सेना के जवानों को फंसाने के के लिए पाकिस्तानी बुन रहे हनीट्रैप का जाल, गृह मंत्रालय नई SOP जारी करते हुए दी चेतावनी

Pakistani Honeytraps: गृह मंत्रालय की इस SOP में बताया गया है कि विदेशी खुफिया ऑपरेटिव फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं। वे अक्सर 'युवा और आकर्षक महिलाओं' की फर्जी प्रोफाइल फोटो का इस्तेमाल करते हैं ताकि पुलिस अधिकारियों को लुभा सकें

अपडेटेड Feb 16, 2026 पर 12:44 PM
ऑपरेटिव खुद को पत्रकार, रिसर्चर या रिटायर्ड अधिकारी बताकर दोस्ती करते हैं और धीरे-धीरे सीक्रेट जानकारियां निकलवाना शुरू कर देते हैं

Pakistani Honeytraps: देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने एक बेहद गंभीर चेतावनी जारी की है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों द्वारा भारतीय सुरक्षाबलों को सोशल मीडिया पर 'हनीट्रैप' में फंसाने की कोशिशें तेज हो गई है। इस खतरे से निपटने के लिए मंत्रालय ने सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी किया है, ताकि संवेदनशील जानकारियां दुश्मन के हाथ न लगें।

'युवा और आकर्षक' प्रोफाइल से रहे सावधान

गृह मंत्रालय की इस SOP में बताया गया है कि विदेशी खुफिया ऑपरेटिव फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं। वे अक्सर 'युवा और आकर्षक महिलाओं' की फर्जी प्रोफाइल फोटो का इस्तेमाल करते हैं ताकि पुलिस अधिकारियों को लुभा सकें। इसके अलावा ये ऑपरेटिव खुद को पत्रकार, रिसर्चर या रिटायर्ड अधिकारी बताकर दोस्ती गांठते हैं और धीरे-धीरे गोपनीय जानकारियां निकलवाना शुरू कर देते हैं।


क्या करें और क्या न करें

पुलिसकर्मियों के लिए जारी गाइडलाइंस में कुछ कड़े निर्देश दिए गए हैं:

पहचान छुपाएं: सोशल मीडिया पर अपनी पहचान पुलिस अधिकारी के रूप में उजागर न करें।

फ्रेंड रिक्वेस्ट: अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें और अपनी 'ऑनलाइन विजिबिलिटी' सिर्फ जान-पहचान के लोगों तक सीमित रखें।

लिंक और ऐप्स: नौकरी, पैसे या फ्री ट्रिप का लालच देने वाले संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें। बिना जांच-पड़ताल के कोई भी ऐप डाउनलोड न करें।

ऑफिशियल काम: आधिकारिक कामकाज या दस्तावेजों को साझा करने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कतई न करें।

अगर कोई अधिकारी फंस जाए, तो क्या होगा?

गृह मंत्रालय ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर किसी अधिकारी के 'कॉम्प्रोमाइज' होने का शक होता है, तो तुरंत सख्त कदम उठाए जाएंगे:

डिवाइस की जब्ती: संबंधित अधिकारी के मोबाइल और डिजिटल डिवाइस तुरंत जब्त कर लिए जाएंगे ताकि डेटा डिलीट न किया जा सके।

पूछताछ: इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के साथ मिलकर उस अधिकारी से कड़ी पूछताछ की जाएगी।

निगरानी: राज्य पुलिस की काउंटर-इंटेलिजेंस विंग इन नियमों के पालन की निगरानी करेगी और केंद्रीय एजेंसियों के साथ तालमेल बिठाएगी।

जिम्मेदारी और सुरक्षा के उपाय

SOP में पासवर्ड को मजबूत रखने, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) का उपयोग करने और समय-समय पर प्राइवेसी चेक करने की सलाह दी गई है। मंत्रालय ने याद दिलाया है कि सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई किसी भी सामग्री के लिए पुलिसकर्मी खुद जिम्मेदार होंगे। अगर कोई गोपनीय जानकारी साझा करता पाया गया, तो उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि आपराधिक मामले भी दर्ज किए जा सकते हैं।

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