युद्ध थम गया फिर भी लगने वाला है महंगाई का तगड़ा झटका! और जेब ढीली करेंगी हवाई टिकटें, ये है वजह

Airfares Price Hike: वैश्विक ऊर्जा मार्गों में भू-राजनीतिक तनाव के कारण व्यवधान आया है। इसके अलावा, खाड़ी क्षेत्र और प्रमुख एशियाई निर्यातकों जो दुनिया की कुल जेट ईंधन आपूर्ति का लगभग 40% हिस्सा संभालते हैं वहां से रिफाइनरी आउटपुट में कमी आई है। गर्मियों की छुट्टियों में यात्रा करने वालों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने वाली है, जिससे ईंधन की मांग बढ़ रही है। इसके उलट, वैश्विक स्तर पर जेट ईंधन का स्टॉक फिलहाल काफी कम है

अपडेटेड Jun 24, 2026 पर 5:55 PM
एक रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर यह स्थिति बनी रही, तो हवाई किराए आसमान छू सकते हैं

Will Flight Tickets Get Costlier: अगर आप भी इस तपती गर्मी में पहाड़ों की सैर करने या परिवार के साथ कहीं बाहर घूमने के लिए हवाई सफर की प्लानिंग कर रहे हैं, तो यह खबर आपकी जेब का बजट बिगाड़ सकती है। उद्योग के अनुमानों और एक ताजा वैश्विक रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले व्यस्त समर सीजन में हवाई टिकटों की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।

इस संभावित बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विमान ईंधन की सप्लाई में आ रही रुकावटें हैं। McKinsey की एक रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि यह स्थिति बनी रही, तो हवाई किराए आसमान छू सकते हैं। आइए समझते हैं कि आपकी फ्लाइट टिकटें कितनी महंगी हो सकती हैं और इसके पीछे की पूरी गणित क्या है।

20 से 25% तक महंगी हो सकती हैं फ्लाइट टिकटें!


मैकिन्से की रिपोर्ट के अनुसार, एयरलाइन कंपनियों के कुल परिचालन खर्च का लगभग 30% हिस्सा अकेले विमान ईंधन (ATF) पर खर्च होता है। रिपोर्ट में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि अगर वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतें इसी रफ्तार से बढ़ती रहीं, तो एयरलाइन कंपनियां इसका बोझ सीधे यात्रियों की जेब पर डालेंगी। इसके चलते आने वाले दिनों में हवाई किरायों में 20 से 25% तक की बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

क्यों गहराया जेट ईंधन का संकट?

विमान ईंधन की कीमतों पर इस समय चौतरफा दबाव बना हुआ है, जिसके मुख्य कारण ये हैं:

सप्लाई और रिफाइनरी पर दबाव: वैश्विक ऊर्जा मार्गों में भू-राजनीतिक तनाव के कारण व्यवधान आया है। इसके अलावा, खाड़ी क्षेत्र और प्रमुख एशियाई निर्यातकों जो दुनिया की कुल जेट ईंधन आपूर्ति का लगभग 40% हिस्सा संभालते हैं वहां से रिफाइनरी आउटपुट में कमी आई है।

कम स्टॉक और बढ़ती डिमांड: गर्मियों की छुट्टियों में यात्रा करने वालों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने वाली है, जिससे ईंधन की मांग बढ़ रही है। इसके उलट, वैश्विक स्तर पर जेट ईंधन का स्टॉक फिलहाल काफी कम है।

क्या है 'क्रैक स्प्रेड' और यह कैसे बढ़ा रहा है मुसीबत?

ईंधन संकट की गंभीरता को समझने के लिए 'क्रैक स्प्रेड' को जानना जरूरी है। यह कच्चा तेल खरीदने और उसे रिफाइंड ईंधन उत्पाद जैसे- जेट फ्यूल में बदलने के बीच के मूल्य अंतर को मापता है। आम तौर पर, ऐतिहासिक रूप से यह अंतर $20 प्रति बैरल के आसपास रहता आया है।

मैकिन्से के मुताबिक, साल 2026 में यह क्रैक स्प्रेड औसतन $50 प्रति बैरल से भी अधिक रह सकता है। यह उछाल साफ संकेत देता है कि ईंधन को रिफाइंड करने की लागत और मार्जिन बहुत ज्यादा बढ़ चुके हैं, जिसका सीधा असर टिकट की कीमतों पर पड़ेगा।

साफ है कि आने वाले हफ्तों में विमानों का सफर सस्ता नहीं रहने वाला है। अगर आप गर्मियों की छुट्टियों में कहीं जाने का मन बना रहे हैं, तो आखिरी मिनट की बुकिंग से बचें। विशेषज्ञों की सलाह है कि इस संभावित 25% तक की बढ़ोतरी से बचने के लिए टिकटों की बुकिंग जितना जल्दी हो सके, एडवांस में ही कर लें ताकि महंगे होते जेट फ्यूल का असर आपके वेकेशन के बजट पर न पड़े।

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