Shashi Tharoor: ईरान-US जंग में पाकिस्तान की मध्यस्थता से क्यों नाखुश हैं शशि थरूर? बताया 'शर्मनाक'
US-Iran Talks In Pakistan: पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच पाकिस्तान द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में मध्यस्थता की पेशकश किए जाने पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने नाखुशी जताई है। उन्होंने कहा कि इसमें भारत को एक अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें दोनों पक्षों के साथ अपने अच्छे संबंधों का लाभ उठाकर एक शांति पहल शुरू करनी चाहिए
US-Iran Talks In Pakistan: शशि थरूर ने कहा कि अगर पाकिस्तान में शांति वार्ता होती है, तो भारत का इससे कोई लेना-देना नहीं है
US-Iran Talks In Pakistan: सीनियर कांग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर ने गुरुवार (26 मार्च) को कहा है कि यह शर्मनाक है कि पाकिस्तान पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से जुड़े मध्यस्थता प्रयासों में एक अहम भूमिका निभा रहा है। उनका तर्क है कि भारत को इसमें एक अग्रणी कूटनीतिक स्थिति अपनानी चाहिए थी। दरअसल, कुछ अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ तुर्की और मिस्र के साथ मिलकर अमेरिका एवं ईरान के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए मध्यस्थता कर रहे हैं।
थरूर ने कहा कि उन्होंने इस संघर्ष पर भारत सरकार के संयमित सार्वजनिक रुख का समर्थन इस उम्मीद में किया था कि नई दिल्ली इस मौके का इस्तेमाल शांति पहलों को आगे बढ़ाने के लिए करेगी। शशि थरूर ने कहा, "अभी, यह कहते हुए दुख हो रहा है कि हालात बहुत अच्छे नहीं दिख रहे हैं। यह हम सभी के लिए थोड़ा शर्मनाक है।"
उन्होंने कहा, "मैंने इस ईरान युद्ध पर सरकार के संयम और चुप्पी का समर्थन करने का एक कारण यह था कि मुझे उम्मीद थी कि सरकार इसका इस्तेमाल शांति स्थापित करने के लिए एक जगह बनाने और शांति के लिए एक अग्रणी आवाज बनने के लिए करेगी, जैसा कि PM मोदी ने अक्सर कहा है कि भारत को होना चाहिए।"
कांग्रेस सांसद ने आगे कहा, "लेकिन विडंबना यह है कि हम देख रहे हैं कि पाकिस्तान ही तुर्की और मिस्र के साथ मिलकर मध्यस्थता के प्रयासों का नेतृत्व कर रहा है। मैं इस बात पर खुश नहीं हो सकता।" थरूर ने कहा कि वह इस बात की वकालत करते रहे हैं कि भारत को संबंधित पक्षों के बीच बातचीत को बढ़ावा देने के लिए अपने कूटनीतिक संबंधों का लाभ उठाना चाहिए।
थरूर ने कहा, "देखिए, अगर पाकिस्तान में शांति वार्ता होती है, तो भारत का उससे कोई लेना-देना नहीं है। मैं लगभग तीन हफ़्तों से यह मांग कर रहा हूं कि भारत एक अग्रणी रुख अपनाए। भारत दोनों पक्षों के साथ अपने अच्छे संबंधों का लाभ उठाकर एक शांति पहल करे।"
कांग्रेस सांसद ने कहा, "अब जाहिर तौर पर पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की ने ऐसा कर दिखाया है। उन्हें शुभकामनाएं। हम सभी शांति चाहते हैं। लेकिन भारत को इसका कोई श्रेय नहीं मिलेगा। जबकि शांति वार्ता पाकिस्तान आयोजित कर रहा है।"
सरकार ने पाकिस्तना को बताया 'दलाल देश'
सरकार ने बुधवार (25 मार्च) को सर्वदलीय बैठक में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत में इस बात पर जोर दिया कि पश्चिम एशिया में युद्ध जल्द खत्म होना चाहिए क्योंकि इससे सभी को नुकसान हो रहा है। सूत्रों का कहना है कि सरकार ने पश्चिम एशिया संघर्ष में कथित मध्यस्थता के संदर्भ में पाकिस्तान को ‘‘दलाल’’ राष्ट्र करार दिया।
सूत्रों के अनुसार, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बैठक में कहा कि इस मामले में पाकिस्तान के मध्यस्थता प्रयासों में कुछ भी नया नहीं है, क्योंकि उस देश का 1981 से अमेरिका द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है। यह जानकारी मिली है कि जयशंकर ने पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा के लिए संसद परिसर में बुलाई गई बैठक में उपस्थित नेताओं से कहा, "हम दलाल राष्ट्र नहीं हैं।"
सूत्रों के अनुसार, सरकार ने विपक्ष के इस आरोप का खंडन किया कि भारत सरकार इस मामले पर चुप है। उन्होंने कहा, "हम टिप्पणी कर रहे हैं और जवाब दे रहे हैं।" सरकार का पक्ष था कि जब ईरान दूतावास खोला गया, तो विदेश सचिव ने तुरंत वहां दौरा किया। साथ ही शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने पर जल्द शोक व्यक्त न करके नैतिक कमजोरी दिखाई है। बताया जाता है कि सरकार ने राजनीतिक दलों को यह भी सूचित किया है कि उसकी मुख्य चिंता खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है। उस संबंध में सरकार ने कहा कि वह अब तक सफल रही है।
VIDEO | On Pakistan offering to mediate US-Iran peace talks amid the West Asia conflict, Congress leader Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) says, "Look, if there are peace talks in Pakistan, India has nothing to do with it. I have been calling for almost three weeks now for India to… pic.twitter.com/wUDj1I0M8Y
पश्चिम एशिया संकट पर सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के बाद विपक्ष ने कहा कि इस मामले से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सरकार का जवाब संतोषजनक नहीं था। उन्होंने यह मांग फिर दोहराई कि लोकसभा में नियम 193 और राज्यसभा में नियम 176 के तहत पश्चिम एशिया संकट को लेकर चर्चा होनी चाहिए।
संसद भवन परिसर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में सरकार की तरफ से गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू शामिल हुए।