Monsoon 2026: मौसम विभाग ने बताया किन 5 बड़े कारण से थमी मानसून की रफ्तार, क्या किसानों के लिए है ये चिंता की बात?
Monsoon 2026: देश में मानसून की रफ्तार अचानक धीमी पड़ गई है। जून में बारिश सामान्य से 43% कम दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने इसके पीछे 5 बड़ी वजहें बताई हैं। जानिए किसानों, खरीफ फसलों और पानी की उपलब्धता पर इसका क्या असर पड़ सकता है।
मानसून को नमी पहुंचाने में हिंद महासागर की भी अहम भूमिका होती है।
Monsoon 2026: इस साल मानसून की शुरुआत तो अच्छी रही, लेकिन अब इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई है। मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, 22 जून तक देश में सामान्य से करीब 43% कम बारिश हुई है। मानसून फिलहाल दक्षिण महाराष्ट्र के आसपास अटका हुआ है। इसका असर मध्य भारत, पूर्वोत्तर, दक्षिण भारत और उत्तर-पश्चिम भारत के कई इलाकों में दिख रहा है, जहां बारिश उम्मीद से काफी कम हुई है।
यह स्थिति किसानों के लिए चिंता बढ़ाने वाली है, क्योंकि खरीफ फसलों की बुआई का यही सबसे अहम समय होता है। अगर बारिश में ज्यादा देरी होती है, तो खेती और पानी की उपलब्धता दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
कितनी कम हुई है बारिश?
IMD के मुताबिक, 20 जून तक देश में सिर्फ 45.6 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। इस समय तक सामान्य तौर पर 84.4 मिमी बारिश होनी चाहिए थी। यानी बारिश करीब 46% कम रही। 22 जून तक यह कमी थोड़ी घटकर 43% पर पहुंची।
यह तुलना लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) से की जाती है। आसान भाषा में कहें तो यह कई दशकों की औसत बारिश का आंकड़ा होता है।
आखिर मानसून आगे क्यों नहीं बढ़ रहा?
मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल मानसून के लिए जरूरी सही हालात नहीं बन रहे हैं। इसी वजह से मानसून की चाल धीमी पड़ गई है। IMD ने इसके पीछे पांच बड़ी वजहें बताई हैं।
1. अरब सागर से नमी कम आ रही है
मानसून को आगे बढ़ाने में अरब सागर की बड़ी भूमिका होती है। यहां से आने वाली नम हवाएं देश के अलग-अलग हिस्सों तक पानी पहुंचाती हैं और बारिश कराती हैं।
लेकिन इस समय अरब सागर से वैसी मजबूत नम हवाएं नहीं आ रही हैं। नतीजा यह है कि बादल कम बन रहे हैं और बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ गई हैं।
2. मानसूनी हवाएं कमजोर हो गई हैं
मौसम विभाग के मुताबिक, अरब सागर के ऊपर चलने वाली दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी हवाओं की ताकत कम हो गई है।
इसी वजह से महाराष्ट्र और उसके आसपास के अंदरूनी इलाकों तक पर्याप्त नमी नहीं पहुंच रही। जब नमी कम पहुंचेगी तो बादल भी कम बनेंगे और बारिश भी कम होगी।
3. हिंद महासागर से भी कम मिल रही मदद
मानसून को नमी पहुंचाने में हिंद महासागर की भी अहम भूमिका होती है। भूमध्य रेखा पार करके आने वाली हवाएं काफी मात्रा में नमी लेकर आती हैं।
लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में ये हवाएं भी कमजोर पड़ गई हैं। इसका असर पूरे देश की मानसूनी गतिविधियों पर दिखाई दे रहा है।
4. बारिश कराने वाले बड़े सिस्टम नहीं बन रहे
आमतौर पर कम दबाव का क्षेत्र, चक्रवाती परिसंचरण और दूसरे मौसमीय सिस्टम बनते हैं, जो मानसून को आगे बढ़ाने और अच्छी बारिश कराने में मदद करते हैं।
लेकिन फिलहाल अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में ऐसा कोई मजबूत सिस्टम नहीं बना है। यही वजह है कि मानसून की चाल थम सी गई है।
5. MJO भी कमजोर पड़ गया है
मेडन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) नाम का एक मौसमीय सिस्टम भी बारिश को प्रभावित करता है। जब यह सक्रिय रहता है तो दक्षिण भारत के ऊपर ज्यादा बादल बनते हैं और बाद में ये बादल मानसूनी हवाओं के साथ उत्तर भारत की तरफ बढ़ते हैं।
लेकिन फिलहाल MJO कमजोर स्थिति में है। इसका असर भी बारिश पर पड़ रहा है।
क्या अल नीनो भी बारिश कम कर रहा है?
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका असर भी दिख रहा है। IMD ने कहा है कि प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति बनी हुई है और मानसून के दौरान इसके और मजबूत होने की संभावना है।
अल नीनो के दौरान समुद्र का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इतिहास बताता है कि ऐसे समय भारत में मानसून अक्सर कमजोर पड़ जाता है। इसी वजह से बारिश कम होने की आशंका बढ़ जाती है।
IOD से भी नहीं मिल रही मदद
भारतीय महासागर द्विध्रुव यानी IOD फिलहाल तटस्थ स्थिति में है। इसका मतलब है कि यह न तो मानसून को मजबूत कर रहा है और न ही उसे कमजोर कर रहा है।
कई बार सकारात्मक IOD, अल नीनो के असर को कुछ हद तक कम कर देता है। लेकिन इस बार फिलहाल ऐसी कोई मदद नहीं मिल रही है।
किसानों की क्यों बढ़ रही परेशानी?
मानसून का रुकना ऐसे समय हुआ है, जब किसान धान, सोयाबीन, कपास, मक्का जैसी खरीफ फसलों की बुआई कर रहे हैं। इन फसलों को शुरुआती दौर में अच्छी बारिश की जरूरत होती है।
अगर आने वाले दिनों में बारिश नहीं बढ़ती, तो बुआई प्रभावित हो सकती है। जलाशयों में पानी कम जमा होगा और आगे चलकर सिंचाई पर भी असर पड़ सकता है। यही वजह है कि किसान, मौसम वैज्ञानिक और सरकार सभी आने वाले हफ्तों की बारिश पर नजर बनाए हुए हैं।