मिडिल ईस्ट में चल रही लड़ाई की वजह से भारत में गैस की किल्लत जारी है। 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज', जहां से हमारे देश की ज्यादातर गैस आती है, उस रास्ते के बंद होने से भारत को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, सरकार अब रूस और अफ्रीका से गैस मंगाने की कोशिश कर रही है, लेकिन दूर से सामान मंगाने में किराया बहुत महंगा पड़ रहा है, इसीलिए दाम कम नहीं हो रहे और LPG गैस की दिक्कत आम लोगों के बीच बढ़ती जा रही है। इस संकट का असर अब कीमतों पर भी दिखने लगा है। 14.2 किलो वाला घरेलू LPG सिलेंडर करीब 60 रुपये तक महंगा हो गया है। ऐसे में एक पुराना सवाल फिर सामने आया है कि आखिर सिलेंडर का वजन 14.2 किलो ही क्यों तय किया गया है।
LPG सिलेंडर का वजन 14.2kg ही क्यों है तय
दरअसल, यह मानक 1950 के दशक के अंत से चला आ रहा है, जब ‘बर्मा शेल’ (जो आज भारत पेट्रोलियम के नाम से जाना जाता है) ने भारत में पहली बार LPG की शुरुआत की थी। उस समय सिलेंडर का कोई तय आकार नहीं था, बल्कि इसे प्रयोग और अनुभव के आधार पर तय किया गया। धीरे-धीरे 14.2 किलो का वजन सबसे सही और सुविधाजनक माना गया, इसलिए इसे पूरे देश में एक मानक के तौर पर अपनाया गया।
इस वजन को तय करने के पीछे सबसे बड़ा कारण इसकी सुविधा और आसानी है। एक भरा हुआ LPG सिलेंडर, जिसमें धातु का खोल भी शामिल होता है, करीब 29–30 किलो का होता है। यह वजन घर में इस्तेमाल करने वालों और डिलीवरी करने वाले कर्मचारियों—दोनों के लिए संभालना आसान माना गया है। अगर इसमें ज्यादा गैस भरकर इसे 15 किलो का बना दिया जाता, तो सिलेंडर और भारी हो जाता। ऐसे में उसे उठाना और एक जगह से दूसरी जगह ले जाना काफी मुश्किल हो जाता, खासकर तब जब ज्यादातर काम हाथों से ही किया जाता है।
घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखकर भी 14.2 किलो का वजन तय किया गया था। माना गया कि एक आम परिवार के लिए इतना LPG करीब 30 से 45 दिनों तक खाना बनाने के लिए काफी होता है। इससे लोगों को बार-बार सिलेंडर भरवाने की जरूरत नहीं पड़ती और गैस जल्दी खत्म भी नहीं होती। इसके अलावा, सुरक्षा भी एक बड़ा कारण था। LPG को सिलेंडर में बहुत दबाव के साथ भरा जाता है, इसलिए अंदर थोड़ी खाली जगह रखना जरूरी होता है ताकि गैस फैल सके। अगर सिलेंडर में जरूरत से ज्यादा गैस भर दी जाए, तो यह खतरनाक हो सकता है या फिर सिलेंडर को ज्यादा मोटा और भारी बनाना पड़ेगा। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञों ने 14.2 किलो को सबसे सुरक्षित और सही मात्रा माना।
LPG की बनावट भी इसके तय वजन का एक कारण है। यह गैस दो तत्वों—प्रोपेन और ब्यूटेन—को मिलाकर बनाई जाती है और मौसम के अनुसार इनका अनुपात बदलता रहता है। इससे सिलेंडर के अंदर दबाव भी बदलता है। ऐसे में 14.2 किलो की मात्रा रखने से सिलेंडर के अंदर पर्याप्त खाली जगह बनी रहती है, जिससे दबाव में होने वाले इन बदलावों को सुरक्षित तरीके से संभाला जा सके।