बिगड़ती सेहत या कुछ और? साढ़े तीन महीने पहले ली CM पद की शपथ, फिर क्यों बिहार की राजनीति को अलविदा कह रहे नीतीश कुमार!

Bihar: नीतीश कुमार के इस अचानक फैसले ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। JDU के अंदर और विपक्षी दलों में इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब उन्होंने हाल ही में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तो फिर कुछ ही महीनों में पद छोड़ने की जरूरत क्यों पड़ी

अपडेटेड Mar 05, 2026 पर 12:56 PM
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CM पद की शपथ लेने के महज साढ़े तीन महीने बाद बिहार की राजनीति को क्यों अलविदा कह रहे हैं नीतीश कुमार

बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। राज्य के वरिष्ठ नेता और जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार ने 20 नवंबर 2025 को रिकॉर्ड 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। लेकिन महज साढ़े तीन महीने बाद ही उन्होंने राज्य की सक्रिय राजनीति को अलविदा कहने का फैसला कर लिया है। अब वह राज्यसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं।

नीतीश कुमार के इस अचानक फैसले ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। JDU के अंदर और विपक्षी दलों में इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब उन्होंने हाल ही में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तो फिर कुछ ही महीनों में पद छोड़ने की जरूरत क्यों पड़ी।

सेहत को बताया जा रहा बड़ा कारण

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नीतीश कुमार के इस फैसले के पीछे उनकी बिगड़ती सेहत एक बड़ा कारण बताई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कार्यकाल के दौरान भी उन्हें लगातार स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।


सूत्रों का कहना है कि उनकी सेहत को लेकर पार्टी नेतृत्व चिंतित था। यही वजह है कि जेडीयू को इस मुद्दे पर बड़ा फैसला लेना पड़ा। बताया जा रहा है कि हाल के महीनों में मुख्यमंत्री के कई सार्वजनिक कार्यक्रमों के वीडियो सामने आए थे, जिनमें उनकी सेहत को लेकर सवाल उठने लगे थे।

गौर करने वाली बात यह भी है कि यह घोषणा उस समय आई है जब कुछ ही दिन पहले नीतीश कुमार ने अपना 75वां जन्मदिन मनाया था।

बीजेपी को मिल सकता है फायदा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार के हटने से भाजपा को बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने का मौका मिल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नया मुख्यमंत्री भाजपा से हो सकता है।

पिछले कुछ सालों में बिहार की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी का प्रभाव काफी बढ़ा है और वह NDA में प्रमुख ताकत बनकर उभरी है। हालांकि, 2020 और 2025 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को जेडीयू से ज्यादा सीटें मिली थीं, फिर भी गठबंधन ने नीतीश कुमार को ही मुख्यमंत्री बनाए रखा था।

इसकी बड़ी वजह उनकी लोकप्रियता और उनकी "सुशासन बाबू" वाली छवि मानी जाती है। महिलाओं के लिए शुरू की गई कई योजनाओं और प्रशासनिक छवि के कारण उन्हें जनता का व्यापक समर्थन मिला था।

जेडीयू में उत्तराधिकार की तैयारी?

नीतीश कुमार के इस फैसले को जेडीयू में नेतृत्व परिवर्तन की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उनके बेटे निशांत कुमार जल्द ही राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।

अटकलें हैं कि निशांत कुमार को बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है और इसी के साथ उनकी राजनीतिक पारी की शुरुआत हो सकती है।

विपक्ष पहले से उठा रहा था सवाल

नीतीश कुमार की सेहत को लेकर विपक्ष पहले भी कई बार सवाल उठा चुका है। हाल के महीनों में उनकी सार्वजनिक मौजूदगी को लेकर भी चर्चा होती रही थी।

अब उनके अचानक इस्तीफे और राज्यसभा जाने के फैसले ने इन चर्चाओं को और तेज कर दिया है। बिहार की राजनीति में यह बदलाव आने वाले समय में राज्य की सत्ता और गठबंधन की दिशा तय कर सकता है।

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