फाइनल वोटर लिस्ट से कट जाएंगे मतुआ वोटर के नाम? बंगाल चुनाव से पहले बड़ा सस्पेंस!

केंद्र सरकार ने मार्च 2024 में CAA के तहत नागरिकता देने के नियम बना दिए थे, लेकिन लंबे समय तक पश्चिम बंगाल में इसकी राज्य स्तरीय कमेटी नहीं बनी। लेकिन अब चुनाव से ठीक पहले शुक्रवार (20 फरवरी) को केंद्र सरकार ने एक कमेटी गठित की है, जिसका काम आवेदनों की जांच कर यह तय करना है कि किसे नागरिकता मिलेगी और किसका आवेदन खारिज होगा

अपडेटेड Feb 21, 2026 पर 5:13 PM
Story continues below Advertisement
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट को लेकर हलचल मचा हुआ है।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट को लेकर हलचल मचा हुआ है। इसी बीच राज्य में ऐसा चर्चा है कि 28 फरवरी को जारी होने वाली फाइनल वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में मतुआ समुदाय के लोगों के नाम कट सकते हैं। दरअसल, यह मामला SIR प्रक्रिया और नागरिकता से जुड़ा हुआ है। बताया जा रहा है कि जिन मतुआ लोगों के पास अभी भारतीय नागरिकता नहीं है, उनके नाम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं किए गए हैं। नियम के मुताबिक, जब तक किसी के पास नागरिकता नहीं होती, उसे वोट देने का अधिकार भी नहीं मिलता।

बता दे कि केंद्र सरकार ने मार्च 2024 में CAA के तहत नागरिकता देने के नियम बना दिए थे, लेकिन लंबे समय तक पश्चिम बंगाल में इसकी राज्य स्तरीय कमेटी नहीं बनी। लेकिन अब चुनाव से ठीक पहले शुक्रवार (20 फरवरी) को केंद्र सरकार ने एक कमेटी गठित की है, जिसका काम आवेदनों की जांच कर यह तय करना है कि किसे नागरिकता मिलेगी और किसका आवेदन खारिज होगा। लेकिन सवाल यह है कि जब 28 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट जारी हो जाएगी, तब तक क्या हजारों मतुआ लोगों को नागरिकता मिल पाएगी?

राज्य के कई इलाकों में इस मुद्दे को लेकर भारी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। सत्ताधारी पार्टी तृणमूल का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में नाम पहले ही हटाए जा चुके हैं और अब फाइनल लिस्ट में और भी नाम बाहर किए जा रहे हैं। इससे मतुआ समुदाय के लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।


वहीं, भाजपा नेताओं का कहना है कि हिंदुओं और मतुआ समुदाय के अधिकारों की बात सिर्फ BJP ने की है। वहीं तृणमूल कांग्रेस पर आरोप लगाया जा रहा है कि उसने बार-बार इस समुदाय को भ्रमित किया है। दूसरी ओर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस भी विपक्ष पर हमला बोल रही है, और सवाल उठा रही हैं कि आखिर मतुआ वोटरों के भविष्य को लेकर इससे पहले कोई ठोस योजना क्यों नहीं बनाई गई। अब सभी की नजर 28 फरवरी पर टिकी है, जब फाइनल वोटर लिस्ट जारी होगी। अगर बड़ी संख्या में मतुआ लोगों के नाम बाहर रहते हैं, तो इसका सीधा असर आगामी विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है। मतुआ समुदाय बंगाल की कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है, ऐसे में यह मुद्दा चुनावी गणित बदलने वाला साबित हो सकता है।

कुल मिलाकर, चुनाव से ठीक पहले वोटर लिस्ट और नागरिकता का यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि कितने नाम सूची में रहते हैं और कितने बाहर होते हैं।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।