीम ने कबूला कि उसने अपने साथी अनिल के साथ मिलकर महज कुछ हजार रुपयों के लिए संदीप का अपहरण किया और फिर उसकी हत्या कर लाश मुस्तफाबाद के नाले में फेंक दी।

'मौत' का नाटक और पहचान की चोरी

1997 में उम्रकैद हुई, लेकिन 2000 में पैरोल मिलते ही सलीम ने एक शातिर चाल चली। वह फरार हुआ और दुनिया की नजरों में खुद को 'मृत' घोषित करवा दिया।

सलीम खान अब सलीम वास्तिक बन चुका था। हरियाणा की गलियों से होता हुआ वह गाजियाबाद के लोनी में एक कपड़े का व्यापारी बन बैठा।

वह सिर्फ एक दुकानदार नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया पर एक 'एक्स-मुस्लिम यूट्यूबर' और एक्टिविस्ट बनकर सुर्खियां बटोरने लगा।

किस्मत का खेल और 15 लाख की डील

सलीम की कहानी इतनी फिल्मी हो चुकी थी कि एक फिल्म प्रोड्यूसर ने उसकी जिंदगी पर बायोपिक बनाने के लिए उसे 15 लाख रुपये का एडवांस तक दे दिया था। फरवरी 2026 में उस पर लोनी में जानलेवा हमला हुआ, जिसमें वह मरते-मरते बचा। तब शायद उसे लगा था कि उसका पुराना पाप दफन हो चुका है, लेकिन किस्मत ने पासा पलट दिया।

द क्लाइमेक्स: कैसे हुआ 'गेम ओवर'?

क्राइम ब्रांच की टीम पुराने भगोड़ों (PO) की तलाश कर रही थी। पुख्ता जानकारी और टेक्निकल सर्विलांस की मदद से पुलिस आखिरकार उस तक पहुंच गई। 1995 के रिकॉर्ड से मैच हुए। सलीम की कद-काठी और निशान उसी दोषी से मेल खा गए, जो अब तक फरार था।

पुलिस के लिए यह एक बड़ी कामयाबी है, क्योंकि सलीम को लगा था कि तीन दशक पुराने गुनाह और खुद को मरा हुआ साबित करने के बाद वह अब पूरी तरह आजाद है।

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