Artificial Intelligence: क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वजह से बड़ी संख्या में लोगों की नौकरियां खत्म हो जाएंगी?

इंडिया में आबादी में शिक्षित बेरोजगारी लोगों की हिस्सेदारी बढ़ रही है। ILO के डेटा से यह पता चलता है। इंडिया दुनिया के ऐसे देशों में शामिल हैं, जहां नौकरियों के पर्याप्त मौके पैदा करना दशकों से सरकार के लिए सबसे बड़ा चैलैंज रहा है

अपडेटेड Mar 29, 2025 पर 1:18 PM
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एआई का असर उन सेक्टर्स पर देखने को मिल सकता है, जिन्हें AI के इस्तेमाल से फायदा हो सकता है।

दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। यह आम लोगों की जिंदगी से जुड़ता जा रहा है। अभी यह नहीं पता कि आने वाले सालों में यह दुनिया पर किस तरह से असर डालेगा। लेकिन, नौकरियों पर पड़ने वाले असर को लेकर चर्चा लगातार बढ़ रही है। यह अभी बताने की स्थिति में कोई नहीं है कि यह नौकरियों के मौके के लिहाज से फायदेमंद होगा या खराब होगा। लेकिन, इंडिया जैसे देशों को हाई अलर्ट पर रहना होगा, जहां नौकरियों के मौके बढ़ाने का चैलेंज है।

पश्चिमी देशों के मुकाबले इंडिया में AI का कम असर पड़ेगा

इंडिया की बात की जाए तो सरकार के एक शीर्ष अधिकारी की बयान राहते देने वाली है। मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी (MeiTY) के सचिव एस कृष्णनन ने हाल में कहा था कि AI का इंडिया में ऑर्गेनाइज्ड सेक्टर में नौकरियों पर ज्यादा असर पड़ने के आसार नहीं हैं। इसकी वजह यह है कि पश्चिमी देशों के मुकाबले इंडिया में काफी कम व्हाइट कॉलर जॉब्स पर एआई का खतरा है। उन्होंने कहा था, "हमें नहीं लगता कि ज्यादातर ऑफिस जॉब्स को एआई से खतरा है।"


सरकार जॉब मार्केट पर एआई के असर को लेकर सतर्क

हालांकि, सरकार इस बारे में पूरी सावधानी बरत रही है। सरकार जॉब मार्केट पर पड़ने वाले AI के असर को लेकर काफी सतर्क है। 2024-25 के इकोनॉमिक सर्वे में एआई पर पूरा एक चैप्टर था। एआई का असर उन सेक्टर्स पर देखने को मिल सकता है, जिन्हें AI के इस्तेमाल से फायदा हो सकता है। इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन (ILO) की रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडिया में शिक्षित बेरोजगार लोगों की आबादी में हिस्सेदारी 2000 में 54.2 फीसदी थी, जो 2022 में बढ़कर 65.7 फीसदी हो गई। इस आंकड़े को एआई के असर के लिहाज से देखा जाए तो चिंता पैदा होती है।

इंडिया में बढ़ रहा है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल

यह सच है कि इंडिया में AI का इस्तेमाल बढ़ने जा रहा है। ऐसे में जॉब पर इसका असर पड़ना तय है। यह चिंता तब और बढ़ जाती है जब हम आबादी में शिक्षित बेरोजगार लोगों की बढ़ती संख्या पर गौर करते हैं। NASSCOM के इंडिकेटर के मुताबिक, AI adoption index 2022 में 4.5 था, जो 2024 में बढ़कर 2.47 हो गया। इंडिया में AI का मार्केट अगले 3-4 सालों में 25-35 फीसदी CAGR से बढ़ने वाला है। इसका मतलब है कि कंपनियों के कामकाज में AI की हिस्सेदार बढ़ने वाली है।

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एआई के इस्तेमाल से सामाजिक लक्ष्य हासिल करने में मिल सकती है मदद

अगर सरकार बड़ा इंस्टीट्यूशनल फ्रेमवर्क बनाती है और स्ट्रेटेजिक प्लानिंग करती है तो AI क्राइसिस पैदा करने की जगह आर्थिक बदलाव का बड़ा जरिया बना सकता है। इससे तेजी से बढ़ते ऑटोमेटेड वर्ल्ड में इंडिया की धाक बढ़ सकती है। इकोनॉमिक सर्वे 2024-25 में कहा गया है कि पॉलिसीमेकर्स, प्राइवेट सेक्टर और एजुकेशन सेक्टर के बीच सहयोग से एआई का इस्तेमाल सामाजिक लक्ष्यों को इनोवेशन की मदद से हासिल किया जा सकता है।

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